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शरद शर्मा की कविताः अवधधाम है “श्रीराम नगरी”

शरद शर्मा की कविताः अवधधाम है “श्रीराम नगरी”
यह अवध राम की है नगरी।
संस्कृति की दानवतन प्रहरी।।
सरयू सरि के अनुपम तट में।
श्रीराम बसे हैं घट घट मे।।
जन हृदय में विराज रहे,वह शोभा अब भी है ठहरी
दशरथ का राजमहल प्यारा।
है कनक भवन जग से न्यारा घर-घर में मंदिर जहाँ बने,
प्रभु के प्रति है आस्था गहरी
था रामराज्य आदर्श जहाँ ।
है शेष सभी प्रादर्श जहाँ ।।
श्रीराम लला से प्रीति जहाँ,कंण-कंण मे अब भी गहरी
चारों भैयों की छवि व्यंजित ।
सीता मैया थी अभिनंदित।।

जन्मोत्सव,ब्याह,तिलक,के क्षण,सज्जित थी दिहरी दिहरी
अतिशय पावन थे लोग जहाँ।
थे सभी सुपावन भोग जहाँ।।
श्रीरामजन्म अवशेष जहाँ, अब विवादित नही वह नगरी
हुआ अब आस्थाओं का आदर।
जोअब तक पीड़ा झेल रहे थे।।
क्यों अब तक बनी थी शेष समन्वय नीति नहीं।
अब जाकर पूर्ण हुई श्रीराम दर्शन की आश वहीं।।

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