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नेहरू का ढह चुका किला बचाने प्रयागराज आ रहीं हैं प्रियंका

नेहरू का ढह चुका किला बचाने प्रयागराज आ रहीं हैं प्रियंका
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

अमरीश मनीश शुक्ला

प्रयागराज । कांग्रेस के ढह चुके सबसे पुराने किले इलाहाबाद (प्रयागराज ) में क्या कांग्रेस की वापसी होगी ? यहां की आवाम पर खत्म हो चुके कांग्रेस के तिलिस्म को क्या फिर से जिंदा किया जा सकेगा ?  प्रियंका गांधी अपने पुरूखों की मिट्टी से क्या राहुल गांधी का राज तिलक कर सकेंगी ? मोदी मैजिक और कुंभ के मायाजाल से यहां की राजनीतिक पटकथा को क्या बदला जा सकेगा ? । वैसे तो ये सवाल नहीं कांग्रेस के भविष्य की पटकथा हैं , जिसकी लेखनी का सारा दारोमदार इंदिरा की अक्स कही जा रही प्रियंका से है। कांग्रेसियों के लिये रोशनी बनकर आयी प्रियंका गांधी से किसी करिश्मे की आस लगायी गयी है और उसी दिशा में प्रियंका का मिशन दिल्ली 18 मार्च से प्रयागराज में शुरू होगा। प्रियंका गांधी अपने परनाना पंडित जवाहर लाल नेहरू के घर और उनकी कर्मस्थली इलाहाबाद आ रही हैं।  उनकी उम्मीद यहां की आवाम है और वह खुद कांग्रेस और स्थानीय नेता और कार्यकताओं की आखिरी उम्मीद हैं।
चुनावी समर में उतर चुकीं प्रियंका गंगा के मुद्दे के साथ प्रयागराज में शंखनाद करेंगी और जल मार्ग से अपने यूपी फतह के यात्रा का प्रारंभ करेंगी। पिछले दिनों पीएम मोदी ने कुंभ के सहारे प्रयागराज से ही अपनी रणनीति को जाहिर किया था और उसी हिंदुत्व की आस्था का केन्द्र पतित पावनी गंगा के सहारे प्रियंका पीएम मोदी को घेरेंगी। प्रियंका न सिर्फ इलाहाबाद   (प्रयागराज) कांग्रेस में जान फूंकेंगी बल्कि वाराणसी तक जाकर नरेन्द्र मोदी को उनके संसदीय क्षेत्र में घेरेंगी।
यह दौरा बेहद अहम है और यूपी में यह साफ हो जायेगा कि प्रियंका क्या रोल अदा करने वाली हैं। यह भीड़ जुटाने का मौका तो होगा ही , जन जन तक पहुंचने के लिये प्रियंका ने अलग ही रणनीति बनायी है। वह जल मार्ग के सहारे उन गांवों तक पहुंचेंगी, जो गंगा का किनारा होने के कारण मुख्य धारा से कहीं न कहीं कटे होते हैं और उनके पास अलग मुद्दे और समस्याएं भी होती हैं। इसके लिये प्रियंका का पूरे रास्ते गंगा किनारे गांवों में नुक्कड़ कार्यक्रमों जैसा प्लान तैयार है। नास्ता, भोजन, विश्राम सबकुछ जनता के बीच आवाम के साथ और उनका सुख दुख पूछते हुये ही होगा।
नमामि गंगे, मिशन फार क्लीन गंगा के नाम पर अभी तक हुई लीपापोती को प्रियंका मुद्दा बनाकर जन भवनाओं के सहारे अपने राजनैतिक सफर को आयाम देंगी। प्रियंका प्रयागराज से स्टीमर के सहारे लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय करने वाली हैं और जगह जगह उनके स्वागत की तैयारी होगी जहां ग्रामीण महिलाओं के साथ स्थानीय मुद्दे भी नजर आयेंगे ओर उन्हें अपनी आवाज देने में प्रियंका कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी।
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