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#NCR : अन्हरा बांटे रेवड़ी, चीन्हि-चीन्हि के देय

#NCR : अन्हरा बांटे रेवड़ी, चीन्हि-चीन्हि के देय

प्रयागराज  : उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन के कामर्शियल विभाग में जहां भी हाथ रखिए, दाग ही दाग दिख रहे हैं। ये दाग गहरे हैं और भ्रष्ट भी। अब तो यह पूरी तरह से साफ होता दिखने लगा है कि डिवीजन में सीआईटी लाइन के साथ ही स्थानांतरण में सीएमआई ही नीति नियंता हैं। काम वही हो रहा है जैसी पट्टी “साहब” को सीएमआई लोग पढ़ाते हैं। संवेदनशील पदों पर बैठे कर्मचारियों के स्थानांतरण में तो यह पूरी तरह लागू है। इससे यह भी लगता है कि भारतीय रेलवे यातायात सेवा वाले अफसर तो मुखौटाभर हैं। वजह, सीएमआई लोगों की अंधेरगर्दी देखकर भी अनदेखा करना दो ही कारणों से संभव है। पहली साहब भी इस खेल खेल के “खिलाड़ी” हैं या फिर पूरी तरह अनाड़ी हैं। डिवीजन में ‘पिक एंड चूज’ का बड़े पैमाने पर खेल हो रहा है।

“नेशनल व्हील्स” ने प्रयागराज छिवकी के ECRC पंकज कुमार को सीएमआई परीक्षा का परिणाम निकलने के ठीक पहले जबरन बरगढ़ स्टेशन के लिए रिलीव करने का खुलासा किया था। इस मामले में प्रशासनिक फैसले से प्रभावित कर्मचारी ने ट्रांसफर लीव और टीए का दो बार लाभ उठाया। बरगढ़ की समस्या भी यथावत रह गई। पदोन्नति पर कानपुर से टूंडला गए कर्मचारियों को रेलवे बोर्ड के नियमों को तार-तार कर फिर उसी स्टेशन पर दो महीने में बुला लिया गया, जहां से वह गए थे।

महाप्रबंधक, वाणिज्य विभाग के मुखिया पीसीसीएम और मंडल रेल प्रबंधक को भी वाणिज्य विभाग में पीरियोडिकल ट्रांसफर के नाम पर मची अंधेरगर्दी को जानकर हैरान हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार संवेदनशील पदों पर बैठे तमाम कर्मचारियों के स्थानांतरण में व्यापक अनियमितता की गई है। कम अवधि तक एक ही स्टेशन पर रह चुके कर्मचारियों को दूरदराज के स्टेशनों पर भेजा गया है। परंतु 15 वर्ष से अधिक की नौकरी एक ही स्टेशन पर पूरी कर चुके कर्मचारियों को खुला छोड़ दिया गया। यही नहीं जो कर्मचारी स्थानांतरित किए गए हैं, उनमें भी ‘पिक एंड चूज’ का फार्मूला अपनाकर रोकने और रिलीज करने का खेल चल रहा है।

जानकारी के अनुसार सीबीएस छिवकी संजय यादव, ईसीआरसी छिवकी विनोद मिश्रा और मेजा में पदस्थ एचबीसी आशीष मिश्रा का स्थानांतरण प्रयागराज महीनों पहले हुआ है। इसमें आशीष मिश्र के स्थान पर स्थानांतरित होकर दूसरा कर्मचारी भी पहुंच चुका है। राशिद अहमद एसबीसी झींझक से अनवरगंज, और ईसीआरसी मिर्जापुर सौरभ श्रीवास्तव का छिवकी स्थानांतरण का आदेश तो हुआ लेकिन ये भी नए स्टेशनों पर पहुंचने की प्रतीक्ष कर रहे हैं।

चंद्रावती, राजकुमारी वर्मा और नवीन शुक्ला छिवकी और खागा से स्थानांतरण होते ही प्रयागराज के लिए रिलीव कर दिए गए। चर्चा है कि ये सभी सीएमआई प्लानिंग के करीबी हैं।

रोचक यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग के बाबुओं के स्थानांतरण में हुई ऐसी ही मनमानियों पर अब तक दर्जनभर अफसरों और दो दर्जन कर्मचारियों को निलंबित कर चुकी है। जबकि केंद्र सरकार का विभाग होने के बावजूद ऐसी मनमर्जी और अनियमितता की जा रही है, जिसे न रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव पसंद करते हैं और न ही सरकार के मुखिया पीएम नरेंद्र मोदी। देखना यह है कि “साहब” लोग इन गड़बड़ियों को ठीक करते हैं या सीएमआई बाबुओं की सांठगांठ का दरवाजा खुला रखते हैं। सवाल यह भी है कि जब कर्मचारी को स्थानांतरित स्टेशन के लिए रिलीव ही नहीं करना था तो स्थानांतरण क्यों किया गया? क्या लेनदेन कर सेटिंग-गेटिंग करने का प्लेटफार्म जैसा यह नहीं है?

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