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#लोकसभा चुनाव-2019ः फर्स्ट टाइम वोटर मीन्स गेम चेंजर!

#लोकसभा चुनाव-2019ः फर्स्ट टाइम वोटर मीन्स गेम चेंजर!
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

आलोक श्रीवास्तव

देश में पहली बार वोट देने वाले युवा वोटरों की संख्या इस बार काफी ज्यादा है। हर पार्टी इन पर नजरें गड़ाए बैठी है। इनके भरोसे सियासी दल अपनी रणनीति बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश औऱ बंगाल ऐसे राज्य हैं , जहां सबसे ज्यादा पहली बार वोट डालने वाले युवा हैं। चुनाव आयोग की मानें तो बंगाल में 20.1 लाख, उत्तर प्रदेश में 16.7 लाख और मध्य प्रदेश में 13.6 लाख फर्स्ट टाइम वोटर हैं। इनमें से बड़ी संख्या में वोटर लोकसभा चुनाव में मतदान करते नजर आएंगे। 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में मतदाताओं की संख्या 8.4 करोड़ बढ़ गई है और इसमें 18 से 19 साल के 1.5 करोड़ युवा मतदाता हैं। इन युवा मतदाताओं की संख्या कुल वोटरों का 1.66 फीसदी है। राजस्थान में 12.8 लाख, महाराष्ट्र में 11.9 लाख, तमिलनाडु में 8.9 और आंध्र प्रदेश में 5.3 लाख फर्स्ट टाइम वोटर हैं। वहीं दिल्ली में 97,684 फर्स्ट टाइम वोटर हैं।
देश में फर्स्ट टाइम वोटरों की कुल संख्या 8.4 करोड़
18 से 19 साल के वोटरों की संख्या 1.5 करोड़
पश्चिम बंगाल 20.1 लाख
उत्तर प्रदेश 16.7 लाख
मध्य प्रदेश 13.6 लाख
राजस्थान 12.8 लाख
महाराष्ट्र 11.9 लाख
तमिलनाडु 8.9 लाख
आंध्र प्रदेश 5.3 लाख
दिल्ली 97,684

क्यों मायने रखते हैं ये फर्स्ट टाइम वोटर

1 जनवरी, 2018 कोई सामान्य तारीख नहीं थी। नई शताब्दी में पैदा हुए लोग 18 वर्ष के हुए थे।  इन लोगों के लिए यह जीवन का निर्णायक साल रहा होगा। वे 21वीं शताब्दी में हमारे राष्ट्र के भाग्य-विधाता बनेंगे।  मोटे तौर पर अनुमान है कि देश में ऐसे 8.4 करोड़ मतदाता इस बार आम चुनाव में पहली बार वोट डालेंगे। कुल 90 करोड़ मतदाताओं में इस तबके की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है। औसतन 1,54,696 नए वोटर जुड़े हर लोकसभीट सीट पर।  अगर 70% वोटिंग हर सीट पर औसतन हो तो 1,08,287 नए वोट पड़ेंगे। पिछले आम चुनाव में एक लाख वोट या उससे कम अंतर से 188 सीटों का फैसला हुआ था। ऐसे में इन वोटरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्या बेरोजगार कर सकते हैं चोट ?

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने अपनी नई किताब ‘द थर्ड पिलर’ पर बात करते हुए पिछले दिनों कहा था कि देश में नौकरियों की भारी किल्लत है। सरकार इस पर सही से ध्यान नहीं दे रही है। तो क्या बेरोजगार इस मुद्दे पर अपने वोट के जरिए चोट करेंगे ?
देश में बेरोजगारी दर फरवरी 2019 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार यह सितंबर 2016 के बाद सबसे ऊपर पहुंच गई है । फरवरी 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत थी। पिछले साल देश में जहां 40.6 करोड़ लोगों के पास रोजगार था,  वहीं इस साल फरवरी में यह संख्या अनुमानित तौर पर घटकर 40 करोड़ पर पहुंच गई है। सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक 1.1 करोड़ लोगों का रोजगार जीएसटी और नोटबंदी के कारण छिन गया। रिपोर्ट की मानें तो नोटबंदी के कारण कई छोटे व्यापार भी बंद हो गए थे। इस साल श्रम भागीदारी में कमी देखने को मिली है। जनवरी 2019 में जहां 43.2 प्रतिशत लोग काम में जुटे हुए थे तो वहीं फरवरी में गिरकर यह 42.7 प्रतिशत पहुंच गया।  एक साल पहले, फरवरी 2018 में, लोगों की भागीदारी 43.8 प्रतिशत थी। बता दें कि सीएमआईई के आंकड़े देशभर के लाखों घरों के सर्वे पर आधारित होते है। इस संस्था के आंकड़ों पर काफी लोगों को भरोसा होता है। आंकड़ा सामने आने के बाद लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल अब केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। इन दिनों देश में पूरी राजनीति कमोबेश हर राजनीतिक दल सोशल साइटों के जरिए ही कर रहे हैं।
  • बेरोजगारों में सबसे ज्यादा परेशान ज्यादा पढ़े लिखे युवा हैं।
  • निरक्षर कोई भी काम कम पैसे पर भी करने को तैयार हैं।
  • निरक्षरों में बेरोजगारी दर घट कर 0.8 फीसदी हुई
  • पांचवीं तक पढ़े युवाओं में यह आंकड़ 1.3 फीसदी
  • इंटर तक पढ़े युवाओं का बेरोजगारी दर 10.6 फीसदी
  • ग्रेजुएट-पीजी तक पढ़े लिखे का बेरोजगारी दर 13.2 प्रतिशत

 

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