Kumaraswamy Kamaraj, पुण्यतिथिः निःशुल्क शिक्षा और मिड-डे-मील के जनक थे कुमारास्वामी #कामराज, नेहरू को मजबूत करने के लिए लाए थे कामराज योजना

पुण्यतिथिः निःशुल्क शिक्षा और मिड-डे-मील के जनक थे कुमारास्वामी #कामराज, नेहरू को मजबूत करने के लिए लाए थे कामराज योजना

Kumaraswamy Kamaraj, पुण्यतिथिः निःशुल्क शिक्षा और मिड-डे-मील के जनक थे कुमारास्वामी #कामराज, नेहरू को मजबूत करने के लिए लाए थे कामराज योजना
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
2 अक्टूबर की तिथि भारत के तीन पुरोधाओं को याद करने के लिए हैं. इनमें महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है. दोनों दिग्गज नेताओं के आगे उत्तरी भारत में नई पीढ़ी भले ही दक्षिण भारत के दिग्गज नेता रहे के. कामराज को भूल चुकी है लेकिन यह कामराज ही थे जिन्होंने वर्तमान में देशभर में चल रही मिड-डे-मील और निःशुल्क शिक्षा की नींव डाली. कामराज ने आजादी के बाद तमिलनाडु में जन्मी पीढ़ी के लिए बुनियादी संरचना पुख्ता की थी. कामराज ने शिक्षा क्षेत्र के लिए कई अहम फैसले किए. उन्होंने यह व्यवस्था भी की कि कोई भी गांव बिना प्राथमिक स्कूल के न रहे. उन्होंने निरक्षरता हटाने का प्रण किया और कक्षा 11वीं तक निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा लागू कर दी.
साथ ही कामराज योजना और मिज-डे-मील योजना के जनक के. कामराज या कुमारास्वामी कामराज की पुण्यतिथि है. वह तमिलनाडु के दिग्गज कांग्रेसी नेता ही नहीं थे बल्कि केंद्र सरकार में एक दौर में उन्हें किंगमेकर के रूप में भी जाना जाता था. लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. उन्हें 1976 में मरणोपरांत ‘भारत रत्न‘ से नवाजा गया.
15 जुलाई 1903 को विरुधुनगर, मदुरै (तमिलनाडु) में जन्मे के. कामराज का 2 अक्टूबर 1975 को निधन हो गया था. के कामराज ‘नाडर जाति’ से उठकर मद्रास, बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और ‘कांग्रेस पार्टी’ के अध्यक्ष बने. तमिलनाडु की राजनीति में बिल्कुल निचले स्तर से अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले के कामराज साठ के दशक में ‘कांग्रेस संगठन’ में सुधार के लिए कामराज योजना प्रस्तुत करने के कारण भी विख्यात हुए.

कांग्रेस के अधिकृत ट्वीटर हैंडल पर कहा गया है कि उन्होंने तमिलनाडु के INC और CM के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने राज्य के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई. उन्होंने वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा और मिड डे मील लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

कामराज अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए लेकिन जार्ज जोसेफ के नेतृत्व वाले ‘वैकम’ सत्याग्रह ने उन्हें आकर्षित किया. महज 16 वर्ष की उम्र में वे कांग्रेस में शामिल हो गए. आजादी से पूर्व के अपने राजनीतिक जीवन में कामराज कई बार गिरफ्तार हुए. जेल में रहते हुए ही उन्हें म्युनिसिपल काउंसिल का अध्यक्ष चुना गया.
कामराज ने साठ के दशक की शुरुआत में महसूस किया कि कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती जा रही है. उन्होंने सुझाया कि पार्टी के बड़े नेता सरकार में अपने पदों से इस्तीफा दे दें और अपनी ऊर्जा कांग्रेस में नई जान फूंकने के लिए लगाएं. इस योजना के तहत उन्होंने खुद भी इस्तीफा दिया और लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम, मोरारजी देसाई और एसके पाटिल जैसे नेताओं को भी इस्तीफा देने के लिए नैतिक रूप से बाध्य होना पड़ा. यही योजना कामराज प्लान के नाम से विख्यात हुई. कहा जाता है कि कामराज प्लान की बदौलत वह केंद्र की राजनीति में इतने मजबूत हो गए कि जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद शास्त्री और इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने में उनकी भूमिका किंगमेकर की रही. वह तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे.
उनकी उस योजना के अंतर्गत करीब आधे दर्जन केंद्रीय मंत्रियों और करीब इतने ही मुख्यमंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा था. उस योजना का उद्देश्य कांग्रेस को मजबूत करना बताया गया लेकिन वास्तव में दिग्गजों के पद छोड़ देने से जवाहर लाल नेहरू को मजबूती मिली. वह अपनी नई टीम बनाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हो गए, जिसकी छवि 1962 के चीनी युद्ध के कारण धूमिल हुई थी.
दक्षिण भारत की राजनीति में कामराज एक ऐसे नेता भी रहे जिन्हें शिक्षा जैसे क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है. 13 अप्रैल 1954 को कामराज ने अनिच्छा के बाद भी तमिलनाडु का मुख्यमंत्री पद स्वीकार किया लेकिन प्रदेश को एक ऐसा नेता मिल गया जो उनके लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाने वाला था. कामराज लगातार तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने प्रदेश की साक्षरता दर, जो कभी सात फीसद हुआ करती थी, को बढ़ाकर 37 फीसद तक पहुंचा दिया.

 

 


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