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#ईद के पहले देवनार स्लाटर हाउस का दौरा कर पेटा इंडिया ने दिखाईं रूह कंपा देने वाली तस्वीरें और वीडियो

#ईद के पहले देवनार स्लाटर हाउस का दौरा कर पेटा इंडिया ने दिखाईं रूह कंपा देने वाली तस्वीरें और वीडियो
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
देशभर में ईद की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ भी है. ईद पर कुर्बानी के लिए लाखों जानवरों की खरीद हो चुकी है. इस पेटा इंडिया ने मुंबई के देवनार स्लाटर हाउस का दौरा कर ऐसी तस्वीरें पेश की हैं जिन्हें देखकर स्लाटर हाउस में हलाल किए जानवरों का मांस खाने में किसी को भी हिचकिचाहट हो सकती है. पेटा इंडिया ने स्लाटर हाउस का जो वीडियो जारी किया है उसमें साफ दिख रहा है कि ट्रकों पर भूंसे की तरह भरकर लाने के दौरान बड़ी संख्या में जानवर मर गए हैं. मरे हुए जानवरों को भी काटने की तैयारी है. भेंड़ और बकरियों को ट्रकों से उतारे जाने के दौरान आलू के बोरों की तरह फेंका जा रहा है. पेटा इंडिया के कार्यकर्ताओं ने 8 अगस्त को चोरी-छिपे इन तस्वीरों को बनाया है.
फिलहाल, पेटा इंडिया ने आह्वान किया है कि मुसलमान दया दिखाते हुए शाकाहारी खाद्य पदार्थ वितरित कर दान के लिए स्वेच्छा से या अन्य कार्यों को करते हुए ईद उल-अजहा का पालन करें जिसमें जानवरों की हत्या शामिल नहीं है. संस्था ने कहा कि हमने महाराष्ट्र राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुंबई पुलिस, बृहन्मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र राज्य पशु कल्याण बोर्ड, सोसाइटी फॉर क्रूएल्टी टू एनिमल्स, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया और फ़ूड के अधिकारियों को भी पत्र भेजे हैं. सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से भी संगठन ने मांग की है कि वे बूचड़खाने का तत्काल निरीक्षण करें और सुविधा के आधार पर पशु परिवहन और वध संबंधी कानूनों को लागू करें.

निष्कर्षों में निम्नलिखित शामिल हैं:
• एक कार्यकर्ता द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार गंभीर भीड़ और देखभाल की कमी के कारण पशु परिवहन के दौरान नियमित रूप से मर जाते हैं.
• मृत भैंसों के शरीर को बुलडोजर द्वारा स्लाटर हाउस परिसर में ले जाया जा रहा है.
• भैंस, बकरियों और भेड़ों की लाशों से भरा एक शेड है, जिन्हें काटने के लिए जमा किया गया है.

संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्षों में बूचड़खाने की यात्राओं में पेटा इंडिया ने यह भी पाया कि तमाम भैंसें ढुलाई के दौरान ही मर गई थीं. मरे हुए जानवरों के मांस से बीमारियां फैलने का भी खतरा है. भैंस, बकरियों और भेड़ों को मारे जाने से पहले जांच नहीं की गई थी, जो पशु क्रूरता की रोकथाम के तहत ( स्लॉटर हाउस) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा और मानक (लाइसेंसिंग और खाद्य व्यवसायों का पंजीकरण) विनियम, 2011 एक आवश्यकता है। इसका मतलब है कि जानवरों को जब वे दर्द महसूस करने में सक्षम रहते हैं, तभी गर्दन काटकर छोड़ दिया जाता है. स्लाटर हाउस में ट्रांसपोर्ट ऑफ़ एनिमल्स रूल्स, 1978 का भी अक्सर उल्लंघन किया जा रहा है. पेटा इंडिया ने अपील भी की है कि आप अधिक दयालु जीवन शैली चुनकर ऐसी क्रूरता को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं:

(नोटः सभी तस्वीरें पेटा इंडिया की वेबसाइट से)

 

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