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#NCR : पांच महीने में 10 हजार कोच अनमैंड, रेलवे को भारी नुकसान

#NCR : पांच महीने में 10 हजार कोच अनमैंड, रेलवे को भारी नुकसान

प्रयागराज  : प्रयागराज जंक्शन पर वाणिज्य अफसरों और कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड की आंखों में धूल झोंक रेलवे को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया है। रेलवे बोर्ड की चेतावनी के बावजूद वाणिज्य विभाग के प्रबंधकों ने मार्च 2022 से लेकर जुलाई के बीच 10 हजार से अधिक कोच “अनमैन्ड” करा चुके हैं। मनमानी और अनदेखी का यह क्रम अनवरत जारी है। आशंका है कि अनमैन्ड यानि बिना टिकट जांच वाले कोच अफसरों से लेकर टिकट चेकिंग स्टाफ और उनकी निगरानी करने वाले छुटभैये प्रबंधकों की काली कमाई के रास्ते हैं।

पिछले दिनों डिप्टी सीआईटी मनोज कुमार को सीआईटी लाइन राकेश चौधरी ने इस तर्क के साथ मां के इलाज के लिए छुट्टी देने से इनकार कर दिया था कि कोच अनमैन्ड हो जाएंगे। इसलिए दो दिन पूर्व की सूचना के बिना कोई अवकाश नहीं मिलेगा। कोचों के मैन्ड और अनमैन्ड के इस खेल की पड़ताल “नेशनल व्हील्स” ने की तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। खुलासा हुआ कि प्रयागराज जंक्शन पर फरवरी 2022 में सीआईटी लाइन बने राकेश चौधरी ने नीचे से ऊपर तक ऐसी गोटियां फिट कीं कि कोचों के अनमैन्ड होने की कहानी दिन-ब-दिन रिकार्ड तोड़ने लगीं।

मार्च-अप्रैल में ही 5200 कोच हो गए थे अनमैन्ड 

सूत्रों के अनुसार प्रयागराज जंक्शन बेस से मार्च 2022 में एसी और स्लीपर को मिलाकर विभिन्न ट्रेनों के करीब 2300 कोच ऐसे थे जिनमें बैठे मुसाफिरों के टिकटों की जांच नहीं हुई। अप्रैल में अनमैन्ड कोचों की संख्कया बढ़कर करीब 2900-3000 तक पहुंच गई। प्रतिदिन अनमैन्ड हुए कोचों का औसत देखें तो मार्च में करीब 80 और अप्रैल में 100 कोच प्रतिदिन अनमैन्ड कराए गए। मई और जून जैसे सुपर पीक टाइम में यह संख्या और भी बढ़ गई। जुलाई में भी अनमैन्ड कोचों की संख्या मार्च जैसी ही है। यदि पांच महीने में अनमैन्ड हुए कोचों का औसत देखें तो यह 10 हजार से भी अधिक हो जाएगा।

टिकट चेकिंग स्टाफ का मानना है कि पीक सीजन में बिना टिकट या अवैध टिकट वाले यात्रियों से प्रति कोच पांच से छह हजार की न्यूनतम अर्निंग होती है। ऐसे में नुकसान का आकलन करना भी कठिन नहीं है।

बोर्ड के निर्देश पर एडीआरएम भी दौड़े थे लेकिन नतीजा ?

बताते हैं कि बड़ी संख्या में रेल यात्रियों ने सोशल मीडिया के जरिए रेल मंत्रालय से यह शिकायत की थी कि पूरे रास्ते में उनके टिकटों की जांच करने वाला कोई भी स्टाफ कोचों में नहीं आता है, इसलिए उनके टिकट लेने या ना लेने का कोई अर्थ नहीं है। रेलवे बोर्ड ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सभी जोनों और मंडलों को जांच का निर्देश दिया था। प्रयागराज डिवीजन में अपर मंडल रेल प्रबंधक संजय सिंह ने भी गाड़ी संख्या 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में जांच की तो 5 कोच अनमैंड पाए गए। यानी इन कोचों में यात्रियों के टिकटों की जांच करने के लिए कोई भी स्टाफ नहीं पहुंचा था। डिवीजन में इस मामले को लेकर लिखा पढ़ी और हल्ला गुल्ला हुआ। सीआईटी लाइन और अन्य जिम्मेदार अफसरों व कर्मचारियों से पूछताछ भी हुई लेकिन सभी ने गोलमोल जवाब और एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लिया। असर यह हुआ कि रेलवे बोर्ड की चेतावनी भी बेअसर हो गई।

पीक टाइम में होती है विशेष व्यवस्था

रेलवे में फरवरी से लेकर जुलाई तक पैसेंजर आय के लिहाज से पीक टाइम चलता है। रेलवे की कोशिश होती है कि स्पेशल ट्रेनों के संचालन और नियमित ट्रेनों में कोचों की बढ़ोत्तरी तक यात्रियों की बढ़ी संख्या को गंतव्य तक पहुंचाकर यात्री भाड़ा मद की आय बढ़ाई जाए। इसके लिए टिकट चेकिंग स्टाफ, आरपीएफ आदि के जरिए स्विपेशल ड्शेराइव भी चलाती है लेकिन जब जिम्मेदार देने और लेने वाले ही ऐसे कुप्रबंधन को बढावा दें तो किसी भी संस्था का बंटाधार होने से कोई नहीं रोक सकता है।

यहां दर्ज है गड़बड़ियों का ये खजाना

ट्रेन ड्यूटी से लौटने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए उनके बेस स्टेशन पर कैपटेंसी रजिस्टर (दैनिक डायरी) होती है। ड्यूटी से लौटने के बाद कर्मचारियों को ट्रेन में जांच किए गए कुल कोचों की संख्या और जांच से छूट गए (अनमैन्ड) कोचों (एसी और नाॅन एसी) की संख्या लिखना पड़ता है।

रेलवे की विजिलेंस या रेल मंत्रालय के अफसर चाहें तो इस दैनिक रजिस्टर की पड़ताल कर कोचों की फेयर जांच और भ्रष्टाचार के इस कॉकटेल की परतें सतर्कता खोल सकते हैं। यदि परतें खुली तो इसमें सीआईटी लाइन ही नहीं बल्कि कई बड़े अफसरों को भी जवाब देना मुश्किल हो सकता है।

भ्रष्टाचार, लापरवाही, अनदेखी और मनमानी के इस मामले की परतें अभी और खुलेंगी।

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