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#कश्मीर मुद्दे पर विदेशी कूटनीति में पस्त #पाकिस्तान ने #भारत के खिलाफ छेड़ा नया शिगूफा

#कश्मीर मुद्दे पर विदेशी कूटनीति में पस्त #पाकिस्तान ने #भारत के खिलाफ छेड़ा नया शिगूफा
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
जम्मू-कश्मीर से धारा370 हटाने का विरोध कर रहे पाकिस्तान की हालत पतली हो गई है. भारत के खिलाफ दुनियाभर में घूम-घूमकर माहौल बनाने की हर कोशिश नाकाम होने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार नया शिगूफा छोड़ रहे हैं. इमरान का नया शिगूफा है वह भारत के स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के दिन दुनिया भर में कश्मीर के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेगा. इमरान खान विदेशी मोर्चे पर ही नहीं, स्वदेश में भी चौतरफा घिर गए हैं. पाकिस्तानी पार्टियां उन पर कश्मीर नीति को ठीक से हैंडल न कर पाने का आरोप लगा रही हैं.
यह ताकतवर भारत की कूटनीति का ही नतीजा है जिससे पाकिस्तान को अमेरिका और रूस से ही नहीं, चीन, यूएई और सउदी अरब जैसे देशों के सामने भी मुंह की खानी पड़ी है. दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर के मामले में खुलकर सामने आ गए हैं. एक ही दिन पहले रविवार को उन्होंने दुनिया के सामने मदद की गुहार लगाई. ट्विटर पर भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि क्या दुनिया के नेता इस बारे में कोई कदम उठाएंगे?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दुनियाभर में भारत के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है. कुरैशी ने ट्वीट कर विदेशों में बसे पाकिस्तानियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे 15 अगस्त को दुनियाभर में भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन करें और अपना विरोध दर्ज कराएं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ट्विटर पर लिखा, ‘मैं हर विदेशी पाकिस्तानी से आग्रह करूंगा कि वे 15 अगस्त को दुनियाभर में भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन करके ‘भारतीय कब्ज़े वाले कश्मीर’ में ‘गैर-कानूनी और जबरन कब्जे के खिलाफ’ अपना विरोध दर्ज कराएं.’
इमरान खान इस मामले में विदेश मंत्री शाह महमूह कुरैशी को चीन भी भेज चुके हैं. चीन ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के फैसले का प्रत्यक्ष रूप से जिक्र तो नहीं किया था लेकिन उसने कहा कि प्राथमिकता यह है कि प्रासंगिक पक्ष को चाहिए कि वह यथास्थिति को एकतरफा न बदले और तनाव न बढ़ाए.
रूस और अमेरिका से पाकिस्तान को कश्मीर मामले में ज्यादा मदद नहीं मिल पाई है. रूस ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर पर लिया गया फैसला संविधान के अनुसार ही लिया गया. रूस ने कहा, मॉस्को को उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर राज्य पर दिल्ली द्वारा लिए गए फैसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में वृद्धि नहीं होगी. उधर, भारत को दुनिया के कई देशों से जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले का समर्थन मिल चुका है. संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे द्विपक्षीय फैसला करार दिया है और कहा है कि दोनों देश आपस में इसे सुलझाएं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली असफलता से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के विरोध में कई फैसले लिए लेकिन वे सभी उसे उलटे पड़ रहे हैं. भारत से कारोबार बंद करना अब उसे काफी महंगा पड़ रहा है. इससे पाकिस्तान के बाजारों में रोजमर्रा की सामग्री के दामों में आग लगी हुई है. ऐसी रिपोर्ट भी है कि अब वहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
आर्थिक मोर्चे पर भारत से तनाव की वजह से पाकिस्तान के शेयर बाजार को भी नुकसान पहुंचा है. अब तक वहां बीते पांच सालों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. सिर्फ दो दिनों में ही कराची स्टॉक एक्सचेंज में करीब 1500 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है और निवेशकों के 7400 करोड़ पाकिस्तानी रुपये डूब चुके हैं.
इसके विपरीत जम्मू-कश्मीर में अब हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं. श्रीनगर में शनिवार और रविवार बकरीद की जमकर खरीदारी हुई. राज्य में लोग बकरीद परंपरागत हर्ष और उल्लास से मना सकें इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने कई इंतजाम किए.

 

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