Nationalwheels

पूर्वांचल विवि की नव नियुक्त कुलपति निर्मला एस. मौर्य के पिता और भाई भी रहे हैं कुलपति

पूर्वांचल विवि की नव नियुक्त कुलपति निर्मला एस. मौर्य के पिता और भाई भी रहे हैं कुलपति
वाराणसी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की नवनियुक्त कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य के पिता और भाई भी कुलपति रह चुके हैं। आप शिक्षा जगत की नामचीन हस्ती प्रो. एसएस कुशवाहा की पुत्री हैं।
वह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं।
भौतिक विज्ञान के मर्मज्ञ प्रो. कुशवाहा के बड़े पुत्र प्रो. साकेत कुशवाहा वर्तमान में राजीव गांधी यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश के कुलपति हैं। प्रो. एसएस कुशवाहा के छोटे पुत्र अनुराग कुशवाहा उत्तर प्रदेश के जाने-माने आर्किटेक्ट हैं। अनुराग कुशवाहा यूपी के उन गिने-चुने आर्किटेक्टों में से एक हैं , जो डी-आर्च हैं।
उन्नाव में जन्म , बीएचयू में शिक्षा दीक्षा
प्रो. निर्मला एस. मौर्य तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी की अध्यक्ष हैं । विगत 30 साल से दक्षिण भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और उत्थान के लिए तमिलनाडु को केंद्र बनाकर वह काम कर रही हैं। भाषा और साहित्य के क्षेत्र में कार्य करना ही उनकी विशिष्ट पहचान है। उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के ग्राम पचोडा में पांच अगस्त 1958 को पूर्व कुलपति प्रो. एसएस कुशवाहा के पुत्री की रूप में वह पैदा हुईं और शिक्षा-दीक्षा वाराणसी से पूरी की। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बीएससी करने के पश्चात हिन्दी साहित्य में रुचि रखने के कारण एमए हिन्दी तथा पीएचडी भी बीएचयू से की। इसी बीच व्यक्तिगत रुचि के कारण मद्रास चली गर्इं। उन्होंने पीएचडी शोध विषय ‘सूर तथा तुलसी के विनय पदों का तुलनात्मक अनुशीलन’ तथा भागलपुर विश्वविद्यालय से ‘हिन्दी भक्ति साहित्य में सौंदर्यबोध’ विषय पर डी. लिट् कर 2001 में उपाधि अर्जित की।
दक्षिण के लोग सीखना चाहते हैं हिंदी
वर्ष 1986 में उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा मद्रास में प्रवक्ता के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। उन्होंने प्रचार सभा को लगातार 30 वर्षों तक विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं दी। उनकी मेहनत, ईमानदारी, लगन को देखते हुए समयानुसार उनको उपाचार्या और संस्थाध्यक्ष, कुलसचिव जैसे पदों को संभालने का मौका मिला। संस्थान की अध्यक्ष और कुलसचिव जैसे पदों पर रहते हुए संस्थान को एक नाम मिला और विद्यार्थियों की भीड़ उमड़ी। उन्हें मद्रास में रहते हुए सम्पूर्ण दक्षिण भारत का भ्रमण करने का अवसर मिला तथा दक्षिण के सभी विद्यालयों से जुड़ने का भी। उन्होंने सदैव एक बात महसूस की कि दक्षिण के लोग विशेषकर बच्चे, युवा और महिलाएं हिन्दी सीखना-समझना चाहते हैं। इसे उन्होंने चुनौती के रूप में स्वीकारा। दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, मद्रास की तरफ से चलाये जाने वाले हिन्दी प्रचार अभियान से जुड़ीं। एक तरफ उच्च शिक्षा का स्तर तो दूसरी ओर बेसिक हिन्दी का प्रचार सबसे बड़ी चुनौती थी। बड़ी प्रसन्नता से इस चुनौती को शौक बनाकर एक तरफ उच्च शिक्षा के स्तर पर एमए, एम. फिल., पीएचडी, डी. लिट्, स्नातकोत्तर, पत्रकारिता डिप्लोमा, स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा जैसे पाठ्यक्रम चलाया, तो दूसरी ओर अपने आसपास के लोगों को मुफ्त में हिन्दी सिखार्इं। इस दौरान कठिनाइयां तो बहुत आई, परंतु कहते हैं ना जीवन चुनौतियों से भरा है, इसे खुशी से स्वीकारें, उन्होंने यही किया।
स्क्रिप्ट राइटिंग भी की है
30 साल के अध्यापन काल में 90 विद्यार्थी एम. फिल, 89 पीएचडी, पांच डी. लिट् की उपाधि पा चुके हैं। करीब 20 शोधकार्य तुलनात्मक हैं। उनकी आठ पुस्तकें, 160 रिसर्च पेपर व लेख प्रकाशित हो चुके हैं। इनका प्रयोग शोधार्थी अपने शोध में उद्धरण के लिए करते हैं।  जीटीवी की तरफ से प्रसारित ‘छोटी मां’ सीरियल के 50 एपिसोड की स्क्रिप्ट राइटिंग भी की।  न्यूयार्क शहर में आयोजित आठवें वर्ल्ड हिन्दी कांफ्रेंस में विदेश मंत्रालय के आमंत्रण पर प्रपत्र प्रस्तुत किया। यूएसए डेनमार्क, स्वीडन एवं न्यूजीलैंड की भी यात्रा की।

 


Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *