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#NCR : PCCM के ‘ऑपरेशन टूंडला’ का ‘गद्दार’ कौन ? टीम को लौटना पड़ा था खाली हाथ

#NCR : PCCM के ‘ऑपरेशन टूंडला’ का ‘गद्दार’ कौन ? टीम को लौटना पड़ा था खाली हाथ

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के टूंडला रेलवे स्टेशन से जुड़े अवैध वेंडरों की धरपकड़ का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच रहा है। इस मामले में टूंडला में पदस्थ आईआरटीएस अफसर डीटीएम संजय कुमार विवादों के गंभीर घेरे में है। आरोप है कि सीनियर डीसीएम और पीसीसीएम की जानकारी के बिना वाणिज्य विभाग के 3 सीआईटी और एक सीएमआई को सजा के तौर पर प्रयागराज मंडल के सुदूरवर्ती रेलवे स्टेशनों पर ट्रांसफर कर दिया गया है। उधर, एक अन्य सनसनीखेज जानकारी आई है कि अवैध वेंडिंग के मामले की जांच के लिए पीसीसीएम की ओर से भेजी गई टीम के एक ‘गद्दार’ सदस्य के कारण पूरी टीम को खाली हाथ टूंडला से लौटना पड़ा है। फिलहाल, प्रकरण को लेकर प्रयागराज डिवीजन के वाणिज्य विभाग और परिचालन विभाग के बीच तनातनी का माहौल दिख रहा है।

टूंडला रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों को पकड़ने का प्रकरण 10 दिन पुराना हो रहा है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में लगातार चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। सीआईट ऑफिस से रेलवे वेंडर के समूह द्वारा पकड़े गए अवैध वेंडरों को छुड़ा ले जाने, क्रास एफआइआर कराने बाद में जांच के लिए बुलाए गए सीआईटी और सीएमआई के खिलाफ डीटीएम ऑफिस के कर्मचारियों द्वारा गंभीर आपराधिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज करा देने की घटना से पूरा डिवीजन और जोनल मुख्यालय वाकिफ है। विवादों के झोल-मोल में अवैध वेंडिंग का मुद्दा सिरे से गायब हो चुका है। बताते हैं कि प्लेटफार्म से लेकर ट्रेनों तक अवैध वेंडर्स पहले से भी अधिक संख्या में काम कर,ने लगे हैं। एक-एक मेडिकल पर 10-10 अवैध वेंडर काम कर रहे हैं। टिकट चेकिंग स्टाॅफ में अब किसी की हिम्मत नहीं है कि वह “ऊपर” से संरक्षण प्राप्त अवैध वेंडर्स को हाथ लगा दें।

सूत्रों की मानें तो घटना के बाद एनसीआर के पीसीसीएम ने प्रयागराज डिवीजन के सीएमआई राहुल दुबे की अगुवाई में मंडलीय सीआईटी दिवाकर शुक्ला समेत डिवीजन से चार और मुख्यालय से चार सदस्यों की टीम टूंडला स्टेशन अवैध वेंडर्स की धरपकड़ के लिए भेजा था। चर्चा है कि जांच टीएम के एक वरिष्ठ ने प्रयागराज से निकलते ही टूंडला स्टाॅफ को मैसेज कर चाय, नाश्ता, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए गोपनीय दौरे को सार्वजनिक कर दिया। नतीजतन, घटना के कारण पहले से ही अलर्ट अवैध वेंडर टीम पहुंचने के पहले ही प्लेटफार्म और ट्रेनों से एक दिन के लिए गायब हो गए। परिणामत: टीम कुछ सामग्रियों को सीज “सेवा” कराते हुए लौट आई। चार दिन पहले पीसीसीएम ने चारों को तलब कर नाकामी का कारण भी पूछा ? फिलहाल, वाणिज्य विभाग के सबसे बड़े अफसर की पूरी योजना पर नाकाबिल टीम ने पानी फेर दिया।

उधर, अवैध वेंडरों की धरपकड़ में शामिल रहे चारों कर्मचारियों को बिना जांच सजा के तौर पर सोनभद्र, चुनार, मानिकपुर और छिवकी स्टेशनों पर स्थानांतरण का मुद्दा भी गरमा गया है। सूत्र बताते टूंडला के डिविजनल परिचालन प्रबंधक (डीटीएम) संजय कुमार ने कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए प्रयागराज डिवीजन के सीनियर डीसीएम विपिन सिंह और जोन के वाणिज्य मुखिया पीसीसीएम एसके सिंह से कोई चर्चा नहीं की। स्थानांतरण की जानकारी तक भी उन्हें नहीं दी गई। डीआरएम की सहमति से चारों को “कालापानी” जैसी सजा सुनाई दी गई। वजह, टूंडला से सोनभद्र के लिए मात्र इकलौती मुरी एक्सप्रेस है। मानिकपुर के लिए कोई ट्रेन नहीं है। छिवकी के लिए भी सीधी ट्रेन नहीं है। सिर्फ चुनार ऐसा स्टेशन है जहां टूंडला से सीधे पहुंचा जा सकता है।

डीटीएम, परिचालन विभाग के अफसर हैं। सीआईटी और सीएमआई वाणिज्य विभाग के कर्मचारी हैं। मूल विभाग की जानकारी और सहमति के बिना कर्मियों का स्थानांतरण रेलवे नियमों के भी खिलाफ बताया जा रहा है। खैर, इस पूरे प्रकरण से अवैध वेंडर्स, उनके संरक्षणदाता और यात्रियों को सड़ा-गला खाद्य पदार्थ बिक्री कराकर लाभ कमाने वालों की मौज जरूर आ गई है।

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