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`#मोदी है तो मुमकिन है`, दबाव में झुका चीन और मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
#MasoodAzhardeclaredGlobalTerrorist: यह सुखद संकेत और संदेश है भारतीय लोकतंत्र के महापर्व के लिए कि जिस दुर्दांत आतंकी ने भारतीय लोकतंत्र के केंद्र संसद भवन, पठानकोट और पुलवामा जैसे आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए साजिश रची वह भारत की ताकतवर सरकार की रणनीति के सामने बौना साबित हो गया. पाकिस्तान के दोस्त चीन जैसे सबल राष्ट्र को भी भारत सरकार के दबाव के सामने घुटने टेकने पड़े. चीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो के रूप में लगाई अपनी आपत्ति वापस ले ली और भारत के प्रयासों से दुनियाभर के ताकतवर देशों ने एकजुट बुधवार को होकर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया.

लोकसभा चुनावों के दौरान इसका संदेश आते ही भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भाजपा की ओर से शुरू किए गए नारे `मोदी है तो मुमकिन है`, को नई धार मिल गई. पिछले एक दशक से अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध घोषित करवाने मे भारत जुटा था लेकिन चीन अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर हर बार इसमें अड़ंगा लगा देता था, लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार की कूटनीतिक जंग ने अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे देशों से भारी समर्थन दिलाया.
पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की एक बड़ी जीत बताते हुए कहा है कि इससे आतंकवाद को जड़ से मिटाने की कोशिशों को मदद मिलेगा. इस फैसले से पाकिस्तान के भी सुर बदल गये हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अजहर के बारे में यूएन के फैसले को तुरंत लागू करेगा. संयुक्त राष्ट्र की तरफ से अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए एक विशेष समिति बना रखी है जिसे 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के नाम से जाना जाता है.
इस समिति के तहत घोषित आतंकियों को किसी भी देश में शरण देना ना सिर्फ मुश्किल होता है बल्कि उसके लिए फंड जुटाना भी मुश्किल होता है. साथ ही मसूद अजहर के नाम से जुड़े हर बैंक खाते और संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा. उस व्यक्ति और उससे जुड़े हर तरह के संगठन की कड़ी निगरानी की जाती है और उनके बारे में संयुक्त राष्ट्र के तमाम देशों के साथ सूचनाएं भी साझा करनी पड़ती है.
अजहर का मुद्दा अभी शुरुआत है- पीएम मोदी
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत व स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने यह जानकारी दी कि मसूद अजहर यूएन की तरफ से आतंकी घोषित हो गया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी देर शाम राजस्थान के जयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर संतोष जताया. मोदी ने कहा, ”अजहर का मुद्दा अभी शुरुआत है. देखते रहिए आगे क्या क्या होता है.”
दूसरी तरफ यह भी साफ है कि लोकसभा चुनावों के दौरान देश को मिली यह सफलता मुद्दे के तौर पर भी उभर सकता है. इस चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान केंद्रित आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक व बालाकोट जैसे मुद्दे पहले से ही केंद्र में है.
बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की कोशिशें इसलिए सफल रहीं कि चीन ने मार्च 2019 में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से लाये गये प्रस्ताव के खिलाफ तकनीकी रोक (वीटो) वापस ले लिया. इस बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में पेश संशोधित प्रस्तावों का नए सिरे से अध्ययन करने के बाद तकनीकी रोक हटाया गया है.
चीन ने यह भी कहा है कि उसे प्रस्ताव में कोई आपत्ति नहीं दिखी है. चीन ने यह भी दिखाने की कोशिश है कि वह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर सभी देशों के साथ सहयोग करने को तैयार रहता है. चीन ने अपने बयान में पाकिस्तान का भी जिक्र किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लगातार काम कर रहा है और उसके योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए.
चीन व पाकिस्तान की तरफ से बचाव के बावजूद यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. यह सिर्फ चीन के मिजाज में बदलाव के हिसाब से ही नहीं बल्कि इस मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 देशों का सहयोग हासिल किया है. वह भी सरकार की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है. वर्ष 2009 में पहली बार भारत ने अजहर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था. उसके बाद चार बार ऐसा प्रस्ताव पेश हो चुका है और हर बार चीन उसे वीटो लगा कर खारिज करवाता रहा है.
माना जा रहा है कि इस जीत को भाजपा बहुमत वाली मजबूत सरकार के तर्क का आधार बनाएगी. गौरतलब है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार बार कहते रहे हैं कि विश्व में भारत की धमक इसलिए है क्योंकि यहां मजबूत सरकार है, कोई मजबूर सरकार नहीं. हाल की चुनावी रैलियों में वह आतंक को देश का सबसे बड़ा दुश्मन भी बताते रहे हैं. ऐसे में जब आतंक का सरगना और भारत का बड़ा दुश्मन घिर गया है तो चुनाव में इसका असर होना तय माना जा रहा है.

 

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