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#Chinavirus की लड़ाई में प्राइवेट डाक्टरों ने तो हद कर दी है

#Chinavirus की लड़ाई में प्राइवेट डाक्टरों ने तो हद कर दी है

कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए इस आपदा के क्षण में सहायता की बात तो दूर की है कुछ प्राइवेट डॉक्टर सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी यानी 1000 रुपया फीस लेने के बाद ही मरीज का इलाज कर रहे हैं

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए इस आपदा के क्षण में सहायता की बात तो दूर की है कुछ प्राइवेट डॉक्टर सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी यानी 1000 रुपया फीस लेने के बाद ही मरीज का इलाज कर रहे हैं
 आलोक श्रीवास्तव
हम सब पढ़ाई रोजी रोजगार के लिए ही करते हैं। यदि अपने भरण-पोषण के लिए कोई मेहनताना लेता है तो इसमें कोई खराबी नहीं है। लेकिन मेहनताना लेने की भी एक सीमा होती है , यह असीमित नहीं होती। लेकिन दुर्भाग्य से प्रयागराज के प्राइवेट डाक्टरों ने पैसा कमाने की हवस में सारी नैतिकता और मानवता को ही ताक पर रख दिया है। यह तब की स्थिति है जब डाक्टरों के पास धन की कमी नहीं है। यह ऐसे वक्त में हो रहा है जब कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरा भारत परेशान है। सरकारी डॉक्टर जान हथेली पर रखकर पीड़ितों का इलाज कर रहे हैं , सरकार गरीबों को आर्थिक मदद कर रही है और विभिन्न राजनीतिक दल और स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों का ध्यान रख रहीं हैं।

निजी डॉक्टर एक-एक हजार रुपया फीस वसूल रहे

ऐसे समय में जब इन्हें लोगों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए ये रोगियों से एक-एक हजार रुपया फीस के रूप में ले रहे हैं। समान्य हाल में ये 500 रुपये फीस लेते थे , यह फीस एक हफ्ते के लिए होता था। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार – दरियाबाद के रहमान अली का कहना है कि वह नियमिततौर पर इलाज कराने जाते हैं। दो दिन पहले दिक्कत बढ़ी तो डॉक्टर के पास गए। गेट बंद था। गार्ड ने बताया कि क्लीनिक बंद है। दिखाना है तो इमरजेंसी फीस 1000 रुपया लगेगी। उनके पास इतने पैसे नहीं थे, वह बच्चे के साथ घर गए और पैसे लेकर आए। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें देखा। इसी तरह हिम्मतगंज की शालिनी सिंह के बच्चे को बुखार था। पड़ोस के एक डॉक्टर की क्लीनिक पहुंचीं तो उनसे भी इमरजेंसी फीस के नाम पर 800 रुपये लिए गए। ये दो मामले तो सिर्फ उदाहरण मात्र हैं।
ऐसे अनेक डॉक्टर शहर में हैं जो इस विकट बेला में मदद करने की बजाए दोगुनी फीस वसूल रहे हैं। इन डाक्टरों का कहना है मरीजों की संख्या कम होने से वे अधिक फीस ले रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति को इमरजेंसी नहीं तो और क्या कहेंगे ? वाह रे डॉक्टर साहब मरीजों की संख्या कम हो जाए तो आप दूसरे मरीज से इसकी पूर्ति करेंगे ? सहायता नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम दोगुनी फीस तो मत लीजिए। क्या आप दिहाड़ी मजदूर से भी गरीब हो गए हैं ? मेरा तो मानना है कि आप देश के सबसे ज्यादा गरीब व्यक्ति हैं क्योंकि आपकी सोच बेहद गरीब है , भले ही आपके पास पैसा हो। मैं तो सरकार से निवेदन करूँगा कि इन तथाकथित गरीब डाक्टरों के खाते में भी कुछ पैसा डाल दे जिससे ये अपने परिवार का खर्च चला सकें ।

जरा इस गणित पर भी ध्यान दीजिए

चाहे जितना कमा लीजिए, सबकुछ यहीं रह जाएगा। अच्छा काम करेंगे तो लोग सम्मान से नाम लेंगे वरना गाली तो मिलेगी ही। सोच लीजिए डॉक्टर साहब आपको क्या चाहिए ? यदि एक डॉक्टर प्रतिदिन 30 नए मरीज देखे और फीस के रूप में सिर्फ 200 रुपये ले तो उसकी रोज की आमदनी 6000 रुपये होगी , यानी एक महीने में एक लाख 80 हजार रुपये की आय। यदि डॉक्टर महीने में 25 दिन ही मरीजों को देखे , तो भी हर महीने की आय एक लाख 50 हजार रुपये होगा। अपने दो कर्मचारियों को वह 15-15 हजार रुपये महीने में तनख्वाह दे दे , तबभी डॉक्टर को एक लाख 20 हजार रुपये महीने में मिलेंगे। क्या इतना धन परिवार चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है ? अभी दवा कम्पनियों , दवा की दुकानों और जांच केंद्रों से मिलने वाला कमीशन बाकी है। इससे इनकी आय हर हाल में एक लाख बीस हजार से ज्यादा होगी। प्राइवेट डॉक्टर की यह न्यूनतम आय है , अधिकतम कुछ भी हो सकता है। इतनी अधिक आय होने के बाद भी ऐसी तुच्छ हरकत और सोच शर्मिंदा करने वाली है । ऐसा सिर्फ प्रयागराज में ही नहीं हो रहा है बल्कि देश के सभी हिस्सों में हो रहा होगा। सरकार को चाहिए कि ऐसे प्राइवेट डाक्टरों की फीस पर भी अंकुश लगाने की ओर ध्यान दे जिससे गरीबों का इलाज संभव हो सके।

 


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