संसद पर हमले की बरसी में पीएम मोदी और राहुल गांधी हुए आमने-सामने, दुआ-सलाम भी नहीं

नई दिल्‍ली। हिन्दी पट्टी के छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आमने-सामने हुए. दोनों के बीच कुछ फिट की ही दूरी थी लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई. दोनों नेताओं ने एक दूसरे से दुआ-सलाम भी नहीं किया.

दोनों नेता 2001 में हुए संसद पर हमले की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आए थे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मनमोहन सिंह से बातचीत करते हुए देखा गया. केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री राज्य मंत्री रामदास आठवले और मंत्री विजय गोयल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हाथ मिलाया. कार्यक्रम में राज्‍यसभा चेयरमैन और उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा की अध्‍यक्ष सुमित्रा महाजन, भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी शामिल रहे.

राहुल गांधी वित्त मंत्री के ठीक पीछे सिर झुकाए खड़े थे. पीएम मोदी उनकी तरफ कुछ छड़ों के लिए देखते भी रहे. उप राष्ट्रपति वेंकैयानायडू ने भी यह दृष्य देखा लेकिन पीएम मोदी और राहुल के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.
उन्होंने इस दिन 17 साल पहले हमले में मारे गए शहीदों के चित्रों पर पुष्‍पांजलि अर्पित की. हमले में पांच दिल्ली पुलिसकर्मी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक महिला कॉन्स्टेबल, संसद के दो वार्ड स्टाफ, एक माली और एक कैमरामैन ने जान गंवा दी थी. कांग्रेस ने अभी हाल में राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश में हुए चुनाव में विजय हासिल की. मंगलवार को मतगणना हुर्इ थी.
गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने एक दूसरे पर जमकर प्रहार करते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे.

पीएम नरेंद्र मोदी अपनी सभाओं में कांग्रेसियों को ‘रागदरबारी’ और ‘राजदरबारी’ बताते हुए राहुल गांधी को ‘नामदार’ और खुद को ‘कामदार’ बताते हैं. मोदी राहुल गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लिए ‘नामदार’ बनाम ‘कामदार’ की चर्चा कई बार कर चुके हैं. वहीं राहुल गांधी ने मोदी पर हर भाषण में तीखा हमला बोला है. राहुल ने मोदी के लिए जनसभाओं में चौकीदार चोर है… जैसे नारे भी लगवाए हैं. चुनाव प्रचार और परिणाम के ठीक बाद दोनों के बीच तल्खी दिखी. हालांकि, यह माना जाता है कि बड़े नेता चुनाव प्रचार की तल्खियों को भाषणों तक ही सीमित रखते हैं लेकिन यहां एक सार्वजनिक समारोह में भी खिंचा-खिंचा माहौल देख हर कोई अनुमान लगा सकता था.

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