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NPS कटौती के लिए शिक्षकों को भयभीत करने का विरोध, महानिदेशक से मिले शिक्षक प्रतिनिधि

NPS कटौती के लिए शिक्षकों को भयभीत करने का विरोध, महानिदेशक से मिले शिक्षक प्रतिनिधि

लखनऊ  : उत्तर प्रदेश में न्यू पेंशन स्कीम में कटौती कराने के लिए शिक्षकों पर दबाव बनाने का विरोध शुरू हो गया है। पिछले 1 सप्ताह से वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा के पत्र के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रान आवंटन के लिए कैंप लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही जो शिक्षक प्रान (PRAN) रजिस्ट्रेशन न कराएं, उनका वेतन रोकने का भी निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सोमवार को स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद से मुलाकात कर अनुचित दबाव बनाने का विरोध किया है।

एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती कराना कराना है। यह सुविधा वैकल्पिक होने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी और शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने प्राण में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। इसके कारण कर्मचारियों के वेतन से कटौती नहीं हो पा रही है। राज्यांश भी इसी कारण जमा नहीं हो रहा है। प्रदेश के कई जिलों में एनपीएस में कटौती की स्थिति बेहद दयनीय है। इसी कारण उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों और शिक्षकों के प्राण रजिस्ट्रेशन पर जोर दे रही है।

इसी अभियान में स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने समीक्षा में उन बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी दी थी जहां प्राण रजिस्ट्रेशन की संख्या बेहद कम है। प्रयागराज भी उनमें से एक है। वित्त नियंत्रक का पत्र भी उसी कड़ी में जारी हुआ।

शिक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने लखनऊ में प्रदर्शन कर पुरानी पेंशन की मांग उठाई तो सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम में कटौती को शत-प्रतिशत कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके लिए शिक्षकों पर दबाव बनाकर प्रान रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश की जा रही है।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि एनपीएस अनिवार्य नहीं है। यह वैकल्पिक है। पुरानी पेंशन की राज्यों में लागू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में भी पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की जा रही है। वेतन रोकने का दबाव बनाकर जबरन प्रान आवंटन न किया जाए।

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