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नेपाल का आरोप- भारत ने 400 वर्ग किमी भूभाग पर किया कब्जा

नेपाल का आरोप- भारत ने 400 वर्ग किमी भूभाग पर किया कब्जा

मानसरोवर मार्ग के सरलीकरण पर फिर किया 19 किमी भूक्षेत्र पर कब्जा

यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू। राजधानी काठमांडू में रविवार को हुई मंत्रीमंडल की बैठक में ओली सरकार ने भारत पर 400 वर्ग किमी नेपाली भुभाग पर कब्जे का आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
नेपाल ने मानसरोवर मार्ग को सुगम बनाने के लिए उसके 19 किमी भूक्षेत्र पर अतिक्रमण का भी आरोप लगाया। इतना ही नहीं लिपुलेख और कालापानी पर भारतीय सेना की गतिविधियों के जारी रहने पर भी आपत्ति जताई है।
कालापानी व लिपुलेख को लेकर दोनों देशों के बीच उतपन्न विवाद अभी थमा नहीं था कि मानसरोवर मार्ग विवाद से दोनों देशों के बीच फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
गृहमंत्री रामबहादुर थापा ने भारत पर आरोप लगाया कि वह 1816 को हुई सुगौली संधि की लगातार उलंघन करता आ रहा है। कहा कि भारत 6 दशकों से नेपाली भूभाग पर कब्जा किए हुए है। इस पर हमारी आपत्ति को अनसुनी किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद नया नहीं है, लेकिन भारत इसके समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
गृहमंत्री ने मानसरोवर मार्ग के सरलीकरण के तहत नेपाली भूभाग को नया मुद्दा बताते हुए भारत से नेपाली भूभाग को कब्जे से मुकि करते हुए वहां किसी भी तरह की गतिविधियां शून्य करने की अपील की है। कहा कि हम भारत नेपाल सीमा विवाद का हल बातचीत के जरिए चाहते हैं।
नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञावली ने बैठक में साफ कहा कि सुगौली संधि के बाद भारत नेपाल के बीच दूसरी कोई संधि नहीं हुई। संसद में विपक्ष द्वारा लगातार इस विषय पर शंका जाहिर करने पर विदेश मंत्री को इसकी सफाई देनी पड़ी।
बैठक में विदेश मंत्री ने मानसरोवर मार्ग निर्माण में भारत द्वारा नेपाली भूभाग पर कब्जे की जानकारी दी। संसद के सभी सदस्यों नेपाली भूभाग पर भारत के कब्जे की एक स्वर से निंदा की।
विदेश मंत्री ज्ञावली ने बैठक में बताया कि दो नवंबर 2019 को भारत द्वारा जारी नक्शे में नेपाली क्षेत्र के लिंपियाधुरा, लिपुलेख तथा कालापानी को भारतीय क्षेत्र में होना बताया है। नेपाल ने भारत से वास्तविक नक्शा व अन्य दस्तावेज के जरिए सीमा विवाद के समाधान की पेशकश की थी, लेकिन इस संबंध में भी भारत ने कोई रुचि नहीं दिखाई।
इधर, नेपाल भी अपने सीमा के भूक्षेत्र पर सुरक्षा चौकियों का तेजी से विस्तार कर रहा है। नेपाल गृह मंत्रालय ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। नेपाल गृह मंत्रालय के सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि भारत सीमा पर नेपाल अपनी 121 सुरक्षा चौकियों का विस्तार देते हुए उसे 500 तक करने की तैयारी कर रहा है।
गृह मंत्रालय का कहना है कि चूंकि नेपाल सीमा के भारतीय क्षेत्र में भारत की 530 सुरक्षा चौकियां हैं। इसलिए नेपाल भी उसी अनुपात में सुरक्षा चौकियों को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। नेपाल की अपनी सीमा पर एक सुरक्षा चौकी प्रति15 किमी की औसत दूरी पर है।
नये प्रस्ताव के अनुसार एक पुलिस चौकी प्रति 3.5 किमी की दूरी पर होगी। गृह मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने सीमा प्रबंधन के मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी है।गृहमंत्री ने कहा कि एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्वतंत्र नेपाल के लिए सीमा प्रबंधन एक आवश्यक शर्त है।
भारत से सटे नेपाल सीमा के 121 सुरक्षा चौकियों पर अभी लगभग 5,000 जवान तैनात हैं लेकिन जब विस्तार के बाद 500 सुरक्षा चौकियां काम करने लगेगी तब करीब 8,000 जवान तैनात होंगे।

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