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म्यांमार की सेना ने उड़ाया एनएससीएन (के) का मुख्यालय, तोड़ दी रीढ़

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार को तीसरे मोर्चे पर भी सफलता हासिल होने की खबर है. ऐसी सूचनाएं हैं कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर हुई कार्रवाई के बाद म्यांमार की सेना ने अपने देश में पूर्वोत्तर के आतंकी संगठन एनएससीएन (खपलांग गुट) के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है. म्यांमार की सेना ने आतंकी संगठन के मुख्यालय को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. इसके अलावा पूर्वोत्तर में सक्रिय कई अन्य आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण शिविरों को भी म्यांमार की सेना ने उजाड़ दिया है. पूर्वी सीमा पर बिना किसी दबाव के म्यांमार की यह कार्रवाई भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है.
आतंकवाद से भारत की लड़ाई किसी से छिपी नहीं है. 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर तैयार करने वाले प्रशिक्षण शिविर को तहस-नहस कर दिया था. यह अलग बात है कि पाकिस्तानी राजनेताओं और सेना की घबराहट के बाद भी देश के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी इस कार्रवाई के सुबूत मांग रहे हैं. इस हमले के साथ ही भारतीय कूटनीति का तिरंगा उस वक्त दुनियाभर में लहरा उठा जबकि भारी दबावों के बीच पाकिस्तान ने दो दिनों के अंदर भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को वापस लौटा दिया. दुनियाभर में शायद यह पहला मौका है जबकि दुश्मन देश ने किसी पड़ोसी देश के सैनिक को इतनी जल्द लौटाया हो. इन दोनों वाकयों से पूरे देश में उत्साह का माहौल है.
इसी बीच पूर्वोत्तर सीमा से भी कुछ अच्छी सूचनाएं सामने आ रही हैं. हालांकि, भारत की मुख्य मीडिया में यह खबरें अब तक जगह नहीं पा सकी हैं. पूर्वोत्तर में भारतीय सरजमी पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ म्यांमार सेना ने कड़ी कार्रवाई की है. राइटलॉग वेबसाइट के पत्रकार अजित दत्ता ने लिखा है कि पड़ोसी देश म्यांमार से जानकारी मिली है कि म्यांमार की सेना ने आतंकवादी संगठन NSCN (K) के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है.

म्यांमार बना था पूर्वोत्तर के आतंकी ठिकानों का आश्रय स्थल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार के 500 से अधिक सैनिकों ने पिछले हफ्ते आतंकवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड खापलांग एनएससीएन (के) के मुख्य ठिकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. सेना की यह कार्रवाई उस चेतावनी के बाद की गई जिसमें यह कहा गया था कि बिना किसी देरी के आतंकी संगठन म्यांमार की जमीन छोड़ दें. NSCN(K) के अलावा भारत के उत्तर पूर्वी हिस्से में सक्रिय कई अन्य आतंकवादी संगठनों का आधार म्यांमार रहा है. म्यांमार सेना के सैनिकों ने कई शिविरों को नष्ट कर दिया, जो उल्फा (आई) और पूर्वोत्तर भारत के अन्य आतंकी संगठनों से संबंधित थे.

एनएससीएन (के) था आतंकियों का बैकबोन

बताते हैं कि परेश बरुआ की अगुवाई वाले उल्फा (आई) सहित पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश आतंकी संगठन अपने ठिकानों को बनाए रखने और भारत के खिलाफ उग्रवादी गतिविधियों को संचालित करने के लिए एनएससीएन (के) की सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं. ऐसे में म्यांमार सेना की इस कार्रवाई से पूर्वोत्तर के आतंकी संगठनों को एक बड़ा झटका लगा है. रक्षा सूत्रों ने यह भी बताया है कि म्यांमार सेना ने उग्रवादी शिविरों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया है. यह शिविर घने जंगलों में बनाए गए थे.

2015 में म्यांमार में भारत ने की थी सर्जिकल स्ट्राइक

NSCN(K) के लिए यह पहला झटका नहीं है. यह वही समूह है जिसने वर्ष 2015 में चंदेल जिले में भारत की सेना के डोगरा रेजिमेंट के काफिले पर हमला कर दिया था. इस घटना में 18 सैनिक शहीद हुए थे. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने कुछ ही दिनों में आधिकारिक तौर पर म्यांमार की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया. भारतीय सेना की इस कार्रवाई में 55 से अधिक उग्रवादी मारे गए थे.
NSCN(K) को मुख्य रूप से नागालैंड और मणिपुर में अलगाववाद को हवा देने के लिए स्थापित किया गया था. इस आतंकी संगठन ने म्यांमार में अपना ठिकाना पूर्वोत्तर भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देता रहा है. बताते हैं कि 2015 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस आतंकी संगठन की कमर टूट गई थी. धीरे-धीरे कमजोर हो चुके इस आतंकी संगठन के लिए म्यांमार सेना की मौजूदा कार्रवाई ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकती है.
ऐसा माना जाता है कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ पूर्व की सरकारों की लचर कार्रवाई के विपरीत सख्त रुख अपनाया है. केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई के लिए खुली छूट देने से देश विरोधी तत्वों की रीढ़ तोड़ दी. कश्मीर के बाहर देश के दूसरे हिस्सों में आतंकी हमलों और नक्सली घटनाओं घटनाओं में कमी इसका बड़ा प्रमाण है. चार मार्च को गुजरात के अहमदाबाद में प्रधानमंत्री का यह दावा कि अब घर में घुस कर मारेंगे, से सरकार की सख्ती का अंदाज लगाया जा सकता है.

 

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