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पीएम मोदी ने देश को समर्पित किया नेशनल वार मेमोरियल, कहा- राफेल की खरीद रोकने के लिए हो रही साजिश

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली में पत्थर से बने स्तंभ के नीचे ज्योति को प्रज्ज्वलित कर 40 एकड़ में फैले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) को देश को समर्पित किया। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश पर संकट चाहे दुश्मन के कारण आया हो या प्रकृति के कारण आया हो, हमारे सैनिकों ने सबसे पहले हर मुश्किल को अपने सीने पर लिया है। हमारे देश की सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक है।
इंडिया गेट के पास 40 एकड़ में बने इस युद्ध स्मारक की लागत 176 करोड़ रुपये आई है और यह रिकार्ड एक साल में बनकर पूरा हुआ है। इसकी 16 दीवारों पर 25,942 योद्धाओं का जिक्र किया गया है। ग्रेनाइट पत्थरों पर योद्धाओं के नाम, रैंक व रेजिमेंट का उल्लेख किया गया है।
इन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1947, 1965, 1971 व 1999 के भारत-पाकिस्तान युद्ध तथा श्रीलंका में शांति बहाल कराने के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इसका निर्माण गत वर्ष फरवरी में शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में युद्ध स्मारक का जिक्र करते हुए कहा था कि इसका न होना उन्हें अक्सर दुखी और आश्चर्यचकित करता था।

2014 में इस स्मारक का कार्य शुरू किया 
मोदी ने कहा कि कई दशकों से निरंतर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की मांग हो रही थी। कुछ प्रयास हुए लेकिन कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। 2014 में इस स्मारक का कार्य शुरू किया और इस कार्य को तय समय पर पूरा किया। इस ऐतिहासिक स्थान पर मैं, पुलवामा में शहीद हुए वीर सपूतों, भारत की रक्षा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले हर बलिदानी को नमन करता हूं। मैं राष्ट्र रक्षा के सभी मोर्चों पर मुश्किल परिस्थितियों में डटे हर वीर-वीरांगना को भी नमन करता हूं। आज मुझे बहुत संतोष है कि थोड़ी देर बाद आपका और देश का दशकों लंबा इतंज़ार खत्म होने वाला है। आज़ादी के सात दशक बाद मां भारती के लिए बलिदान देने वालों की याद में निर्मित राष्ट्रीय समर स्मारक, उन्हें समर्पित किया जाने वाला है।
रक्षा उत्‍पादन के बदलाव की शुरुआत हुई
हमने रक्षा उत्पादन के पूरे इको सिस्टम में बदलाव की शुरुआत की है। लाइसेंसिंग से निर्यात प्रक्रिया तक, हम पूरे तंत्र में पारदर्शिता ला रहे हैं। देश की सेना का मनोबल, देश की सुरक्षा तय करता है, इसलिए हमारे सभी प्रयासों में हमारी सोच और हमारे अप्रोच का केंद्रबिंदु हैं हमारे सैनिक, हमारे फौजी भाई।
पांच साल से नहीं मिली बुलेट प्रूफ जैकेट
कांग्रेस का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने हमला किया कि सेना और देश की सुरक्षा को उन लोगों ने अपनी कमाई का साधन बना लिया था। शायद शहीदों को याद करके उन्हें कुछ मिल नहीं सकता था, इसलिए उन्हें भुलाना ही उन्हें आसान लगा। पीएम मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया गया। इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि साल 2009 में सेना ने 1 लाख, 86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग की थी। 2009 से लेकर 2014 तक पांच साल बीत गए, लेकिन सेना के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं खरीदी गई। हमारी ही सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदा है।
इंडिया फर्स्ट और फैमिली फर्स्ट को लेकर किया कटाक्ष
आज देश का हर फौजी, हर नागरिक ये सवाल पूछ रहा है कि आखिर शहीदों के साथ ये बर्ताव क्यों किया गया? देश के लिए खुद को समर्पित करने वाले महानायकों के साथ इस तरह का अन्याय क्यों किया गया? वो कौन सी वजहें थीं, जिसकी वजह से किसी का ध्यान शहीदों के लिए स्मारक पर नहीं गया? इंडिया फर्स्ट और फैमिली फर्स्ट का जो अंतर है, वही इसका जवाब है।
बनेंगे तीन सुपर स्पेशिऐलिटी अस्पताल
आपकी मांग थी कि आपके लिए सुपर स्पेशिऐलिटीअस्पताल बनाया जाए। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे आपको ये बताने का सौभाग्य मिला है कि एक नहीं बल्कि हम ऐसे तीन सुपर स्पेशिऐलिटी अस्पताल बनाने जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन के लिए पिछली सरकारों में पूर्व सैनिकों को कितना संघर्ष करना पड़ा, आंदोलन करना पड़ा, देश इसका साक्षी रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि नया हिंदुस्तान, नया भारत, नई नीति और नई रीति के साथ आज आगे बढ़ रहा है। मजबूती के साथ विश्व पटल पर अपनी भूमिका तय कर रहा है। उसमें एक बड़ा योगदान आपके शौर्य, अनुशासन और सर्मपण है।
मिशन मोड पर हुई गोला बारूद की खरीदी
सेना के लिए अत्याधुनिक राइफलों को खरीदने और भारत में बनाने का काम भी हमारी सरकार ने ही शुरू किया है। हाल ही में सरकार ने 72 हजार आधुनिक राइफल की खरीद का ऑर्डर दिया है। साथ ही हमारी सरकार ने 25 हजार करोड़ रुपए का एम्यूनिशन यानि गोला-बारूद और गोलियां मिशन मोड में खरीदी है।
बोफोर्स से हेलीकॉप्‍टर तक की जांच एक ही परिवार तक
पीएम मोदी ने बोफोर्स का मामला उठाते हुए कहा कि बोफोर्स से लेकर हेलीकॉप्टर तक सारी जांच का एक ही परिवार तक पहुंचना, बहुत कुछ कह जाता है। अब यही लोग पूरी ताकत लगा रहे हैं कि भारत में राफेल विमान न आ पाए। अगले कुछ महीनों में जब देश का पहला राफेल भारत के आसमान में उड़ान भरेगा तो खुद ही इनकी सारी साजिशों को ध्वस्त कर देगा।
इंटरनैशनल फ्लीट रिव्यू में 50 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया
हमारे प्रयासों में दुनिया के बड़े-बड़े देश हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते हैं। यही कारण है कि 2016 में हमारे इंटरनैशनल फ्लीट रिव्यू में 50 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। यही कारण है कि एक के बाद एक देश हमारे साथ रक्षा सहयोग के समझौते करना चाहते हैं। देश की सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। जिन फैसलों को नामुमकिन समझा जाता था, उन्हें मुमकिन बना रहे हैं।
शौर्यगाथा अजर-अमर रहनी ही चाहिए
स्कूल से लेकर अस्पताल तक, हाईवे से लेकर एयरपोर्ट तक, स्टेडियम से लेकर अवॉर्ड तक हर जगह एक ही परिवार का नाम जुड़ा रहता था। मेरा यह स्पष्ट मानना है कि मोदी महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इस देश की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास सबसे ऊपर है। मोदी याद रहे न रहे, परंतु इस देश के करोड़ों लोगों के त्याग, तपस्या, समर्पण, वीरता और उनकी शौर्यगाथा अजर-अमर रहनी ही चाहिए।
आइए जानते हैं इस स्मारक की खूबियां 
  • प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान इसका वादा किया था और 2015 में स्वीकृति दी थी।
  • इसमें चार वृत्ताकार परिसर होंगे और एक ऊंचा स्मृति स्तंभ भी है, जिसके तले में अखंड ज्योति दीप्तमान रहेगी।
  • स्मारक में आजादी के बाद शहीद हुए 25,942 भारतीय सैनिकों के नाम इन पत्थरों पर लिखे गए हैं।
  • राष्ट्रीय युद्ध स्मारक परिसर में प्रवेश सभी के लिए निशुल्क है।
  • सशस्त्र बलों के भविष्य के समारोहों के लिए भी यह स्मारक स्थल के रूप में काम करेगा।
  • मुख्य संरचना को चार चक्रों के रूप में बनाया गया है, जिनमें से प्रत्येक सशस्त्र बलों के विभिन्न मूल्यों को दर्शाया गया है।
  • अपवाद रूप में मुख्य क्षेत्र और परम योदा स्टाल में समय की पाबंदी होगी। हर शाम रिट्रीट सेरेमनी भी होगी।
  • इस स्मारक की कुल लागत 176 करोड़ रुपये है।
  • चक्रव्यूह की संरचना से प्रेरणा लेते हुए इसे बनाया गया है। एक वैश्विक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से इसका डिजाइन चुना गया था।
  • आर्टिफिशियल लाइटिंग और वॉकिंग प्लाजा।
जलती रहेगी अमर जवान ज्योति
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश्र्वर ने बताया कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए जवानों की याद में इंडिया गेट के नीचे 1972 में प्रज्ज्वलित की गई अमर जवान ज्योति भी जलती रहेगी।

 

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