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#NCR : कामर्शियल में ट्रांसफर, पोस्टिंग, स्पेयर जैसी समस्याओं को हल कराते हैं “बड़े पापा”

#NCR : कामर्शियल में ट्रांसफर, पोस्टिंग, स्पेयर जैसी समस्याओं को हल कराते हैं “बड़े पापा”

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन के कामर्शियल विभाग में “बड़े पापा” की चर्चा इन दिनों खूब है। रेलवे की ड्यूटी के हिसाब से उन पर डिवीजनभर में घूम-घम कर यूटीएस मशीनों के अनुरक्षण की जिम्मेदारी हैं। परंतु, सूत्रों का दावा है कि अनुरक्षण तो दिखावा है। इसकी आड़ में वह डिवीजनल साहब के सलाहकार व सीएमआई एमपीपी की सेटिंग वाली “गोट” को स्टेशन-स्टेशन अंजाम देते हैं। जानकारी में आया है कि जिससे वह संपर्क साध लेते हैं, उसका काम झटपट हो जाता है। लेकिन जिससे उनकी डील सफल नहीं होती तो वह ट्रांसफर होकर भी महीनों स्पेयर नहीं होता। छानबीन में टूंडला, रूरा और मिर्जापुर के तीन ऐसे केस सामने आए जिन्हें जानकर खुद रेल मंत्री भी हैरान हो जाएंगे।

“नेशनल व्हील्स” इंडिया न्यूज़ ने पिछले सप्ताह “अन्हरा बांटे रेवड़ी चीन्हि-चीन्हि के देई” में कामर्शियल विभाग में महीनों पहले स्थानांतरित लेकिन स्पेयर न किए जाने वाले कर्मचारियों की स्टोरी प्रकाशित की थी। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने छह कर्मचारियों को स्थानांतरित स्टेशन के लिए रिलीव कर दिया। इनमें प्रयागराज छिवकी से सीबीएस संजय यादव, ईसीआरसी विनोद मिश्र, बीसी कुसुम शुक्ला, मेजा से एचबीसी आशीष मिश्र, फतेहपुर से मोईन अहमद समेत कुल छह कर्मचारी प्रयागराज जंक्शन पहुंचकर ज्वाइन कर चुके हैं। हालांकि, मेजा से स्थानांतरित आरके प्रजापति, सीपीएस मिर्जापुर आजाद किशोर श्रीवास्तव, मानिकपुर स्टेशन के बीसी रामविलास स्पेयर हुए कर्मचारियों जितने सौभाग्यशाली साबित नहीं हुए। स्थानांतरित होकर भी वह स्पेयर होने का महीनों से “बड़े पापा” से सेटिंग की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि मिर्जापुर में पदस्थ आजाद किशोर श्रीवास्तव का पूर्व में भी प्रयागराज जंक्शन के लिए स्थानांतरण हुआ। आठ महीने तक वह स्पेयर नहीं किए गए। आरोप है कि उन्हें डिवीजन के कर्मचारियों ने धमकाया कि बिना ‘लेनदेन’ आए तो मारीपत (गाजियाबाद के नजदीक एनसीआर का अंतिम स्टेशन) भेज दिया जाएगा। भारी दबाव में उन्होंने रिफ्यूजल यानि पत्र लिखकर स्थानांतरण अस्वीकार कर दिया। अब चार महीने से स्थानांतरण के बाद वह फिर स्पेयर की प्रतीक्षासूची में डाल दिए गए हैं।

सूत्रों का दावा है कि रूरा स्टेशन के हेड बुकिंग क्लर्क रशीद अहमद की ऑन डिमांड प्रियार्टी एक नंबर पर है। सेटिंग नहीं हुई तो सीएमआई एमपीपी ने गजब की गणित बैठाई। पहले उन्हें उनके मूल कार्य के साथ-साथ कैजुअल्टी ड्यूटी भी दे दी गई। रशीद से रिजर्वेशन का काम भी कराया जा रहा है। रेलवे के अन्य कर्मचारी 8-8 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं तो रशीद अहमद को 12-12 घंटे ड्यूटी के नाम पर निरंतर रगड़ा जा रहा है।

यहां तक तो फिरभी समझ आता रहा है। इसके आगे ऐसा “खेल” कर दिया है कि रशीद अहमद की जगह रूरा के लिए टूंडला से जिस कर्मचारी को स्थानांतरण के लिए चुनाव वह लकवा ग्रस्त होने के कारण पहले से ही रेलवे मेडिकल पर चल रहा है। अजय कुमार ट्रेन चालक से डिकैटेगराइज होकर बुकिंग क्लर्क टूंडला बने हैं। वह अपनी बीमारी का इलाज करा रहे हैं। वह ड्यूटी कब ज्वाइन करेंगे, पता नहीं है। जब तक वह स्पेयर होकर रूरा नहीं पहुंचते, जो कि मुश्किल है, रशीद अहमद का कानपुर के लिए स्पेयर होना संभव नहीं है।

इससे “साहब” और सीएमआई प्लानिंग के दो मकसद पूरे हो गए। पहला, प्रथम प्रियार्टी होने के कारण रशीद अहमद का स्थानांतरण भी हो गया। दूसरा वह टूंडला से कर्मचारी न आ पाने के कारण स्पेयर भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि लाठी भी नहीं टूटी और सांप भी मर गया।

रेल कर्मचारियों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर का न थमने वाला यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा।www.nationalwheels.com पर आप अपडेट होने के लिए देखते रहें। ट्वीटर पर @nationalwheels हैंडल को फाॅलो कर सकते हैं।

 

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