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अब राजनीति से ज्यादा दुनिया की सबसे खतरनाक रायफल एके-203 के लिए जानी जाएगी अमेठी, निर्यात भी होगा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अमेठी की पहचान अब तक वीआईपी राजनीतिक क्षेत्र के रूप में रही है. कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र के रूप में चर्चित रही अमेठी वर्तमान में उनके पुत्र और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है. यूपीए सरकार के दौरान ही वर्, 2007 में अमेठी में आर्डिनेंस फैक्टरी के लिए पत्थर लगाए गए थे लेकिन न जमीन मिली न तय हुआ कि अमेठी की फैक्टरी में क्या बनेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाषण के दौरान इन्हीं बातों को लेकर कांग्रेस पर तंज कसे. साथ ही प्रधानमंत्री ने अमेठी में रूस के सहयोग से बनने वाली एके-203 रायफलों के बाजार का भी इशारा कर दिया. पीएम मोदी ने कहा कि निकट भविष्य में अमेठी से एके की 200 सीरीज की रायफलों का दूसरे देशों को निर्यात भी हो सकता है. रूस ने भी स्पष्ट तौर पर इसके संकेत दे दिए हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेठी में जिस आर्डिनेंस फैक्टरी का उद्घाटन किया है वहां रूस के तकनीकी सहयोग से क्लाश्निकोव रायफलों का उत्पादन किया जाएगा. अगले तीन वर्षों में सात लाख से ज्यादा रायफलें अमेठी में बनाई जाएंगी. भारत और रूस के ज्वाइंट प्रोजेक्ट के तहत इनका निर्माण अमेठी की इंडो-रशियन राइफल फैक्ट्री में शुरू हो गया है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले तीन साल में 7.5 लाख नई असॉल्ट राइफलें जवानों को मिल जाएंगी. डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत बनाई जा रहीं राइफल मौजूदा एके-47 का अपग्रेड वर्जन है. एके-203 रायफलों को अगली पीढ़ी की रायफल माना जा रहा है. रूस की सेना भी इनका इस्तेमाल कर रही है.
अमेठी में रविवार को इंडो-रशियन राइफल प्राइवेट लिमिटेड के उद्घाटन के मौके पर रक्षा मंत्री सीतारमण ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन का संदेश पढ़ा. इसमें पुतिन ने कहा, ”भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में अहम सहयोग रहा है. रूस सात दशकों से भारत को युद्ध सामग्री प्रदान करता रहा है. यह ज्वाइंट प्रोजेक्ट युवाओं को रोजगार देने में मददगार साबित होगा. साथ ही नई राइफलें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भी मजबूती देंगी.”
अभी सेना के पास इंसास राइफलें
सेना, नौसेना और वायुसेना के पास अभी भारत में तैयार की गईं इंसास राइफलें हैं. इसकी जगह अब उन्हें एके-203 से लैस किया जाएगा. पहले चरण में एके सीरीज की नई राइफलें तीनों सेनाओं को दी जाएंगी. अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस का नंबर इसके बाद आएगा. बताया जा रहा है कि अगले एक दशक में सभी श्रेणी के सुरक्षा बल इंडो-रशियन राइफलों से लैस हो जाएंगे. पिछले 10 साल से नई राइफलों की खरीद की योजना बनी थी, लेकिन कोई न कोई पेंच फंसता रहा.
अमेरिकी कंपनी से भी खरीदी जा रही राइफलें
रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी से भी 72 हजार राइफलों की खरीद का करार किया है. 7.69 एमएम बोर वाली 59 कैलिबर की सिगसॉर राइफलें उन जवानों को दी जाएंगी जो उग्रवाद और आतंकवाद से सीधे तौर पर जूझते हैं. सरकार का मानना है कि एलओसी पर पाक सेना से जूझने वाले और आतंकवादियों से लोहा लेने वाले सेना के जवानों के पास कारगर हथियार होने जरूरी हैं. हथियार भी ऐसे हों जो जवानों की हर जरूरत को पूरा करने में सक्षम हों.
रूस के अफसरों ने ये कहा
सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूसी संघीय सेवा (FSMTC) के निदेशक दिमित्री शुगाव ने कहा, “आज, AK-203 असाल्ट राइफलों के निर्माण के लिए भारतीय कस्बे कोरबा में एक हथियार कारखाने का निर्माण शुरू हुआ, जो समझौतों के अनुसार उच्चतम स्तर पर पहुंचा है.” शुगाव के अनुसार, समझौते के तहत 700,000 से अधिक राइफल का निर्माण किया जाएगा.” यदि दोनों पक्ष तैयार होंगे तो संयंत्र की उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी भी की जा सकेगी. 
2015 में शुरू हुई थी वार्ता
रूस के हथियार निर्यातक रोसोबोरोनपोर्ट्स के महानिदेशक अलेक्जेंडर मिखेव ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त उद्यम के लिए रूस और राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्त किया है. कहा कि AK-203 असाल्ट राइफल न केवल भारतीय पैदल सेना को बड़ा समर्थन प्रदान करेगी, बल्कि अन्य देशों को निर्यात से  राजस्व की आय भी होगी. पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आभार व्यक्त करता हूं, उनके समर्थन से इतने कम समय में यह उद्यम संभव हो पाया.” भारत में कलाश्निकोव राइफल्स के उत्पादन पर रूसी-भारतीय वार्ता 2015 में शुरू हुई थी.

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