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प्रियंका गांधी का जनता से सीधा-सुलभ संवाद, भाजपाई जाल में न उलझने के दिए संकेत

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
नमक पर अंग्रेंजी शासन की ओर से लगाए गए टैक्स के खिलाफ महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च के 89 वर्ष पूरे होने पर अहमदाबाद पहुंचे गांधी परिवार में एक स्वाभाविक नेता के लक्षणों के दर्शन किए. प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनावी रथ को राष्ट्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ किए गए पलटवार की पटरी पर दौड़ाने के प्रयासों को अपनी परिभाषा के हिसाब से देशभक्ति के घोड़े से थामने का संदेश दिया. इस दौरान प्रियंका गांधी के संबोधन में जो सरलता और स्वाभाविक नेता के गुण दिखे, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में कभी सुनाई नहीं पड़ा.
प्रियंका ने साफ कर दिया है कि चुनावी बहस को राष्ट्रवाद के रंग में रंगने की भाजपा की रणनीति को कांग्रेस देशभक्ति की अपनी परिभाषा से थामने की कोशिश करेगी. ‘जागरूकता’ और ‘सही निर्णय’ यानि ‘सही वोट’ को ही जनता की सबसे बड़ी देशभक्ति बता प्रियंका ने बेलाग इसकी परिभाषा भी स्पष्ट कर दी.
प्रभावी क्षमता का संकेत
गुजरात के गांधीनगर में प्रियंका का पहला संबोधन बहुत बड़ा नहीं रहा लेकिन उनकी सरल, सुलभ और सारगर्भित संवाद शैली ने जनता से जुड़ने की क्षमता का संकेत दे दिया. प्रियंका का यह भाषण कांग्रेसियों के लिए चुनावी गरमी में बड़ी राहत की उम्मीद बन सकता है. इसकी वजह भी वाजिब है क्योंकि लंबे अर्से बाद कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा वक्ता मिला है जो जनता से सीधे संवाद का तार जोड़ता दिख रहा है. खासकर ऐसे दौर में जबकि पीएम नरेंद्र मोदी की ताकतवर संवाद क्षमता पूरे विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है.
कटुता से करेंगी परहेज
जनता से जागरूकता और अपने वोट को सबसे बड़ा हथियार बनाने की बात कहते हुए प्रियंका की टिप्पणी इसी ओर इशारा करती है कि वह कटुता से परहेज करेंगी. विरोधी पर हमला तो होगा लेकिन कटुता नहीं रहेगी. इसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा इन हथियारों से किसी को चोट, दुख या नुकसान नहीं पहुंचता मगर ये जनता को सबसे मजबूत बनाते हैं. हर साल दो करोड़ नौकरियां देने, हर व्यक्ति के खाते में कालेधन के 15 लाख रूपये से लेकर महिला सुरक्षा जैसे पूरे नहीं हुए वादे की बात उठा पीएम का नाम लिये बिना ही प्रियंका लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाती नजर आयीं कि उनका निशाना कहां है.
भाजपा की रणनीति में नहीं फंसने का संकेत
पुलवामा के बाद बालाकोट और फिर देशभर में उसे मुद्दे के रूप में प्रस्तुत कर भाजपा ने रणनीति साफ कर दी है लेकिन कांग्रेस ने कार्यसमिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा के जाल में उलझने वाली नहीं है. तय किया गया कि राजनीतिक बहस को जन मुद्दों के अखाड़े से बाहर ले जाने की भाजपा की रणनीति को किसी सूरत में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा. अहमदाबाद में कार्यसमिति की बैठक के तुरंत बाद गांधीनगर की रैली में प्रियंका ने इस पर अमल की शुरूआत कर दी. उन्होंने जनता से साफ कहा कि चुनाव में आप अपना भविष्य चुनने जा रहे हैं. इसीलिए चुनावी बहस फिजुल के मुददों पर नहीं बल्कि आमलोगों की जिंदगी बेहतर बनाने वाले मुद्दों पर होनी चाहिए.
केवल जोशीले नारे ही राष्ट्रवाद नहीं 
प्रियंका ने दो टूक यह संदेश देने का प्रयास किया है कि केवल जोशीले नारे ही राष्ट्रवाद नहीं बल्कि सोच-समझकर सही वोट का फैसला भी कतई कम राष्ट्रवाद नहीं है. बहरहाल प्रियंका के इस अंदाजे बयां को कांग्रेस जमीन पर कितनी दूर तक ले जाएगी इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ होगी। सियासी बहस को मुद्दों के ट्रैक पर लाने की कांग्रेस की कामयाबी भी इसी अनुपात पर निर्भर करेगी.

 

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