पूर्वोत्तर रेलवेः वाराणसी-इलाहाबाद समेत इन रेलमार्गों के मार्च 2019 तक पूरे होंगे सब काम

        

गोरखपुर:  वर्ष 2018-19 पूर्वोत्तर रेलवे के लिए कामयाबी का नया इतिहास गढ़ सकतै है. नई लाइन, आमान परिवर्तन, दोहरीकरण व विद्युतीकरण आदि में मार्च 2019 तक कई कार्य पूरे होने वाले हैं.
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव के अनुसार वर्ष 2018-19 में रू0 412.05 करोड़ की लागत से 36 किमी. लम्बी महराजगंज-मसरख नई लाइन चालू की गई. इससे महराजगंज से मसरख की रेलवे दूरी 70 किमी0 कम हो गई. नवंबर में 318.42 करोड़ रुपये की लागत से 60 किमी. लम्बे गोण्डा-बहराइच आमान परिवर्तित रेल खण्ड को भी तीन जोड़ी यात्री गाड़ियों के संचालन के साथ चालू कर दिया गया है. वाराणसी सिटी-वाराणसी जंक्शन रेल खण्ड का दोहरीकरण भी पूर्ण किया गया. ऐशबाग-सीतापुर जं0 रेल खण्ड के आमान परिवर्तन का कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है. इसका शुभारम्भ निकट भविष्य में किया जाना प्रस्तावित है.
सारनाथ-वाराणसी सिटी (7.69 रूट किमी.), कप्तानगंज-बाल्मिकीनगर (52.8 रूट किमी.) का विद्युतीकरण इस वर्ष पूर्ण किया गया. वाराणसी-गाजीपुर सिटी-बलिया रेल खण्ड का विद्युतीकरण भी इस वर्ष पूर्ण किया गया.
पीलीभीत-शाहजहांपुर (83 किमी.) आमान परिवर्तन परियोजना के पीलीभीत-बीसलपुर (37 किमी.) खण्ड का आमान परिवर्तन भी इसी वित्तीय वर्ष में लक्षित है. मन्धना-ब्रहमवर्त (8 किमी.) रेल खण्ड का आमान परिवर्तन भी इसी वित्तीय वर्ष में पूर्ण किया जाना लक्षित है. औड़िहार-मंडुवाडीह दोहरीकरण परियोजना के अन्तर्गत वाराणसी जं0-मंडुवाडीह (2.8 किमी.), गाजीपुर सिटी-औड़िहार परियोजना के अन्तर्गत औड़िहार-तराँव (13 किमी.), छपरा-बलिया दोहरीकरण के अन्तर्गत रेवती-बलिया (25.15 किमी.) भी इसी वर्ष पूर्ण किये जाने हेतु लक्षित हैं.
छपरा-बलिया दोहरीकरण दोहरीकरण परियोजना के अन्तर्गत रेवती-बकुलहा, वाराणसी-माधोसिंह-इलाहाबाद (120.20 किमी.), डोमिनगढ़-गोरखपुर-गोरखपुर कैण्ट-कुसुम्ही तीसरी लाइन एवं गोरखपुर-नकहा जंगल दूसरी लाइन तथा औड़िहार-जौनपुर (59.55 किमी.) का दोहरीकरण भी वर्ष 2019-20 में पूर्ण किया जाना लक्षित है. इसी प्रकार बीसलपुर-षाहजहाँपुर (47.09 किमी.) आमान परिवर्तन भी वर्ष 2019-20 में लक्षित है.
गाजीपुर सिटी-औड़िहार दोहरीकरण परियोजना के अन्तर्गत तराँव-अंकुशपुर-गाजीपुर सिटी (27 किमी.), बलिया-गाजीपुर सिटी दोहरीकरण परियोजना (65.1 किमी.), मल्हौर-डालीगंज दूसरी लाइन, डोमिनगढ़-गोरखपुर-गोरखपुर कैण्ट-कुसुम्ही तीसरी लाइन, गोरखपुर-नकहा जंगल, भटनी-औड़िहार, इन्दारा-मऊ समेत फेफना-इन्दारा, मऊ-शाहगंज (इन्दारा-मऊ छोड़कर), गाजीपुर सिटी-औड़िहार इत्यादि रेल खण्ड पूर्ण किये जाने हेतु लक्षित है.
नई लाइन परियाजना में हथुआ-भटनी के अन्तर्गत पंचदेवरी-भटनी (47 किमी.) का भी कार्य पूर्ण किया जाना वर्ष 2019-20 में लक्षित है.
छपरा-बलिया (65 रूट किमी.), वाराणसी-प्रयागराज (134 रूट किमी.), मनकापुर-कटरा-अयोध्या (37.65 रूट किमी.), औड़िहार-जौनपुर (59.55 रूट किमी.), कप्तानगंज-थावे (80 रूट किमी.),  मथुरा-कासगंज-फर्रूखाबाद-कल्याणपुर (338 रूट किमी.) रेल खण्डों का विद्युतीकरण भी इसी वित्तीय वर्ष में पूर्ण किया जाना लक्षित है.
विद्युतीकरण परियोजनाओं के अन्तर्गत कासगंज-बरेली व भोजीपुरा-डालीगंज (401 किमी.) के तहत घटपुरी-भोजीपुरा-सीतापुर-मैलानी-डालीगंज (327 किमी.), वाराणसी-माधोसिंह- इलाहबाद (120 किमी.) दूसरी लाइन, मल्हौर-डालीगंज (दोहरीकरण के साथ), डोमिनगढ़-गोरखपुर-गोरखपुर कैण्ट-कुसुम्ही तीसरी लाइन तथा गोरखपुर-नकहा जंगल दूसरी लाइन (21.15 किमी.) का कार्य पूर्ण किये जाने हेतु वर्ष 2019-20 में लक्षित है.
मऊ में कोचिंग टर्मिनल का निर्माण, औड़िहार में डेमू शेड का निर्माण व गोरखपुर में ए.सी. लोको शेड का निर्माण भी इसी वित्त वर्ष में लक्षित है.
उपरोक्त से स्पष्ट है कि पूर्वोत्तर रेलवे आने वाले 3-4 वर्षों में पूरी तरह से बदल जायेगा और यह भारतीय रेल के देष के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रमुख प्रवेष द्वार के रूप में अपनी सेवायें उपलब्ध करायेगा.

 

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