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लॉकडाउन में फंसे प्रतियोगी छात्रों की पीड़ा भी तो सुनिए मुख्यमंत्री जी

लॉकडाउन में फंसे प्रतियोगी छात्रों की पीड़ा भी तो सुनिए मुख्यमंत्री जी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मजदूरों से मकान का किराया न लेने की अपील के बाद कई मजदूरों को राहत है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सौरभ सिंह सोमवंशी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मजदूरों से मकान का किराया न लेने की अपील के बाद कई मजदूरों को राहत है। लेकिन बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के और पीजी में रहने वाले विश्वविद्यालयों के छात्र परेशानी में हैं। उनका आरोप है कि लॉकडाउन में भी मकान मालिक और पीजी वाले उनसे किराया मांग रहे हैं।
कई छात्रों के घर से हर महीने खर्च के लिए पैसा आता है जबकि कई छात्र कोचिंग या ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च पूरा करते हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते सब ठप है। ऐसे में इन छात्रों की मांग है कि किराया वसूलने के लिए दबाव न बनाया जाए, बल्कि इसके लिए मोहलत दी जाए।
यूपीएससी सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे मुखर्जी नगर में रहने वाले विनय मिश्र ने बताया कि लॉकडाउन में एक छात्र के लिए रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदना ही मुश्किल है, ऐसे में घर का किराया देना असंभव सा है।
मॉडल टाउन में किराये के मकान में रह रहे आदित्य पांडेय का कहना है कि आज जब पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है, ऐसे में हम जैसे विद्यार्थी जो महाराजगंज जैसे जिले से आकर दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं, उनको पढ़ाई के साथ-साथ हर स्तर पर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वो कहते हैं, एक तरफ जहां हमारी पढ़ाई बंद है, वहीं दूसरी तरफ किराये की मार है। हम लोग सरकार से यह मांग करते हैं कि हमारा किराया माफ किया जाए।
उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी विजय शंकर गुप्ता लॉकडाउन में घर गए हैं। उनका कहना है कि मेरे जैसे छात्र जो ग्रामीण परिवेश से दिल्ली आकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण किराया जुटा पाना भी मुश्किल हो रहा हैं, क्योंकि आय के सभी स्रोत बंद हैं। हमारे परिवार की आजीविका कृषि पर निर्भर है। दिल्ली में मकान मालिक धमकी भरे अंदाज में किराया मांग रहे हैं। हम चाहते हैं कि हमारा किराया माफ किया जाए, अन्यथा हम जैसे छात्रों को दिल्ली छोड़ना पड़ सकता है।
गार्गी कॉलेज में पढ़ने वाली निकिता एक पीजी में रहतीं हैं। उनका कहना है कि पीजी वाले 16 हजार रुपये महीना लेते हैं। हमारा तीन महीने का किराया पहले से जमा था, लेकिन इस माह का किराया उन्होंने हमे देने के लिए कहा है। हमने किराया नहीं होने की बात कही तो उन्होंने 12 हजार रुपये मांगे हैं। ऐसे समय में जब सबकुछ बंद है, मैं या घरवाले कहां से किराया देंगे।
बलिया निवासी डीयू में शोधार्थी आशीष पांडेय का कहना है कि होली से ही हम लोग घर पर हैं, क्योंकि उसके बाद डीयू बंद हो गया और फिर लॉकडाउन हो गया, ऐसे में पैसों का अभाव है। मकान मालिक का दिल्ली से बार-बार फोन आ रहा है, जबकि मार्च का किराया दिया जा चुका है। हमारी दिल्ली सरकार से मांग है कि जैसे मजदूरों के लिए रियायत की अपील की गई, उसी तरह छात्रों के लिए भी की जाए।
इसी तरह की स्थिति प्रयागराज पटना लखनऊ और देश के तमाम शहरों में रहने वाले उन छात्रों की है जो ट्यूशन और कोचिंग से अपना पेट भरते थे और मकान मालिक को किराया भी देते थे सरकार को इन लोगों की सुध लेनी चाहिए।

 


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