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मुसलमानों से वोट न बंटने देने की अपील कर फंसीं मायावती, आचार संहिता का उल्लंघन!

मुसलमानों से वोट न बंटने देने की अपील कर फंसीं मायावती, आचार संहिता का उल्लंघन!
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सहारनपुर के देवबंद में रविवार को यूपी के सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की पहली संयुक्त रैली ही विवादों में घिर गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने मंच से कांग्रेस और भाजपा पर हमला किया था. साथ ही अपील की कि मुसलमानों का वोट नहीं बंटना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रमित करेंगे, लेकिन एक भी मुस्लिम वोट नहीं बंटना चाहिए. दरअसल, बसपा प्रमुख मायावती के सियासी समीकरण के तहत यूपी में दलित, मुसलमान और पिछड़ों का एक साथ आना किसी भी पार्टी के लिए जीत सुनिश्चित कर सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने सपा और रालोद से गठबंधन भी किया है लेकिन उनके भाषण को निर्वाचन आयोग ने पहली नजर में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है. संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार को मायावती को इस बयान के लिए आयोग नोटिस जारी कर जवाब मांग सकता है. उधर, एक आशंका यह भी है कि बसपा प्रमुख के इस बयान को देखते हुए पहले चरण के मतदान में मतों का ध्रुवीकरण भी हो सकता है.
कहा जा रहा है कि मायावती को पता है कि कांग्रेस के अलग मैदान में उतरने से जीत सुनिश्चित मानी जाने वाली कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. कांग्रेस के प्रचार के केंद्र में अल्पसंख्यक मतों के होने से मुस्लिम वोटों में बिखराव की भी संभावना है. इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है. इसके अलावा मायावती को यह भी पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के प्रति हमलावर हैं, वह भी मुसलमानों को खूब भा रहा है.
इसे देखते हुए मायावती को डर है कि अगर मुस्लिम वोट भ्रमित हुआ और बंटा तो गठबंधन के मंसूबों पर पानी फिर सकता है. सहारनपुर में कांग्रेस ने इमरान मसूद को टिकट दिया है. इमरान मसूद ने मोदी लहर में भी बीजेपी सांसद राघव लखनपाल को कड़ी टक्कर दी थी. 2019 में गठबंधन की तरफ से बसपा के हाजी फजलुर्रहमान सहारनपुर के चुनावी मैदान में हैं. दो मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से वोटों के विभाजन की संभावना भी दिख रही है. यही नहीं, कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद समेत कई अन्य सीटों पर भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं.
वैसे राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि बसपा प्रमुख गठबंधन के बैनर तले होकर भी सपा के एमवाई फैक्टर से एम फैक्टर को अपने खांचे में लाना चाहती हैं. जबकि यह अब तक सपा के पास रहा है. समाजवादी पार्टी खुलकर मुसलमानों के पक्ष में बोलती भी रही है लेकिन अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर चुप्पी लगा रखी है.

 

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