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यूके के पूर्व कारोबारी साझेदार के जरिए लाभन्वित होने के आरोपों में घिर सकते हैं राहुल गांधी, जानें ये है मामला

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

रणविजय सिंह

राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चौकीदार चोर है, जैसे अभियान चला रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिकता के साथ पूर्व व्यवसायिक साझेदार के साथ लाभ कमाने के नए विवादों में घिरते दिख रहे हैं. लोकसभा चुनावों के बीच में राहुल गांधी की यूके स्थित फर्म बैकॉप्स लिमिटेड को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं. राहुल गांधी ब्रिटिश की नागरिकता को लेकर पहले ही भाजपा के निशाने पर आ चुके हैं.
अंग्रेजी अखबार बिजिनेस टुडे ने लिखा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यूके फर्म बैकॉप्स लिमिटेड ने यूपीए शासनकाल में रक्षा कंपनियों का अधिग्रहण किया. उलरिक मैकनाइट, बैकॉप्स यूके के 35% सह-मालिक थे. 2003 से 2009 के बीच राहुल गांधी के पास इस कंपनी की 65% इक्विटी का बहुमत था. मैकनाइट ने 2011 में स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के खिलाफ फ्रांसीसी रक्षा आपूर्तिकर्ता नौसेना समूह से ऑफसेट अनुबंध हासिल किया था.
बिजिनेस टुडे ने लिखा कि इंडिया टुडे की पड़ताल में हासिल किए गए दस्तावेजों से ऐसे संकेत मिलते हैं कि यूपीए शासन के दौरान राहुल गांधी के पूर्व व्यापार साझेदार से जुड़ी सहायक कंपनियों को फ्रेंच फर्म नेवल ग्रुप के ऑफसेट पार्टनर के रूप में रक्षा अनुबंध प्राप्त हुआ था. इस बीच भाजपा ने कांग्रेस पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता के मुद्दे पर ऐसे दस्तावेज जारी किए हैं जिससे स्थापित होता है कि राहुल गांधी ने यूके में बैकॉप्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी की स्थापना की थी जिसका साझेदार उलरिक मैक्नाइट नामक व्यक्ति था.
बैकॉप्स यूके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राहुल गांधी और मैक्नाइट कंपनी के संस्थापक निदेशक थे,  जहाँ गांधी के पास 65% शेयर और जून 2005 को मैक्नाइट के स्वामित्व वाले 35% शेयर थे. 2004 में कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दायर चुनावी हलफनामे के अनुसार राहुल गांधी ने अपने तीन खातों में बैंक बैलेंस सहित बैकॉप्स यूरोप से संबंधित चल-अचल संपत्ति घोषित की. यह कंपनी फरवरी 2009 में भंग कर दी गई थी.
रिपोर्ट के अनुसार इसी तरह के नाम वाली बैकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नाम वाली एक कंपनी से राहुल गांधी जुड़े हैं. इस कंपनी में उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सह-निदेशक के रूप में काम किया. राहुल गांधी ने 2004 के अपने चुनावी हलफनामे में घोषणा की कि इस भारतीय फर्म में उनके पास 83% शेयर हैं और उन्होंने उसी में 2.50 लाख रुपये का पूंजी निवेश किया है. 2002 में शुरू हुई  इस कंपनी को भी बाद में भंग कर दिया गया. इसके अंतिम रिटर्न जून 2010 में दाखिल किए गए थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी के स्वामित्व वाली बैकॉप्स कंपनी के पूर्व व्यापार भागीदार और बाद में गठित होने वाली उनकी कंपनियां फ्रांसीसी रक्षा कंपनी नेवेल ग्रुप द्वारा दिए गए ऑफसेट अनुबंधों से लाभान्वित हुईं.
रक्षा सौदा
2011 में  अपने ऑफसेट दायित्वों के हिस्से के रूप में  फ्रांसीसी रक्षा निर्माण कंपनी नेवल ग्रुप (जिसे पहले DCNS के रूप में जाना जाता था) ने मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) में बनाई जा रही स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति के लिए विशाखापत्तनम स्थित फ्लैश फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. फ्रांसीसी फर्म ने लगभग 20,000 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एमडीएल के साथ काम करने के लिए अनुबंधित थी. उसी वित्तीय वर्ष में  भारतीय फर्म फ्लैश फोर्ज ने ऑप्टिकल आर्मर लिमिटेड नामक एक यूके आधारित कंपनी का अधिग्रहण किया.
अगले साल नवंबर 2012 में  फ्लैश फोर्ज के दो निदेशकों को ऑप्टिकल आर्मर लिमिटेड का निर्देशन दिया गया. 8 नवंबर  2012 को  जिस दिन इन दोनों व्यक्तियों को यूके कंपनी के निदेशक का दायित्व दिया गया, कांग्रेस अध्यक्ष के व्यापारिक साझेदार उलरिक मैक्नाइट को भी इस कंपनी का निर्देशन दिया गया. हालांकि, ऑप्टिकल आर्मर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह सच नहीं है. कहा गया है कि 2014 में ऑप्टिकल आर्मर द्वारा मैककेनाइट को केवल 4.9% शेयर आवंटित किए गए थे.
उधर, फ्लैश फोर्ज ने 2013 में Composit Resin Developments Limited नाम की एक अन्य यूके आधारित कंपनी का अधिग्रहण किया. उसी वर्ष मैक्नाइट ने फ्लैश फोर्ज लिमिटेड के दो निदेशकों के साथ एक निदेशक के रूप में भी कंपनी को ज्वाइन किया. नेवल ग्रुप की वेबसाइटों के अनुसार, उनके भारत के साझेदारों में फ्लैश फोर्ज और सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड (फ्लैश फोर्ज और एक अन्य फ्रेंच ग्रुप कॉयर्ड के बीच एक संयुक्त उद्यम) शामिल हैं. हालांकि, इस रिपोर्ट में मैक्नाइट का बयान नहीं है जिससे उसके पक्ष का पता चल सकता.
राहुल गांधी से जुड़ी भारतीय और यूरोपीय कंपनियों को फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप के साथ फ्लैश फोर्ज के अनुबंध करने से पहले भंग कर दिया गया था. यह तथ्य कि कांग्रेस अध्यक्ष के पूर्व व्यापार साझेदार को एक भारतीय ऑफसेट साझेदार की यूरोपीय सहायक कंपनियों के माध्यम से लाभ हुआ था, लोकसभा चुनावों के अंतिम चरण में विवादों का नया पिटारा खोल सकता है.
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फ्रांस की कंपनी दासौ एविएशन के साथ राफेल विमानों के करार में ऑफसेट समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी अनिल अंबानी को लगातार घेरते रहे हैं. ऐसे में यह सवाल भी उठ सकता है कि राहुल गांधी के हल्ला बोल अभियान से राफेल सौदा रद्द पर होने फ्रांस की उस कंपनी को तो फायदा नहीं होना था जिससे कांग्रेस अध्यक्ष का पूर्व साझेदार जुड़ा रहा है.

 

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