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#NCR: प्रयागराज मंडल के कामर्शियल में ट्रांसफर एलाउंस का गोरखधंधा ?

#NCR: प्रयागराज मंडल के कामर्शियल में ट्रांसफर एलाउंस का गोरखधंधा ?

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन के कामर्शियल विभाग में ट्रांसफर एलाउंस में फर्जीवाड़े की बू आ रही है। कानपुर से टूंडला गए और प्रियार्टी के नाम पर रेलवे बोर्ड के नियमों की धज्जियां उड़ाकर फिर कानपुर वापस लाए गए डिप्टी सीआईटी के प्रकरणों में भ्रष्टाचार के आरोपों पूरी तरह धुले भी नहीं कि नया मामला सामने आ गया है। इस मामले में ईसीआरसी से परीक्षा देकर सीएमआई बने कर्मचारी को जानबूझकर ट्रांसफर कर भ्रष्टाचार को ढंकने की कोशिश की गई है।

यह प्रकरण विभागीय परीक्षा के जरिए सीएमआई बने छिवकी जंक्शन पर तैनात रहे ईसीआरसी (कॉमर्शियल/सीनियर कामर्शियल कम रिजर्वेशन क्लर्क) पंकज कुमार का है। सूत्रों के अनुसार विभागीय नोड्यूज प्राप्त करने के बाद पंकज कुमार ने चीफ कामर्शियल इंस्पेक्टर (सीएमआई) की परीक्षा दी। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण किया। इसमें सफलता भी हासिल की।

जब यह साफ हो गया कि 15-20 दिनों या अधिकतम महीनेभर में पंकज कुमार पदोन्नत होकर मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण करेंगे। पूरी स्थिति साफ हो जाने के बाद मंडल रेल प्रबंधक के वाणिज्य विभाग के दो सीएमआई ने मिलकर कमाने का रास्ता तलाश लिया। दोनों की मिलीभगत से कर्मचारी के पदोन्नत होने की पूरी जानकारी होने के बाद भी ईसीआरसी पंकज कुमार को छिवकी से उसी पद पर बरगढ़ के लिए प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण की मुहर “साहब” से लगवा ली गई।

असिस्टेंट पर्सनल ऑफिसर (एपीओ) नितिन सिंह की ओर से 23 जून 2022 को पंकज कुमार के छिवकी से बरगढ़ स्थानांतरण का आदेश भी जारी हो गया। छिवकी स्टेशन अधीक्षक ने 06 जुलाई 2022 को रिलीज कर दिया। जबरन स्थानांतरण के इस खेल का हिस्पंसा बने पंकज कुमार ने रिलीव होने के साथ 10 दिनों का ट्रांसफर लीव विभागीय नियमानुसार लिया। फिर 10 दिनों का अवकाश लिया। पांच दिन बरगढ़ स्टेशन पर ईसीआरसी पद का कार्य किया। फिर पदोन्नति आदेश के कारण बरगढ़ से मुख्यालय के लिए तीन अगस्त को रिलीज हो गए। इसके साथ फिर ट्रांसफर लीव मंजूर हो गई।

रेलवे को क्या हुआ नुकसान?

इस अनियमित ट्रांसफर के कारण छिवकी और बरगढ़ दोनों स्टेशनों पर कार्य प्रभावित हुआ। बरगढ़ स्टेशन पर पद रिक्तता की स्थिति जैसी की तैसी रह गई। दो महीने के अंदर एक ही कर्मचारी को दो बार ट्रांसफर लीव देना पड़ा। प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर होने के कारण दोनों बार कर्मचारी ट्रांसफर एलाउंस का हकदार हुआ।

रेलवे के जानकारों का दावा है कि ट्रांसफर एलाउंस का दावा तीन वर्ष तक कभी भी किया जा सकता है। इसलिए यह कहना कि अभी ‘टीए’ नहीं लिया गया है, अधूरे सच जैसा होगा। जैसा कानपुर से प्रोन्नत होकर प्रशासनिक आदेश पर टूंडला पहुंचे रेल कर्मियों के मामले में सीनियर डीसीएम ने दावा किया है।

भ्रष्टाचार का संदेह क्यों हुआ ?

यह सवाल जरूर उभर सकता है कि इस मामले में भ्रष्टाचार का संदेह क्यों उभरा ? दरअसल, छिवकी जंक्शन पर ही सीबीएस संजय सिंह यादव और ईसीआरसी विनोद कुमार मिश्र भी प्रयागराज जंक्शन के लिए स्थानांतरित हैं। छिवकी से प्रयागराज जंक्शन 15 किमी से कम दूरी के स्टेशन हैं। ऐसे में प्रशासनिक आदेश के बाद भी रेलवे के नियमानुसार दोनों को ट्रांसफर एलाउंस और ट्रांसफर लीव जैसी कोई सुविधा नहीं मिलना है। इसीलिए दोनों को सीएमआई छिवकी रिलीज नहीं कर रहे हैं। इसके बजाए उस कर्मचारी को दबाव बनाकर रिलीज करा दिया जिससे केवल रेलवे को नुकसान होना था। क्योंकि, उसके बरगढ़ स्थानांतरण से भी न रेलवे का भला हुआ और न ही स्थानीय जनता का। दोनों के लिए समस्याएं यथावत बनी हुई हैं। परंतु, इस मामले में टीए का भुगतान होना तय है।

 

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