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मुलायम ने सपा-बसपा गठबंधन पर किया वार, बेटे अखिलेश को भी साबित किया कमजोर

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स 
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ और उन्हें फिर प्रधानमंत्री बनने का आशीष देकर सपाइयों की नाराजगी के पात्र बने मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश यादव के बसपा गठबंधन को लेकर सवाल उठाया है. समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सपा-बसपा गठबंधन पर हमला किया है. माना जा रहा है कि मुलायम की निगाह टेढ़ी होने से गठबंधन को झटका लग सकता है.
मुलायम ने इस बात पर आपत्ति जाहिर की है कि अखिलेश यादव इस गठबंधन में आधी सीटों पर राजी क्यों हो गए. मुलायम ने कहा कि आखिर कैसे अखिलेश यादव बहुजन समाज पार्टी के साथ ऐसे गठबंधन के लिए राजी हो गए जिसमें समाजवादी पार्टी के हिस्से में आधी सीटें आई हैं. मुलायम ने तो ये तक कहा कि पार्टी के लोग ही पार्टी को खत्म करने में जुटे हैं. महिलाओं को पार्टी में तरजीह नहीं मिल रही. हमने इतनी बड़ी पार्टी बनाई, लेकिन पार्टी को अब कमजोर किया जा रहा है. मुलायम ने साफ कहा कि सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 25-26 सीटें ही जीत सकते हैं.
पूर्व सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह बसपा या कांग्रेस के साथ सपा गठबंधन का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि ‘मैंने अखिलेश से कहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दो जिससे वे तैयारी कर सकें. बीजेपी तैयारियों के मामले में हमसे आगे निकल गई है. टिकट बंटवारे को लेकर भी मुलायम ने बेटे की रीति-नीति पर अटैक किया है. उन्होंने कहा कि हमने 14 महीने पहले उम्मीदवारों का नाम फाइनल कर दिया था और बड़ी जीत मिली थी. लेकिन अखिलेश अभी तक टिकट ही नहीं तय कर पाए.’
मुलायम ने यह कहकर अखिलेश को भी झटका दिया है कि जीतने वाले नेताओं को टिकट दो. शिवपाल को भी लोग नाम दे रहे हैं. टिकट देना भले ही अखिलेश के हाथ में हो हटाना तो मेरे हाथ में है.
बता दें कि मार्च में घोषित होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किया है. इस गठबंधन के तहत सपा और बसपा 80 सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हुए हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति के इन दो धुर विरोधियों का एक साथ आना प्रदेश की राजनीति के पुरोधा मुलायम को रास नहीं आ रहा है.
दो महीने पहले हुए गठबंधन को लेकर मुलायम सिंह यादव ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. ऐसा माना जा रहा है कि बेटे अखिलेश यादव ने इस मामले में पिता की राय नहीं ली है. मुलायम सिंह के इस हमले से भी यह बात साबित होती दिख रही है.
यूपी की राजनीति में धरती पुत्र कहे जाने वाले मुलायम को आपत्ति इस बात पर है कि उनके बेटे अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले ही आधी से ज्यादा सीटों पर अपनी दावेदारी आखिर कैसे छोड़ दी. प्रदेश से इस समय सपा के सात सांसद हैं जबकि बहुजन समाज पार्टी का एक भी सांसद नहीं है. मुलायम ने सपा-बसपा गठबंधन पर सवाल उठाकर एक तरह से अपने छोटे भाई और अखिलेश के विरोधी शिवपाल यादव के सुर में सुर मिलाया है, जिन्होंने अलग पार्टी बनाकर सपा के खिलाफ बिगुल फूंका हुआ है.
बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जब अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था तब भी मुलायम सिंह ने सवाल एतराज जाहिर किया था. तब मुलायम सिंह इस कदर कुपित हुए थे कि वह शिवपाल यादव और पारसनाथ यादव की सीट को छोड़कर किसी भी अन्य सीट पर प्रचार करने तक नहीं गए थे. यह आशंका जताई जा रही है कि बसपा के साथ गठबंधन में मुलायम सिंह सपा को कमजोर होता देख रहे हैं. उनका मानना है कि सपा अकेले दमपर चुनाव लड़कर जितनी सीटें जीत सकती थी, गठबंधन बनाकर भी वह यह काम नहीं कर सकेगी. वजह, गठबंधन में सपा की मजबूती वाली कई सीटें बसपा के खाते में चली गई हैं.
हालांकि, ये पहला मौका नहीं है जब मुलायम ने अखिलेश यादव को अपने बयान से असहज किया है. इससे पहले 16वीं लोकसभा के आखिरी दिन मुलायम ने सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबके साथ मिलजुलकर काम किया है, सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया है. प्रधानमंत्री मोदी को हमारी बधाई और हमारी कामना है कि वह फिर से चुनकर आएं और प्रधानमंत्री बनें. मुलायम के इस बयान को बीजेपी ले उड़ी और लगातार अखिलेश पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल भी कर रही है.

 

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