NationalWheels

मोदी जी हों या प्रियंका, पार लगिहैं गंगा मैया

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

आलोक श्रीवास्तव

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गंगा के जरिए शुरू की प्रयागराज से काशी की यात्रा
प्रयागराज । लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सभी राजनीतिक दलों और नेताओं के तरकश से विभिन्न-विभिन्न किस्म के तीर दनादन निकलने लगे हैं। यह तो सत्य है कि देश में वास्तव में राष्ट्रीय स्तर की दो ही पार्टियां हैं । पहला – भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) और दूसरी- कांग्रेस। फिलहाल कांग्रेस ने अपने तुरुप के एक्का प्रियंका गांधी को चुनावी फतह के लिए मैदान में उतार दिया है। उन्होंने इस अभियान की शुरुआत अपने परनाना व पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मभूमि और कर्मभूमि इलाहाबाद ( वर्तमान में प्रयागराज ) से की है। कभी यह जिला कांग्रेस का गढ़ था , पर समय के साथ कांग्रेस यहां से विलुप्त होती गई। अब देश , प्रदेश और प्रयागराज में कांग्रेस को खड़ी करने की जिम्मेदारी प्रियंका के कंधे पर है।

गंगा मैया लगाएंगी बेड़ा पार!

मां के लिए सभी बच्चे बराबर होते हैं। वह सब पर ममता लुटाती है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , जो वर्तमान में काशी से सांसद हैं , ने कहा था – न तो मैं यहां आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है। दरअसल, मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है। यहां आकर मैं वैसी ही अनुभूति कर रहा हूं, जैसे एक बालक अपनी मां की गोद में करता है। अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी गंगा मां से कुछ मांगा है। कहा है-मां उदार हैं। कहा तो उचित ही है। मां हैं तो प्रियंका को भी कुछ न कुछ तो देंगीं ही। खैर, ये तो 23 मई को पता चलेगा कि मां ने किसे ( मोदी जी और प्रियंका ) कितना दिया।

गंगा मां की गोद में बैठ शुरू किया प्रचार अभियान

18 से 20 मार्च तक चलने वाली काशी तक की इस यात्रा के लिए वह रविवार (17 मार्च ) की रात में ही प्रयागराज आ गई थीं। वह रात में अपनी दादी के घर स्वराज भवन में रुकीं। सुबह 9.30 बजे वह गंगा यात्रा के लिए स्वराज भवन से निकलीं। सबसे पहले संगम क्षेत्र स्थित बड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं और वहां हनुमान जी का दर्शन कर उनकी आरती उतारी। इसके बाद उन्होंने किला स्थित अक्षयवट और सरस्वती कूप का दर्शन किया फिर संगम पहुंचीं। संगम में त्रिवेणी की आरती उतार कर उन्होंने मां गंगा का आशीष लिया और वहां से नाव पर बैठकर अरैल गईं। अरैल से कार से वह करछना के मनैया घाट पहुंचीं, जहां से उनकी गंगा यात्रा प्रारंभ हुई।

प्रियंका गांधी ने क्या कहा , कहां गईं

उनकी (प्रधानमंत्री) मर्जी अपने नाम के आगे क्या लगाएं। मुझे एक किसान भाई ने कहा कि देखिए चौकीदार तो अमीरों के होते हैं, हम किसान तो अपने खुद चौकीदार होते हैं।
युवाओं और किसानों को कुछ नहीं मिला। सरकार सिर्फ उद्योगपतियों का ही ध्यान दे रही है। सरकार किसानों का दुख दर्द सुनने को तैयार नहीं है। पिछले 45 सालों के बीच बीते पांच साल में युवाओं को सबसे कम रोजगार मिला है। गांव में मनरेगा की हालत खस्ता है। छह महीने से मनरेगा मजदूरों को पैसा नहीं मिला। अब तो सरकार किसी की बात सुनने को ही तैयार नहीं है। जिसने भी आवाज उठाई उसे डराया जाता है।
सिरसा कपशाई गंगा मार्ग पर पैदल मार्च निकाला। यहां लगभग एक दर्जन घरों में लोगों से मुलाकात की और सभी से हाल पूछा। प्रियंका ने सेजल और अंशिका नाम की बच्चियों से पढ़ाई के बारे में भी पूछा।
सिरसा में बैरिकेडिंग छोड़ अचानक दूसरे रास्ते से शिवबाटिका कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं। मनैया घाट से दुमदुमा घाट जाते हुए प्रियंका दो स्थानों पर रुकीं। यहां घाट पर खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसी समय संक्षिप्त संबोधन में प्रियंका ने गंगा की दशा पर अपना विचार रखा। प्रियंका ने कहा कि जल्द लोगों से मिलने आएंगी।
जब प्रियंका ने अपनी दादी इंदिरा गांधी की तस्वीर को संगम के तट पर स्थित लिए हुए हनुमान जी के मंदिरके कार्यालय में देखा तो पूंछा दादी कब आयी थीं, तो महाराज जी ने इंदिरा गांधी की कहानी सुनाई, जिसको सुनकर प्रियंका गांधी ने कहा- दादी की तरह मैं भी बनूं और उनके पद चिन्हों पर चल सकूं ऐसा आशीर्वाद दीजिये।

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

NationalWheels will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.