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केवल राजस्थान में 50 हजार से ज्यादा हैं पाकिस्तान में जिल्लतभरी जिंदगी से ऊबकर आए हिन्दू

केवल राजस्थान में 50 हजार से ज्यादा हैं पाकिस्तान में जिल्लतभरी जिंदगी से ऊबकर आए हिन्दू
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
लोकसभा और राज्यसभा से नागरिकता संशोधन बिल मंजूर होने के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसक प्रदर्शन भले ही चल रहा हो लेकिन राजस्थान के विभिन्न जिलों में पाकिस्तान से आए 50 हजार से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जिन्हें इस बिल की मंजूरी ने दुनिया-जहांन की खुशियों से भर दिया है. अब ये हिन्दू शरणार्थी दो महीने के अंदर भारत की नागरिकता हासिल कर लेंगे. ये हिन्दू पाकिस्तान में बहन-बेटियों की इज्जत, धर्म और संस्कृति दांव पर देख धार्मिक बीजा हासिल कर भारत आते थे लेकिन पलट कर पाकिस्तान कभी नहीं गए. वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी ये परिवार इस उम्मीद में भारत में ही रह गए कि उन्हें कभी तो अपने मूल देश में न्याय मिलेगा.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान बताया था कि पाकिस्तान से प्रताडि़त होकर आए गैर मुस्लिम राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बसे हैं. छिटपुट परिवार देश के अन्य हिस्सों में भी फैले हैं लेकिन राजस्थान में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है. हालांकि, राज्यसभा में बहस के दौरान कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार करीब 4000 लोगों के लिए ऐसा माहौल बना रही है जैसे यह संख्या लाखों में है.
फिलहाल, पाकिस्तान की सीमा से सटे जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में पाक से आए करीब 46 हजार लोग बरसों से इस दिन का इन्तजार कर रहे थे कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिल सके. इन तीनों जिलों के अलावा बीकानेर, सिरोही, जयपुर, अजमेर, जालोर और पाली जिलों में भी छह हजार के करीब पाक से आए शरणार्थी बसे हुए हैं.
इन लोगों में बड़ी तादाद उन लोगों की है जो तीस दिन के धार्मिक वीजा पर भारत आते तो थे लेकिन पाकिस्तान की जिल्लत भरी जिंदगी से तंग आकर वीजा अवधि पूरी होने के बाद भी वापस नहीं जाते थे. इन विस्थापित परिवारों में से कई तो तो ऐसे भी हैं जो करीब दस सालों से भारत में रह रहे हैं. कई ऐसे परिवार है जो पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं लेकिन उन्हें भी नागरिकता नहीं मिल सकी.
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता देने वाली प्रक्रिया बेहद कठिन थी. इसके लिए 16 हजार की फीस के साथ 12 साल तक भारत में रहने के दस्तावेज देने पड़ते थे. कुछ साल पहले इस फीस को घटाकर 100 रुपये किया गया तो बड़ी संख्या में लोगों को इसका फायदा हुआ. इसी तरह अब भारत में रहने की अवधि को घटाकर छह साल कर दिया गया है. जिसकी वजह से अधिकांश पाक शरणार्थी अब भारतीय नागरिकता ले सकेंगे. राजस्थन में बसे सभी विस्थापितों के पास इस अवधि के दस्तावेज हैं.
पाक के सिंध इलाके से आए ज्यादातर विस्थापित राजपूत, माली, जांगिड़, लुहार, मोची और कुम्हार जाति के हैं. इनके अलावा भील और मेघवाल समाज के लोग भी बड़ी संख्या में पाक छोड़कर भारत आकर रहने लगे थे. इन हिंदू विस्थापितों के अलावा पांच सौ से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं भी राज्य में है, जो यहां शादी करके बस गईं थीं.

 


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