NationalWheels

लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण बिल पास

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने सवर्णों की नाराजगी दूर करने वाला विधेयक लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास करा लिया है. लोकसभा में संविधान संशोधन पर वोटिंग कराई गई. गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी विधेयक के समर्थन में 323 वोट पड़े. जबकि 03 वोट विरोध में पड़े.
लोकसभा से 124वां संविधान संशोधन बिल वोटिंग को बाद पारित कर दिया गया. बिल को समर्थन में 323 वोट पड़े और विरोध में 3 वोट पड़े. सदन में कुल 326 सांसद मौजूद थे. इसके साथ ही लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.

इसके पहले कई पार्टियों ने सवर्णों के 10 फीसदी आरक्षण पर अलग-अलग तरीके से तर्क प्रस्तुत किए. राजद ने जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी के नारे के साथ सभी के लिए उसकी आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग उठाई. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि 100 फीसदी आरक्षण आबादी के हिसाब से दिया जाए. टीएमसी सांसद ने इसे राजनीतिक स्टंट के रूप में बताया. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने 10 फीसदी आरक्षण का समर्थन किया. रामदास अठावले ने कहा कि इससे सामाजिक समानता की भागीदारी बढ़ेगी. AIADMK के सांसद थंबीदुरई ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल के खिलाफ सदन से वॉक आउट कर रही है.
विपक्ष  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण के संविधान संशोधन बिल पर बहस के बीच हस्तक्षेप करते हुए इस बिल को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज किया. अरुण जेटली ने कहा कि विपक्षी दलों के घोषणा पत्र में कई बार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण की बात कही गई है जो कि जुमला थी. जेटली ने कहा कि सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण से सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन नहीं होता.
जेटली ने कहा कि कांग्रेस कह रही है कि वो इस बिल से सैद्धांतिक रूप से सहमत है लेकिन सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आरक्षण के कई बार प्रयास हुए लेकिन उनके प्रयास इस रूप में नहीं थे कि कोर्ट में ठहर पाते. जेटली ने इसके लिए नरसिंहराव सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन व समय-समय पर राज्य सरकारों द्वारा इस हेतु बनाए गए कानूनों का जिक्र करते हुए ये बात कही.
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों ने या तो नोटिफिकेशन निकाला या सामान्य कानून बनाया लेकिन उसका अधिकार का सोर्स क्या था. सोर्स था आर्टिकल 15 और 16 लेकिन उसके तहत सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ों को ही आरक्षण दे सकते हैं. जाति इस पिछड़ेपन का पैमाना मानी गई.
जेटली ने कहा कि नरसिंहराव सरकार ने सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण का नोटिफिकेशन निकाला लेकिन उसका कोई प्रावधान संविधान में था ही नहीं. इसलिए न्यायपालिका ने उसे नहीं स्वीकारा.
अरुण जेटली ने समझाया कि सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी की जो सीमा लगाई है वो सीमा केवल जाति आधारित आरक्षण के लिए लगाई. इसके लिए तर्क ये था कि सामान्य वर्ग के लिए कम से कम 50 फीसदी तो छोड़ी जाएं वर्ना एक वर्ग को उबारने के लिए दूसरे वर्ग के साथ भेदभाव हो जाता. इस लिहाज से मौजूदा बिल सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पीछे की भावना के खिलाफ नहीं है.
गौरतलब है कि सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में संशोधित बिल पेश किया. इस दौरान जब अरुण जेटली ने कांग्रेस और वाम दलों पर जमकर हमला बोला.

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

NationalWheels will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.