Nationalwheels

#NHRC ने बताई पीड़ा, कहा-देश को चाहिए 20250 क्लीनिकल मनोरोग चिकित्सक, देश में हैं केवल 898

#NHRC ने बताई पीड़ा, कहा-देश को चाहिए 20250 क्लीनिकल मनोरोग चिकित्सक, देश में हैं केवल 898
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष एचएल दत्तू ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र की विसंगतियों को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र की निगरानी नीति के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल नियम 2017 के लागू होने के बाद की जमीनी वास्तविकताओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा कि देश में 13500 मनोरोग चिकित्सकों की आवश्कता है लेकिन 3827 ही उपलब्ध हैं। 20250 क्लीनिकल मनोरोग चिकित्सकों की आवश्कता है जबकि केवल 898 उपलब्ध हैं। इसी तरह पैरामैडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है।
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने बंदियों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे बंदियों के अधिकारों की रक्षा करना मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के खंड 103 के अंतर्गत राज्य का दायित्व है और उच्चतम न्यायालय ने भी हाल के अपने एक निर्णय में इस पर बल दिया है।
एनएचआरसी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कानून और उसको लागू करने के बीच की खाई पर भी चर्चा की गई। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचएल दत्तू ने बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र को सुधारने के प्रयास किए गए हैं लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में आवश्यक सुविधा और उपलब्धता के बीच खाई बनी हुई है।
स्वास्थ्य परिवार और कल्याण सचिव प्रीति सूदन ने कहा कि देश में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को सुधारने के काम में केंद्र सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके लिए राज्यों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धन की कोई कमी नहीं है लेकिन राज्यों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 को लागू करने के प्रस्ताव के साथ आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्यों को खर्च के बारे में समय से रिपोर्ट देनी होगी।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेष सचिव संजीव कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में सुधार की दिशा में सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए सभी हितधारकों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 19 राज्यों ने अब तक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम को लागू किया है। उन्होंने बताया कि देश की 10.6 प्रतिशत युवा आबादी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है। यह बहुत बड़ी संख्या है और इसके लिए सुरक्षा कवच, कानूनी रूपरेखा तथा चिकित्सा सुविधाओं वाली समग्र सोच की जरूरत है। उन्होंने इस विषय पर विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने और सहयोग भावना से स्थिति सुधारने के लिए मानवाधिकार आयोग की प्रशंसा की।
इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के महासचिव जयदीप गोविंद ने मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में आयोग के कार्यों की जानकारी दी और कहा कि यह सभी के लिए अच्छे स्वास्थ्य पर बल देने वाले विकास लक्ष्य-3 का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अच्छे व्यवहारों को अपनाया है और दूसरे राज्यों को इन व्यवहारों को अपनाना चाहिए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति पीसी पंत ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन में दिए गए सुझाव कानून और उसको लागू करने की बीच की खाई को पाटने में सहायक होंगे।
Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *