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#पुण्यतिथिः सुरत शब्द योग के जन्मदाता थे शिवदयाल साहब

#पुण्यतिथिः सुरत शब्द योग के जन्मदाता थे शिवदयाल साहब
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
दीक्षित हिन्दू संप्रदाय यानी राधा स्वामी सत्संग के संस्थापक शिव दयाल साहब ने हिन्दुओं के साथ सिखों में भी बराबर लोकप्रियता हासिल की. इन्हें राधा स्वामी मत की शिक्षाओं को प्रारंभ करने का श्रेय दिया जाता है. शिव दयाल साहब द्वारा सिखाई गई यौगिक पद्धति “सुरत शब्द योग” के तौर पर जानी जाती है. शिव दयाल साहब का जन्म 24 अगस्त, 1818 ई. को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्माष्टमी को हुआ था.
शिव दयाल साहब का मूल नाम ‘तुलसी राम’ है. 15 जून 1878 को अंतिम सांस लेने के पहले वह धार्मिक दीक्षाओं के लिए काफी लोकप्रिय हो चुके थे. उनके अनुयायी हिन्दू और सिख दोनों हैं.
  • शिव दयाल साहब के माता-पिता हाथरस के संत तुलसी साहब के अनुयायी थे.
  • पाँच वर्ष की आयु में शिव दयाल को पाठशाला भेजा गया, जहाँ उन्होंने हिन्दी, उर्दू, फारसी और गुरुमुखी सीखा. उन्होंने अरबी और संस्कृत भाषा पर भी समान पकड़ हासिल की.
  • एक धार्मिक वैष्णव परिवार में जन्में शिव दयाल साहूकार के रूप में स्थापित हुए थे.
  • छोटी आयु में ही शिव दयाल का विवाह फरीदाबाद के इज़्ज़त राय की पुत्री नारायनी देवी से हुआ था, जो स्वभाव की बहुत विशाल हृदयी थीं. वे पति के प्रति  समर्पित थीं.
  • शिव दयाल जी स्कूल से ही बांदा में एक सरकारी कार्यालय के लिए फ़ारसी के विशेषज्ञ के तौर पर चुन लिए गए थे, लेकिन यह नौकरी उन्हें रास नहीं आई. उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी और वल्लभगढ़ एस्टेट के ताल्लुका में फ़ारसी अध्यापक की नौकरी कर ली.
  • सांसारिक उपलब्धियाँ उन्हें रिझा नहीं सकीं. उन्होंने वह नौकरी भी छोड़ दी. अब शिव दयाल जी अपना समस्त समय धार्मिक कार्यों में लगाने के लिए घर लौट आए.
  • 1861 में उन्होंने संत सतगुरु के रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया और अनुयायियों के एक समूह का निर्देश देने लगे.
  • शिव दयाल साहब ने दो पुस्तकें लिखीं. एक गद्य में और एक छंद में. इन दोनों पुस्तकों का शीर्षक सार वचन है.
  • उनकी अस्थियां आगरा के पास एक बग़ीचे में स्थित समाधि में रखी गईं, जिसका नामकरण उनके नाम पर ही दयाल बाग किया गया है. यह इस संप्रदाय का प्रमुख मुख्यालय है.

 

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