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नया शोधः 85 फीसद दिल के मरीजों के लिए बाइपास या एंजियोप्लास्टी ज़रूरी नहीं

नया शोधः 85 फीसद दिल के मरीजों के लिए बाइपास या एंजियोप्लास्टी ज़रूरी नहीं

नई दिल्लीः हाल के एक अमेरिकी शोध ने दावा किया है कि 85 फीसद दिल के सामान्य मरीजों के लिएएंजियोप्लास्टी या बाइपास सर्जरी की ज़रूरत नहीं है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
  • योग,आहार केंद्रित उचित जीवनशैली अपनाने के साथ मेडिकल थिरैपी दिल की बीमारियांे कासबसे अच्छा इलाज
नई दिल्लीः हाल के एक अमेरिकी शोध ने दावा किया है कि 85 फीसद दिल के सामान्य मरीजों के लिएएंजियोप्लास्टी या बाइपास सर्जरी की ज़रूरत नहीं है और मेडिकल थिरैपी के साथ उचितजीवनशैली अपना कर लोग सर्जरी से बच सकते हैं। इस्केमिया (इंटरनेशनल स्टडी ऑफ कम्परैटिव हेल्थ इफेक्टिवनेस विद मेडिकल एण्ड इनवेसिव एप्रोचेज़) नामक यह अध्ययन भारत समेत पूरी दुनिया के 320 से अधिक स्थानों के 5170 मरीजों पर किया गया।
सबसे अधिक वैज्ञानिक पद्धति से किए गए इस परीक्षण (रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्राॅयल) के निष्कर्ष 15 नवंबर 2019 को फिलाडेल्फिया में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) की सालाना बैठक में पेश किए गए। परिणामों से यह सामने आया कि दिल की सामान्य से गंभीर बीमारियों में भी (इमरजेंसी छोड़ कर) बाइपास सर्जरी से बचा सकता है। इसके लिए मेडिकल थिरैपी के साथ उचित जीवनशैली अपनानी होगी।
‘‘योग और आहार केंद्रित उचित जीवन शैली अपनाने के साथ उचित मेडिकल थिरैपी से दिल की बीमारियों का बेहतर निदानमिल सकता है। ये उपाय न केवल दिल को सेहतमंद रखेंगे बल्कि मरीजों को बाइपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी से भी बचा सकते हैं। एसएएओएल (साइंस एण्ड आर्ट ऑफ लीविंग) पिछले 25 वर्षों से दिल के मरीजों का इस तरह इलाज कर रहा है और आज सबसे आधुनिक शोध ने इस संगठन के सिद्धांत के सही होने का प्रमाण दिया है।
दिल का दौरा से बचने के लिए मरीज को लाइफस्टाइल का संपूर्ण प्रशिक्षण लेने होगा।  साथ ही, अंग्रेजी दवाइयां लेनी होगी। एम्स नई दिल्ली के पूर्व चिकित्सा सलाहकार और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर ’डाॅ. बिमल छज्जर के मुताबिक पूरे भारत और विदेशों में साओल की 89 शाखाएं हैं। अध्ययन के आरंभ में सभी मरीज टीएमटी ‘पाॅजिटिव’ थे और उनमें 85 फीसद ने सीटी एंजियोग्राफी कराई और 15 फीसद प्रचलित कैथेटर  एंजियोग्राफी कराई ताकि ब्लाॅकेज़ का सही अनुमान लगाया जा सके। लगभग 50 फीसद मरीजों को एंजाइना की गंभीर समस्या, 33 फीसद को सामान्य एंजाइना और 12 फीसद को इसकी थोड़ी समस्या थी।
इनमें आधे मरीजों की बाइपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी की गई। आधे की ऑप्टिमल मेडिकल थिरैपी (ओएमटी) की गई। साथ ही, लाइफस्टाइल बदलने की सलाह दी गई। 4 वर्ष के अंत में दोनों ग्रुप के लिए मृत्यु दर 6.5 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत थी। दिल के दौरे के साथ अस्पताल में भर्ती होने के मामले भी लगभग बराबर – 13.9 और 11.7 फीसद थे।
इस तरह शोध का यह निष्कर्ष निकला कि यदि मरीज को दिल का दौरा नहीं पड़ा हो या आराम की अवस्था में एंजाइना नहीं होता है तो स्टेंट और बाइपास सर्जरी से दिल के मरीजोें को खास फायदा नहीं होता है। इसलिए उचित दवा के साथ उचित जीवन शैली अपना कर दिल के मरीज अधिक सेहतमंद रहेंगे।
निष्कर्ष सामने आया है कि टीएमटी पाॅजिटिव मामलों में स्टेंट लगाना याबाइपास सर्जरी ज़रूरी नहीं है। ‘‘इस अध्ययन के निष्कर्ष ने भारत में अनावश्यक एंजियोप्लास्टी और बाइपास सर्जरी पर सवालिया निशान लगा दिया है। महज पैसे के लिए सर्जरी करने को आतुर सर्जन और इंटरवेंशनल काॅर्डियोलाॅजिस्ट के बल पर फलते-फूलते दिल के 10,000 अस्पताल शक के घेरे में आ गए हैं।
गौरतलब है कि भारत में हर वर्ष 5 लाख से अधिक स्टेंट लगाए जाते हैं और लगभग 60,000 बाइपास सर्जरी की जाती है। इनमें 85 फीसद दिल के ऐसे मरीज होते हैं जिनकी स्थिति सही होती है। इन मामलों में स्टेंट और बाइपास से बचा जा सकता है।’
डाॅ. बिमल छज्जर ने कहा कि इस अध्ययन ने यह प्रमाणित कर दिया है कि दिल की बीमारी के इलाज के लिए ‘साओल’ की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक, विश्वसनीय और सस्ता है। इसमें आहार, योग, तनाव कम करने का उपाय, व्यायाम और उचित चिकित्सा उपचार पर जोर दिया जाता है।

 


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