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#NCR : प्रयागराज जं के LR रोस्टर में मनमानी को एसीएम ने भी पकड़ा, आखिर कार्रवाई कब ?

#NCR : प्रयागराज जं के LR रोस्टर में मनमानी को एसीएम ने भी पकड़ा, आखिर कार्रवाई कब ?

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज जंक्शन का मुख्य टिकट निरीक्षक (लाइन) कार्यालय न सिर्फ रेलवे को चूना लगा रहा है, बल्कि टिकट निरीक्षकों की ड्यूटी में भी व्यापक अनियमितताएं हैं। सहायक वाणिज्य प्रबंधक प्रयागराज- प्रथम की अगुवाई में पहुंची तीन सदस्यीय टीम की छानबीन में भी लीव रिजर्व कर्मियों की ड्यूटी में ठीक वही अनियमितताएं सासामनेपआई गई हैं, जिनका खुलासा “नेशनल व्हील्स” ने पांच सितम्बर को किया था। मौजूं यह है कि इससे भी छोटे-छोटे मामलों में बिना नोटिस दिए कर्मचारियों को एसएफ-5 जैसे गंभीर आरोपों में शामिल कर देने की परंपरा प्रयागराज डिवीजन में प्रचलन में है लेकिन इस मामले में महीनेभर से अधिक हो जाने के बावजूद वाणिज्य विभाग के अफसर कहीं अधिक नुकसान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उधर, जंक्शन पर चर्चा है कि सीआईटी (लाइन) दावा करते घूम रहे हैं कि सीनियर डीसीएम ने उन्हें जबरन यह पद सौंप दिया। वह इस पद पर कार्य करने के इच्छुक न थे, न हैं।

मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सहायक वाणिज्य प्रबंधक प्रयागराज- प्रथम की 4 अगस्त 2022 को सीआईटी लाइन कार्यालय के निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट को जानना इसलिए भी रोचक है कि सीआईटी (लाइन) राकेश चौधरी के जरिए रेलवे की व्यवस्थाओं को बेपटरी करने का कार्य दो-चार दिनों से नहीं अनवरत चल रहा है। रोस्टर ड्यूटी में भारी गड़बड़ी के मामले में हटाए और पदावनति किए गए पूर्व सीआईटी लाइन एसके पांडे के जाने का भी कोई असर प्रयागराज डिवीजन और जंक्शन की कार्यशैली पर नहीं पड़ा है। भले ही इसी प्रकरण को लेकर पूर्व पीसीसीएम एमएन ओझा को भारी जलालत झेलनी पड़ी। रेलमंत्री के सख्त रवैया अख्तियार करने पर उन्हें उत्तर मध्य रेलवे से हटना पड़ा। उम्मीद थी कि इससे व्यवस्थाओं में सुधार होगा लेकिन वर्तमान में प्रयागराज जंक्शन पर सीआईटी लाइन की स्थिति और भी बदतर हो गई है। पांच महीने में करीब 10 हजार से अधिक कोच अनमैन्ड कराए गए। रोस्टर ड्यूटी में भी भारी गड़बड़ियां की जा रही हैं।

खैर, एसीएम- प्रथम की रिपोर्ट डिवीजन के सूत्रों से “नेशनल व्हील्स” को मिली है। इसके अनुसार सीआईटी भीमलाल, केसी सोनकर और डिप्टी सीआईटी आलोक सिंह लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए।

लीव रिजर्व रोस्टर में व्यापक अनियमितताओं को एसीएम ने दर्ज किया है। इसमें साफ लिखा है कि मनीष कुमार झा से गाड़ी संख्या 12877/78 में ही ज्यादातर ड्यूटी कराई गई है। रवीन्द्र कुमार वर्मा केवल रात्रिकालीन गाड़ियों में ही ड्यूटी करते मिले। रेखा श्रीवास्तव, रजनीश पांडे, देवेंद्र पांडे, जफर आलम, जेएन सिंह, अभिषेक कुमार, अनंत कुमार की 17 जुलाई से सभी ड्यूटी केवल दिल्ली की ट्रेनों में लगी है। शिवशंकर की ड्यूटी चार बार केवल बांदा के लिए लगाई गई।

यही नहीं, रमेश चौबे, दीपेश जायसवाल, अमित कुमार सिंह- द्वितीय, विनय पटेल,  सिद्धेश्वर मंडी, विपिन कुमार, मुकेश कुमार, बब्लू कुमार, पुष्पगुच्छ सिंह, दीपक, अनंत वर्मा,  विजय बहादुर यादव, अंगूर सिंह और अनिल कुमार दुबे के अलग-अलग तिथियों पर उपस्थित दस्तखत है लेकिन कार्य क्या किया, इसका उल्लेख नहीं है। साफ है कि बाद में इन सभी ने सेटिंग-गेटिंग का बहुप्रचारित तरीका अपनाया।

शालिनी सिंह, शबाना खातून, नरेंद्र यादव ने विभिन्न तिथियों पर दस्तखत न करने की दोषी पाई गईं। सेटिंग में असफल रविरंजन सिंह को दिल्ली से इतर ऐसी ट्रेनों में ड्यूटी दी गई जहां फूटी कौड़ी की भेंट न हो। जबकि सेटिंगबाज कर्मियों को मनचाही ड्यूटी दी गई।

मुंहमांगी ड्यूटी मुफ्त में मिलती हो, ऐसा भी नहीं है। हर बेजा सुविधा का बड़ा शुल्क है। एसके पांडे और राकेश चौधरी के वसूली तंत्र में बस इतना ही फर्क है कि एसके पांडे ऑनलाइन डिजिटल मोड में सीधे खाता में पैसा लिया। जबकि राकेश चौधरी ने इस मामले में होशियार निकले। अनियमित ड्यूटी के बदले गैरवाजिब वसूली के साक्ष्य लुप्त हैं। सवाल यह है कि इस अवैध कार्य के बदले यदि कोई रकम ली गई तो उसका बंदरबांट पहले जैसा ही हुआ या कोई अकेले ही हजम कर गया।

एसीएम ने सीनियर डीसीएम समेत सभी जिम्मेदार अफसरों को भी रिपोर्ट भेजी है लेकिन कार्रवाई क्या होगी और कब होगी? कुछ पता नहीं है। जानकारी में आया है कि सीआईटी लाइन ने 6 सितंबर तक मामले में जवाब भी नहीं दिया है।

एसीएम की रिपोर्ट से साफ है कि गड़बड़ियां व्यापक हैं लेकिन इन्हें दबाने के प्रयास उससे भी अधिक हैं। इसलिए कार्रवाई होने में में संदेह है।

 

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