hindi news, #सोनभद्र नरसंहार मामले में बड़ी कार्रवाई, डीएम व एसपी हटाए गए, कई के खिलाफ एफआईआर और निलंबन के आदेश

#सोनभद्र नरसंहार मामले में बड़ी कार्रवाई, डीएम व एसपी हटाए गए, कई के खिलाफ एफआईआर और निलंबन के आदेश

hindi news, #सोनभद्र नरसंहार मामले में बड़ी कार्रवाई, डीएम व एसपी हटाए गए, कई के खिलाफ एफआईआर और निलंबन के आदेश
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
जमीनी विवाद को लेकर सोनभद्र के उम्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को हुए नरसंहार मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की. इस कार्रवाई की जद में ग्राम सभा की जमीन को 1955 में कांग्रेसी नेता की आदर्श कृषि सहकारी समिति के नाम करने वाले तहसीलदार से लेकर वर्तमान डीएम और एसपी तक पर हंटर चला है. हालांकि, 17 दिसंबर 1955 को समिति के नाम अनधिकृत तरीके से जमीन का हस्तांतरण करने वाले तहसीलदार श्रीकृष्ण मालवीय के खिलाफ यह कहते हुए कार्रवाई नहीं की गई है कि संभवतः वह जीवित नहीं होंगे. रविवार शाम को कार्रवाई के ऐलान के साथ ही आईपीएस प्रभाकर चौधरी को नया SP और एस रामलिंगम को सोनभद्र का नया कलेक्टर बनाया गया है. इस मामले की आगे की जांच के लिए सीएम ने एसआईटी के गठन का ऐलान भी कर दिया है. साथ ही सोसायटी के नाम दर्ज की गई पूरी जमीन ग्राम सभा के नाम फिर से दर्ज की जाएगी. मामले में जमीन को लेकर अब तक हुई पूरी कार्रवाई खारिज कर दी गई है.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आदिवासियों की 1300 बीघे से अधिक जमीन कांग्रेसियों ने अवैध ढंग से कब्जाई थी. 2017 में जब उन्होंने इसे बेचना शुरू किया, उसके बाद विवाद शुरू हुआ, जिसके चलते 17 जुलाई की घटना हुई. सीएम ने कहा कि 1955 से लेकर अब तक सेवारत या सेवानिवृत्त जितने भी अफसर इस मामले में दोषी पाए जाएंगे, सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इससे केवल उन्हें ही छूट मिलेगी जो अब जिंदा नहीं हैं. डीएम अंकित अग्रवाल और एसपी सलमान ताज पाटिल को पद से हटाने के साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श को-आपरेटिव सोसायटी, उम्भा सपही का गठन ही इस विवाद का कारण है. इस यह सोसायटी बिहार के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे चंदेश्वर प्रसाद नारायण सिंह के चाचा महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह द्वारा गठित की गई थी. महेश्वर प्रसाद भी बिहार कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य और एमएलसी रह चुके हैं. साथ ही घटना का मुख्य अभियुक्त ग्राम प्रधान यज्ञदत्त समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रमेशचंद्र दुबे का करीबी रहा है. सपा सरकार के दौरान उसके भाई को सड़क ठेका भी मिला था. बताया कि घटना की जांच के लिए बनी समिति को पता चला है कि सोसायटी की जमीन पर 140 परिवार तीन पीढ़ियों से खेती कर रहे थे और इसके लिए सोसायटी के प्रतिनिधि को सहमति से किराया देते थे लेकिन ग्राम प्रधान के पक्ष में जमीन का बैनामा होने के बाद किराया देना बंद कर दिया.
6 सितंबर 1989 को परगनाधिकारी राबर्ट्सगंज रहे अशोक श्रीवास्तव और जयचंद्र सिंह के खिलाफ (यदि जीवित हों) आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.  साथ ही जांच के बाद सहायक अभिलेख अधिकारी सोनभद्र राजकुमार को निलंबित करने के साथ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाए. तत्कालीन एसडीएम घोरावल विजय प्रकाश तिवारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई और एफआईआर, सीओ घोरावल अभिषेक सिंह, उप निरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविंद मिश्र, बीट सिपाही सत्यजीत यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, सीओ अभिषेक सिंह पर गुंडा एक्ट व आपराधिक वाद के तहत प्राथमिकी व थाने के अन्य के खिलाफ एफआईआर, अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार मिश्र के खिलाफ विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है.
साथ ही वाराणसी के सहायक निबंधक कृषि सहकारी समितियां विजय कुमार अग्रवाल के निलंबन और एफआईआर दर्ज कराया जाएगा. ग्राम सभा उम्भा की जमीन को गलत तरीके से लेने के खिलाफ सोसायटी के 12 सदस्यों में से जो भी जीवित हों, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम घोरावल मणिकंडन, घोरावल के प्रभारी निरीक्षक आशीष कुमार सिंह, शिवकुमार मिश्र, तत्कालीन सीओ विवेकानंद तिवारी और राहुल मिश्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. इसके अलावा घोरावल के तीन सीओ विवेकानंद तिवारी, अभिषेक सिंह, राहुल मिश्र, दो निरीक्षकों मूलचंद्र चौरसिया, आशीष सिंह, दो उप निरीक्षक शिवकांत मिश्र, पद्मकांत तिवारी समेत मुख्य आरक्षी और आरक्षी के खिलाफ विभागीय जांच भी होगी.
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