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महामारी के दौरान प्रयागराज और कौशांबी के गांवों में वाम संगठनों की सभाएं, सीएए विरोधी नेताओं की रिहाई की उठाई मांग

महामारी के दौरान प्रयागराज और कौशांबी के गांवों में वाम संगठनों की सभाएं, सीएए विरोधी नेताओं की रिहाई की उठाई मांग

सूबेदार सिंह

प्रयागराजः कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप अभी कम नहीं हुआ है। सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों, बैठकों और सभाओं पर लगी रोक के बावजूद वामपंथी संगठनों से जुड़े प्रगतिशील महिला संगठन और नौजवान भारत सभा के सदस्यों ने प्रयागराज और कौशाम्बी के कई गावों में सभा की है। यही नहीं, प्रयागराज और कौशांबी के ग्रामीण क्षेत्रों से सीएए विरोधी नेताओं के समर्थन में आवाज बुलंद की गई।
बैठकों में ‘सब याद रखा जाएगा’ के देशव्यापी अभियान के तहत मांग उठाई गई कि ‘‘सफूरा जरगर, गुलफिशा, इशरत को रिहा करो, सीएए विरोधी आन्दोलन के सभी गिरफ्तार नेताओं को रिहा करो, यूएपीए रद्द करो, उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई हिंसा के असली दोषियों को गिरफ्तार करो, आदि नारे लगाते मांगें बुलंद की गईं।

इस विरोध सभा में जोश के साथ यह भी नारा लगा कि ‘काले लोगों पर पुलिस हमले बंद करो’ और यह भी मांग की गयी कि सभी को खाना और काम दो तथा जातीय व यौन उत्पीड़न बंद करो।
ये सभाएं बीकर, कंजासा, रेही, सड़वां, भीटा, घूरपुर, जलालपुर, जारी, मदारीपुर, उजिहिनी, जसरा व अन्य स्थानों पर हुईं। सभा में भाग लेने वालों में भीमलाल, राम विलास, राम बालक, प्रमोद, बसंतलाल, सुखराज, धरमवीर, संजय, फूलकली, रेखा देवी, सोमा देवी, उमेश, संतोष, आशीष, महादेवी, सुमन, श्याम कुमारी, आकृति व अन्य थे। इन समारोहों को सक्रिय रूप से कराने में कई ऐसै लोगों के भी नाम हैं जिनका नाम संगठन की विज्ञप्तियों में नहीं है।

 


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