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आयात के लिए प्रतिबंधित हथियारों की 101 से और आगे बढ़ेगी सूची, जानिए विशेषज्ञों की राय

आयात के लिए प्रतिबंधित हथियारों की 101 से और आगे बढ़ेगी सूची, जानिए विशेषज्ञों की राय
रक्षा मंत्रालय ने 101 रक्षा उपकरणों और हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगाकर यह निर्णय लिया है कि इन उपकरणों का विनिर्माण यही भारत में होगा। आत्‍मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के मिशन को सफल बनाने की यह कवायद महज संख्‍या तक सीमित नहीं रहेगी। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो इस 101 की सूची में अभी कई और उपकरण जुड़ेंगे और आने वाले समय में भारत रक्षा उपकरणों के निर्यात में बड़ी भूमिका अदा करेगा।
इस कदम से घरेलू रक्षा उद्योगों को कितना फायदा होगा, इस बारे में फिक्की डिफेंस एयरोस्पेस कमिटी के सदस्य एन रवीस्वरन ने कहा कि मुख्य रूप से भारतीय रक्षा उद्योगों के लिए ही उठाया गया कदम है। अभी उसमें 101 सामानों की सूची है, जिसे छोटे-बड़े उद्योग पूरा करेंगे जिसके बाद इसकी सूची निश्चित ही बढ़ जायेगी। घरेलू उद्योग के लिए अलग से बजट में रखा गया है। यानी रक्षा बजट में से 52 हजार करोड़ रुपये इस साल घरेलू रक्षा सौदे के लिए होंगे। रक्षा बजट में घरेलू और विदेशी सौदे के लिए अलग-अलग बजट भी बनाये गये हैं। इससे भारतीय उद्योगों को फायदा होगा जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।
पूर्व सीआईडीएस रिटायर्ड वाईस एडमिरल, शेखर सिन्हा ने प्रसार भारती ने प्रसार भारती से बातचीत में कहा कि यह पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनर शिप के लिए बहुत अच्छा अवसर है। इससे रोजगार के तमाम अवसर मिलेंगे। वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि इनमें से कई सामान ऐसे हैं जो पहले से भारत में बनते हैं, लेकिन उनमें लगने वाले कलपुर्जे विदेशों से मंगवाये जाते हैं। लेकिन अब रक्षा मंत्रालय ने सीधे इन पर बैन लगा दिया है, यानी ये विदेश से नहीं मंगवा सकते हैं। ऐसे में जब भारत इन कलपुर्जों को बनायेगा तो बाकी देशों के पास भारत से खरीदने का ऑप्शन होगा। इससेभारत की पोस्ट कोविड अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
गौरतलब है कि सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए), रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने 101 वस्तुओं की एक सूची तैयार की है, जिनके आयात के लिए निर्धारित समय सीमा के बाद उनके आगे के आयात पर प्रतिबंध होगा। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य भारतीय रक्षा उद्योग को भविष्य में सशस्त्र बलों की आवश्यकताएं पूरी करने के साथ अपने स्वयं के डिजाइन और विकास क्षमताओं का उपयोग करके या रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा डिजाइन और विकसित प्रौद्योगिकियों को अपनाकर नकारात्मक सूची में शामिल वस्तुओं का निर्माण करने के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा।
रक्षा मंत्रालय ने भारत में विभिन्न गोला-बारूद / हथियारों / प्लेटफार्मों / उपकरणों के निर्माण के लिए भारतीय उद्योग की मौजूदा और भावी क्षमताओं का आकलन करने के लिए यह सूची सेना, वायु सेना, नौसेना, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू), आयुध निर्माण बोर्ड (ओएफबी) और निजी उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ कई दौर की मंत्रणा के बाद तैयार की है।

 


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