income tax, आयकर के 15 भ्रष्ट अफसरों को नौकरी से हटाने के फैसले को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

आयकर के 15 भ्रष्ट अफसरों को नौकरी से हटाने के फैसले को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

income tax, आयकर के 15 भ्रष्ट अफसरों को नौकरी से हटाने के फैसले को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही भ्रष्टाचार के आरोपी आयकर विभाग के 15 वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टी हो गई है. राष्ट्रपति ने 50 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले पर मुहर लगा दी है. वित्त मंत्रालय के अधिकृत ट्वीटर हैंडल पर इसकी जानकारी भी सार्वजनिक कर दी गई है. मंगलवार की दोपहर वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा कि मौलिक नियमों के नियम 56 के खंड (जे) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग से भारत के राष्ट्रपति ने 50 वर्ष की आयु पूरी करने पर सार्वजनिक प्रभाव में भारतीय राजस्व सेवा (C&CE) के 15 अधिकारियों को सेवानिवृत्त कर दिया है.

एक अन्य ट्वीट में मंत्रालय ने कहा है कि इन सभी 15 अधिकारियों को उसी दर पर गणना की गई 3 महीने की अवधि के लिए वेतन और भत्ते की राशि के बराबर राशि का भुगतान किया जाएगा, जिस पर उन्हें सेवानिवृत्ति से तुरंत पहले उन्हें (वेतन और भत्ते) वापस लेने थे.

मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (CBIC) द्वारा इस आशय के लिए प्रत्येक मामले में एक अलग आदेश आज जारी किया गया है.

पिछले दिनों आयकर विभाग के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आई थीं कि भ्रष्टाचार और यौन शोषण के आरोपी 12 अफसरों को वित्त मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया है. हालांकि, अब वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ऐसे अफसरों की संख्या 15 है. आरोपी अफसरों में ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अफसर भी शामिल हैं. ज्यादातर अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो एक अफसर पर यौन शोषण का भी आरोप है.
अफसरों की इस लिस्ट में सबसे पहला नाम एक जॉइंट कमिश्नर रैंक के अफसर का है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार और तांत्रिक चंद्रास्वामी की मदद करने वाले कारोबारियों से जबरन वसूली की गंभीर शिकायतें मिली थीं.
इनमें एक IRS अधिकारी भी हैं जो नोएडा में कमिश्नर (अपील) के पोस्ट पर तैनात थे. उन पर कमिश्नर रैंक की ही दो IRS महिला अफसरों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि, इन अफसर को लेकर पिछले दिनों सोशल मीडिया में ऐसा भी कहा गया कि उन्होंने तमाम भ्रष्टाचारी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की थी. इसीलिए सभी ने लामबंद होकर उनके खिलाफ अभियान चलाकर फंसाया है. अभियान चलाने वालों में एक बड़े पत्रकार का नाम भी लिया गया, जिनकी पत्नी आयकर विभाग में कमिश्नर रैंक की हैं.
जबरन रिटायर किए गए एक और IRS अफसर पर अपने और परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम 3.17 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अर्जित करने का मामला है. चल और अचल संपत्तियां उन्होंने कथित तौर पर अपने पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और गैरकानूनी तरीके से जुटाई थी.
कमिश्नर पर था आय से अधिक संपत्ति का केस
इनमें आयकर विभाग के एक कमिश्नर भी हैं, जिनके खिलाफ CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था. उन्हें अक्टूबर 2009 में सेवा से निलंबित कर दिया गया था. उन पर आपराधिक मुकदमा लंबित था. अब सरकार ने इन्हें भी जबरन रिटायर कर दिया है.
एक और वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार और वसूली के कई मामलों में लिप्त पाए गए. उन्होंने कई गलत और बदनीयत से आदेश जारी किए थे, जिसे बाद में अपीलीय अथॉरिटीज द्वारा पलट दिया गया था। इन्हें भी सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है.
एक अफसर के पास से 1.55 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का पता चला, जो उनके आय के ज्ञात स्रोतों से 133.71 फीसदी ज्यादा है. इन्होंने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए हवाला चैनलों का भी इस्तेमाल किया. अब सरकार ने इन्हें भी जबरन रिटायर कर दिया है.
कमिश्नर रैंक के एक और अधिकारी पर गाज गिरी है. इन्हें फर्जी कंपनी के एक मामले में राहत पहुंचाने के लिए एक कारोबारी से 50 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप था. इन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गैरकानूनी तरीके से 3.13 करोड़ की बेहिसाब संपत्तियां अर्जित कर ली थी. सरकार ने इन्हें भी जबरन रिटायर कर दिया है. कमिश्नर रैंक के एक अधिकारी को इसलिए सेवा मुक्त किया गया है कि उन्होंने तमाम चेतावनी के बाद भी कई बड़े आयकर बकाएदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

क्या है नियम 56?

रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. सरकार के द्वारा इन अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिया जा सकता है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद बेहतर प्रदर्शन न करने वाले सरकारी कर्मचारी/अधिकारी को रिटायर करना होता है. सरकार के जरिए अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने का यह नियम काफी पहले से प्रभावी है.
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