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NCR : चेकिंग स्टाफ भरपूर, फिर क्यों अनमैन्ड कराए गए 10 हजार कोच ?

NCR : चेकिंग स्टाफ भरपूर, फिर क्यों अनमैन्ड कराए गए 10 हजार कोच ?

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के वाणिज्य विभाग में अंधेर मची है। इसमें भी प्रयागराज डिवीजन का भगवान ही मालिक है। पत्रकार संतोष उपाध्याय की शिकायत पर रेलवे बोर्ड तक रोस्टर में भ्रष्टाचार का मुद्दा गूंजा। पीसीसीएम भी हटाए गए लेकिन डिवीजन के नीति नियंता और कर्मचारी सब भूलकर फिर रेलवे को चूना लगाने का नया कांड कर डाला। सलाहकार भी ऐसे जो हर खबर पर पत्रकारों को “सेट” कर लेने का नया नुस्खा प्रस्तुत कर देते हैं।

मार्च से जुलाई के मध्य प्रयागराज जंक्शन बेस से करीब 10 हजार कोचों को अनमैन्ड कराने की खबर “नेशनल व्हील्स” ने गुरुवार को www.nationalwheels.com पर चलाई तो इसके जिम्मेदारों में खलबली मच गई। कोचों को अनमैन्ड कराकर अवैध मोटी कमाई करने और रेलवे को चूना लगाने का षडयंत्र केवल प्रयागराज जंक्शन पर ही नहीं हुआ है। छिवकी, कानपुर सेंट्रल और टूंडला स्टेशनों पर भी बड़ी संख्या में कोच अनमैन्ड कराए जा चुके हैं। रेलवे से बाहर की किसी एजेंसी ने यदि जांच की तो रेलवे को करोड़ों की चोट का पहुंचने का प्रमाण मिलना तय है। रेलवे विजिलेंस तो सांठगांठ का खेल करती है। इसलिए रेलकर्मियों का भी उस पर भरोसा नहीं है। वजह, वसूली मामले में उत्तर मध्य रेलवे के विजिलेंस इंस्पेक्टर और उनके आलाधिकारी खुद सीबीआई के राडार पर हैं।

फिलहाल, कोचों में टीटीई, डिप्टी सीआईटी और सीआईटी की ड्यूटी लगाने की जिम्मेदारी सीआईटी लाइन राकेश चौधरी के पास फरवरी 2022 में आई। वह वरिष्ठता में प्रयागराज मंडल में दूसरे नंबर यानि भरपूर अनुभव वाले सीआईटी हैं यानि भरपूर अनुभव है। परंतु, चार्जशीट संभालते ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने में ऐसा गड़बड़झाला किया कि 20-30 नहीं प्रतिदिन 80-100 कोच तक अनमैन्ड होने लगे। यह गड़बड़ी इसलिए भी गंभीर है कि जानकारी होने के बाद भी अफसरों ने इस पर रोक नहीं लगाई।

सूत्रों के अनुसार प्रयागराज जंक्शन बेस पर सीआईटी 128, डिप्टी सीआईटी 206 और अन्य चेकिंग स्टाफ सात है। इनके जिम्मे अपर कोच करीब 220 और स्लीपर के करीब 175 कोचों के यात्रियों के टिकटों की जांच करने का काम है। बताते हैं कि रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार ट्रेन वर्जिनेटिंग (जहां से बनकर चलती है) स्टेशन से एसी और स्लीपर के तीन-तीन कोच एक-एक कर्मचारी को देखना होता है। मध्य यानि बीच के किसी स्टेशन से चेकिंग स्टाफ ट्रेन में आता है तो एसी के पांच और स्लीपर के तीन कोचों की जांच की व्यवस्था है।

रेलवे सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में ज्यादातर कार्य ऑनलाइन हो चुका है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में जुगाड़ कर्मचारी ट्रेन ड्यूटी के बजाय आफिस कार्य में लगे हैं। कुछ चुनिंदा कर्मचारी केवल प्रयागराज और हमसफर एक्सप्रेस में ही ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसी स्टाफ की संख्या भी काफी है जो मुगलसराय रूट पर ही ड्यूटी कर रहे हैं। कोचों को अनमैन्ड कराने के पीछे और भी क्या वजहें हैं? इनका खुलासा भी किया जाएगा।

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