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भारत की सीमाओं का इतिहास लिखाएगी मोदी सरकार, रक्षा मंत्री राजनाथ ने दी मंजूरी

भारत की सीमाओं का इतिहास लिखाएगी मोदी सरकार, रक्षा मंत्री राजनाथ ने दी मंजूरी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
आने वाले दो-तीन वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का इतिहास भी आपको पढ़ने को मिलेगा. केंद्र सरकार देश की बदलती सीमाओं से युवाओं को रूबरू कराने के लिए इतिहास लेखन कराने का फैसला किया है. भारतीय ऐतिहासिक शोध परिषद की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार की इस परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है. इस बैठक में रक्षा मंत्रालय के साथ गृह और विदेश मंत्रालय के अफसर भी शामिल थे.
ज्यादातर युवा भारत की सीमा का इतिहास नहीं जानते. कुछ ऐसे भी हैं जो भारतीय सीमा का वर्तमान इतिहास भी पूरी तरह से नहीं जानते. जबकि ईरान, पाकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान, वर्मा, जावा, सुमात्रा और इंडोनेशिया जैसे देश प्राचीन भारत वर्ष का हिस्सा रहे हैं या भारत की सीमा से जुड़े रहे हैं. सीमाओं के इतिहास लेखन में केवल वर्तमान सीीमा का जिक्र नहीं होगा, बल्कि बदलती सीमा का इतिहास लिखा जाएगा यानि देश की बृहद भारत की सीमा को भी बताया जाएगा.

इस लेखन में सीमाओं के बनने के सभी पक्षों का उल्लेख होगा. इसमें निर्मित और अनिर्मित सीमा, सीमा की रक्षा में सुरक्षा बलों की भूमिका,सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों की भूमिका, इतिहास, भौगोलिक और सामाजिक स्थिति, संस्कृति, आर्थिक परिदृष्य जैसे पक्षों को भी शामिल किया जाएगा. सरकार ने इसके लिए परिषद को दो वर्ष का समय दिया है.  इस बैठक में नेहरू म्यूजियम और लाइब्रेरी, पुरातत्व विभाग के अफसर भी शामिल थे.

 

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