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वामपंथियों को सूल की तरह चुभी राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का इतिहासकार इरफान हबीब को सुनाई खरी-खरी

वामपंथियों को सूल की तरह चुभी राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का इतिहासकार इरफान हबीब को सुनाई खरी-खरी

केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान और इतिहासकार इरफान हबीब के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब राजनीतिक रंग लेती जा रही है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान और इतिहासकार इरफान हबीब के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब राजनीतिक रंग लेती जा रही है. इतिहासकार इरफान हबीब को दिए गए जवाब से वामपंथी भी सन्न हैं. राज्यपाल का जवाब उन्हें सूल की तरह चुभ रहा है. साथ ही यह मुद्दा अब केरल की राजनीति में छाने की भी संभावना है.
इस मामले को लेकर माकपा के केरल राज्य सचिव कोडियारी बालाकृष्णन ने राज्यपाल पर पलटवार करते हुए कहा है कि यदि वह पूर्णकालिक राजनीतिक कार्य करते रहना चाहते हैं तो उन्हें राज्यपाल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.बालाकृष्णन ने कहा कि सभी नागरिकों को राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करने का अधिकार है. यदि राज्यपाल (आरिफ मोहम्मद खान) वर्तमान स्थिति की सीमाओं को नहीं पहचानते हैं, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. 
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने एएनआई से बातचीत में शनिवार को हुई घटना के बारे में विस्तार से बताया. कहा कि मलियाली लेखक को उन्होंने आमंत्रित किया था. इतिहासकार इरफान हबीब भी कार्यक्रम में आए थे. वह सोफे के पीछे से उठकर कुलपति के बगल से होते हुए आगे आए और बगल खड़े होकर विरोध शुरू कर दिया. इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर नारे लगाए जाने लगे और हंगामा शुरू कर दिया गया.

ये था मामला
कुन्नूर में 80वें भारतीय इतिहास कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में वामपंथी सोच के इतिहासकार इरफान हबीब ने शनिवार को केरल के कुन्नूर में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के भाषण के दौरान हंगामा किया. इसके बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी उन्हें तबियत से जवाब दिया. बताया जा रहा है कि इरफान हबीब ने राज्यपाल को भाषण के दौरान रोककर उन्हें महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को कोट करने के लिए कहा. राज्यपाल उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कहे किसी शब्द को कोट कर अपनी बात कह रहे थे.
भाषण के बीच में टोकाटाकी से राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पहले हंगामा कर रहे लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन किसी तरह बात नहीं संभलने पर उन्होंने सख्त लहजा अपना लिया. इरफान हबीब को जवाब देते हुए कहा कि मौलाना आजाद ने आपके लिए ही कहा था? आपकी जायदाद हैं मौलाना आजाद? हमारी हैं. कृपया शांत बनाए रखिए, शांति से बैठिए. नहीं सुनेंगे तो आप एक मिनट में बाहर हो जाएंगे. नहीं सुनेंगे आप थ्रेटिंग करेंगे हमें, इन्हें जरा देख लीजिए ये थ्रेटिंग कर रहे हैं. गंभीर मुद्दों पर बात करने का उन्हें अधिकार है. हमें भी अधिकार है. राज्यपाल ने कहा कि पता नहीं यदि जवाहर लाल नेहरू को कोट करना बद्दतमीजी है तो बेशक ये बद्दतमीजी है. वो तमीज है जो आप कह रहे हैं कि मैं गोडसे को कोट करूं. मुशीरुल साहब पर जामिया में किसने हमला किया था, वो कौन लोग हैं जिन्होंने उन पर हमला किया था.

 


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