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किसानों को 2.30 लाख करोड़ का तोहफा देगी मोदी सरकार, चार हजार रुपये प्रति एकड़ मिलेगी आर्थिक मदद

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
किसान कर्ज माफी के सामने तीन राज्यों की सरकारें गंवाने वाली भारतीय जनता पार्टी आम लोकसभा चुनाव में कोई भी खतरा मोल लेने के लिए तैयार नहीं है. राम मंदिर पर अध्यादेश और राफेल पर विवादों के बीच मोदी सरकार ने कर्ज माफी का नया तोड़ निकाला है. सरकार मकर संक्रांति के पहले चार हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति सीजन आर्थिक मदद देने की तैयारी शुरू कर दी है. किसानों को एक एकड़ खेतिहर भूमि पर प्रत्येक वर्ष आठ हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिल सकती है. बिचौलिये इस योजना में सेंधमारी न कर सकें, इसके लिए पूरी रकम किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी. सरकार को इस योजना पर सालाना 2.30 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. यही नहीं, सरकार किसानों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने की भी तैयारी में है. दोनों योजनाओं का ऐलान अगले 10 दिनों में हो सकता है. 

सूत्रों के मुताबिक तीन राज्यों में किसान कर्ज माफी की फसल काटने के बाद कांग्रेस लोकसभा चुनावों में भी यह दांव आजमाना चाहती है. कांग्रेस को यह दांव फलदायी लग रहा है. कांग्रेस की इस रणनीति के तोड़ के रूप में सरकार भी चुनावी तरकश में किसानों की वित्तीय सहायता का तीर रखना चाहती है. भाजपा का जोर है कि किसानों को कांग्रेस की ओर जाने से रोकने के लिए सरकार खर्च का मुंह देखने के बजाए खजाने का मुंह खोल दे. यह योजना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पार्टी की सोच है कि इस योजना के सहारे सत्ता में वापसी संभव है.
सूत्र बताते हैं कि इस फैसले को अंतिम रूप देने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के साथ-साथ नीति आयोग में त्वरित बैठकें बुलाई हैं. इस कड़ी में राजस्व, व्यय, फूड, रसायन और उर्वरक समेत नोडल मंत्रालयों के अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से मीटिंग करने को कहा गया है. फैसले के ऐलान से पहले पीएम नरेंद्र मोदी खुद किसान नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले का ऐलान अगले दस दिनों में हो सकता है.
सूत्रों ने जानकारी दी है कि किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सीधे उनके बैंक खातों आर्थिक मदद के रूप में भेजी जाएगी. छोटी जोत होने पर रकम का अनुपात कम हो सकता है. साथ ही ब्याज मुक्त फसल लोन की सीमा को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर एक लाख रुपए तक प्रति किसान कर दिया जाएगा. अभी 4 फीसदी ब्याज दर की सब्सिडी दर पर किसानों को फसल ऋण मिलता है. योजना के तहत बैंक एक लाख रुपये तक के ऋण पर कोई ब्याज नहीं लेंगे.
बताते हैं कि केंद्र ने 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण के लक्ष्य को निर्धारित किया था, जिसे हासिल किया गया. इसमें से 70 फीसदी रकम फसल ऋण के रूप में बांटी गई है.
बैंकिंग सेक्टर के अफसरों की मानें तो कर्जमाफी के बढ़ते चलन और चुनावी राज्यों में दूसरी पार्टियों की ओर से भी ऐसी ही योजनाओं के ऐलान की आशंका को देखते हुए कई बैंकों ने किसानों को ऋण देना बंद कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि नई योजना किसानों के लिए उन्नति के रास्ते खोलेगी और उपज को पैदा करने में कम लागत आएगा. कृषि क्षेत्र में बैंकों के पास लगभग 3 लाख करोड़ का बैड लोन है.
नए साल के पहले दिन दिए अपने इंटरव्यू में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कर्जमाफी विकल्प नहीं है. पिछली सरकारों में कर्जमाफी की गई, लेकिन आज भी किसान कर्ज से परेशान हैं. ऐसे में किसानों की स्थिति बुनियादी समस्याओं के समाधान के बाद ही सुधरेगी. इस मामले में पीएम मोदी ने अधिकारियों से तत्काल योजना लाने का निर्देश दिया है.
सरकार की ओर से लाई जा रही नई योजना में सीधे किसानों के खाते में आर्थिक मदद भेजा जाएगा. इसके लिए किसानों को कुछ जरूरी डेटा मुहैया कराना पड़ सकता है. योजना का फायदा उठाने के लिए किसानों को उपज को बेचने का समय, खरीदार की डिटेल, क्रेता का आधार कार्ड, फसल की मात्रा, जमीन का विवरण जैसे डाटा भी जमा करना पड़ सकता है. यह डाटा फसल की बिक्री के समय इकट्ठा किया जाएगा.

 

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