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NCR : NCRMU महामंत्री तक पहुंचा DyCIT स्थानांतरण केस, GM तक जाएगा

NCR : NCRMU महामंत्री तक पहुंचा DyCIT स्थानांतरण केस, GM तक जाएगा

उत्तर मध्य रेलवे के वाणिज्य विभाग में डिप्टी सीआईटी के स्थानांतरण और मनमानी तैनाती का मामला गरमा गया है। प्रकरण को लेकर प्रभावित कर्मचारियों के एक समूह ने एनसीआरएमयू के महामंत्री आरडी यादव से भी शिकायत दर्ज कराई है। महामंत्री ने कहा कि इस गंभीर अनियमितता के मामले को महाप्रबंधक के सामने भी उठाया जाएगा। उधर, स्थानांतरण मामले की फाइल को डील करने प्रयागराज डिवीजन के सीएमआई प्लानिंग ज्ञानेश्वर पटेल इस विवाद के उठते ही चार दिनों की छुट्टी लेकर चले गए हैं।

गौरतलब है कि वाणिज्य विभाग के टीटीई से पदोन्नति हुए डिप्टी सीआईटी बने कर्मचारियों के पदोन्नत स्थानांतरण, ट्रांसफर एलाउंस, ज्वानिंग लीव और प्राथमिता वाले स्थानांतण में जमकर मनमानी की गई।

“नेशनल व्हील्स” ने दो दिन पहले यह मुद्दा उठाया कि 20 मई 2022 को TTE से DyCIT पद पर पदोन्नति की निकली सूची में 150 कर्मचारी लाभान्वित हुए।

कानपुर सेंट्रल और प्रयागराज जंक्शन पर डिप्टी सीआईटी के पद रिक्त होने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मियों को छिवकी और टूंडला जैसे स्टेशनों पर भेजा गया। होम स्टेशन पर पद रिक्त होने पर ट्रांसफर के जरिए रेलवे राजस्व को नुकसान न पहुंचाने के नियम भी हैं। फिलहाल, स्थानांतरित कर्मियों ने बोर्ड से अनुमन्य दर के अनुसार ट्रांसफर एलाउंस और 10 दिनों के ज्वानिंग लीव का आनंद उठाया। फिर, डिवीजन के 13 डिप्टी सीआईटी ने प्राथमिकता पर स्थानांतरण का आवेदन लगाया। इसमें टूंडला से कानपुर सेन्ट्रल आने वालों को उनकी प्राथमिकता के आधार पर वापस बुला लिया गया। इसके विपरीत प्रयागराज जंक्शन की प्राथमिकता वाली फाइल कार्मिक विभाग को लौटा दी गई है।

आरोप लगा है कि यदि महीने भर में ही टूंडला से कर्मचारियों को कानपुर सेंट्रल वापस बुलाना था तो उन्हें रेलवे राजस्व को नुकसान करने के लिए क्यों स्थानांतरित किया गया था? यह सुविधा टुंडला वालों को मिली तो प्रयागराज वालों की फाइल क्यों लौटा दी गई? कहीं, टूंडला से कानपुर वापस बुलाए गए कर्मचारियों से अवैध धनउगाही तो नहीं की गई?

इसी मुद्दे को लेकर उत्तर मध्य रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव के पास प्रयागराज जंक्शन से कुछ पीड़ित कर्मचारी पहुंचे थे। महामंत्री आरडी यादव ने कहा कि रेलवे बोर्ड की व्यवस्था है कि “रिक्वेस्टी” यानि म्युचुअल ट्रांसफर वाले को पहले रिक्त स्थानों पर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद ही रिक्त स्थान बचने पर स्थानांतरित को मौका मिलेगा। लेकिन इस मामले में रेलवे बोर्ड के इस नियम की अनदेखी की गई है। जल्द ही इस मामले को लेकर वह महाप्रबंधक से मिलेंगे और इस गड़बड़ी को ठीक करने की मांग करेंगे।

विजिलेंस क्या करती है?

एक सवाल यह भी उठ रहा है लाभ वाले पदों पर बैठे कर्मचारियों की मनमानी और अनियमितता की फाइलें कर्मचारियों के बीच आम हो जाती हैं, पब्लिक डोमेन में भी उनकी चर्चा होती है, लेकिन विजिलेंस तक ऐसे मामले नहीं पहुंचते या विजिलेंस इंस्पेक्टर जानबूझकर ऐसे मामलों में जानकारी होने के बावजूद हाथ नहीं डालते। चर्चा तो यह भी है कि विजिलेंस के ज्यादातर इंस्पेक्टर डिवीजन कार्यालयों में संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मचारियों के ‘संपर्क’ में रहते हैं और ‘सुविधा शुल्क’ लेकर गड़बड़ी वाली फाइलों को नहीं देखते। कई केस में यह साबित भी हो चुका है। कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो विरोधी को निपटाने के लिए “विजिलेंस रेड का ठेका” लेते हैं। यह जांच का विषय है कि कहीं इस केस में भी विजिलेंस से ‘डील’ तो नहीं हो चुकी है? अन्यथा सीएमआई प्लानिंग के हाथों से गुजरी छह माह की फाइलों की पड़ताल हो तो की अफसर भी चपेट में आ जाएंगे।

 

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