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अति रक्तस्राव से हुई पूनम की मौत, पोस्टमॉर्टम से हुआ खुलासा, जसलोक में जच्चा बच्चा मौत का मामला

अति रक्तस्राव से हुई पूनम की मौत, पोस्टमॉर्टम से हुआ खुलासा, जसलोक में जच्चा बच्चा मौत का मामला

विस्तृत जांच के लिए डीएम ने सीएमओ की अगुवाई में बनाई समिति।

जीतेंद्र श्रीवास्तव
सुल्तानपुर। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से जो बात छन कर आ रही है उससे तो प्रसव के लिए आई चन्दौर गांव की पूनम की जान अति रक्तस्राव के कारण हुई है। इस बीच जिलाधिकारी सी. इंदुमति ने मुख्य चिकित्साधिकारी की अगुवाई में एक दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है जिसकी रिपोर्ट आने पर प्रशासनिक कार्यवाही शुरू की जाएगी।
सूत्र बताते है कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकितसक ने अपनी फाइंडिंग में मौत का कारण पीपीएच(pph) लिखा है। चिकित्सा विज्ञान व मेडिकल लॉ में पीपीएच का मतलब पोस्टपार्टम हेमरेज कहा जाता है जिसका मतलब प्राक्रतिक तरीके से होने वाले रक्तस्राव होता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में एक मिनट में 500 एमएल व सीजेरियन की स्थिति में एक लीटर खून इतनी तेजी से निकलता है कि उसे रोक पाना मुश्किल हो जाता है। सर्जन लोगों का कहना है कि पीपीएच के मामले में जान बचा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। सूत्रों का कहना है कि पोस्टमॉर्टेम में पूनम की बच्चेदानी में बच्चे की नाल व खून के थक्के भी मिले है। यह उसी स्थिति में होता है जब वेजिनल के रास्ते झटके से बच्चा यूटरस से बाहर आ जाय।
सीएमओ की जांच से ही होगा दूध पानी का फैसला
मीडिया में आ रही खबरों में पूनम तिवारी के परिजनों का आरोप है कि हालत खराब थी बच्चा मृत निकलने पर ही उन लोगों ने जच्चा को किसी तरह बचाने की बात कह कर नवजात को रात ही दफनाने चले गए थे। लौट कर आये तब पता चला कि प्रसूता की भी मौत हो गयी। जबकि जसलोक की ओर से भी कई मीडियाकर्मियों को बताया गया है कि स्ट्रेचर पर ही जोर जोर से झटके लेने के दौरान बच्चा पेट बाहर आ गया जो मृत था। पूनम की कंडीशन इतनी नाजुक थी कि उसे भर्ती करने की औपचारिकता भी निभाने का समय नही मिला। ऊपर से कोरोना के भय से भर्ती करने व इलाज करने के लिए कोई तैयार नही था। वह सिप्टीसीमिया की स्थिति में थी। सही क्या है कि जबरन प्रसव की कोशिश हुई या प्रसूता को अ रहे झटके से सब गड़बड़ हो गया इसी का पता सीएमओ सीबीएन त्रिपाठी की टीम जांच में लगाएगी।
कई सवालों के जवाब नही
ये तो तय है कि पूनम का ऑपरेशन नही हुआ ऐसे में गायनी, सर्जन व एनेस्थेटिक के वहां रहने का न रहने का सवाल लाजिमी नही लेकिन बिना परमिशन इंडोर इलाज करने का आरोप तो महत्वपूर्ण है। फिलहाल अभी तक जसलोक अस्पताल की लापरवाही का प्रथमदृष्टया मुकदमा दर्ज है जिसकी जांच सही नतीजे पर पहुंचना जरूरी है।

 


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