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प्रयागराज माघ मेला-2020 के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई श्रद्धा की डुबकी

प्रयागराज माघ मेला-2020 के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई श्रद्धा की डुबकी

प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर माघ मेला-2020 की औपचारिक शुरुआत भी पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ हो गई

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

ज्ञानेंद्र तिवारी

प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर माघ मेला-2020 की औपचारिक शुरुआत भी पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ हो गई. गंगा-यमुना और संगम पर बने स्नान घाटों पर लाखों लोगों ने श्रद्धा की डुबकी लगाकर जीवन को धन्य माना. कड़ाके की ठंड और कोहरे के बीच भोर में चार बजे से ही स्नान करने वाले घाटों पर पहुंचने लगे. स्नान जारी है. संगम घाट पर स्नान करने वालों की भारी भीड़ है. स्नानार्थियों की सुविधा के लिए मेला प्रशासन ने मार्ग प्रकाश, सड़क, पानी और सवास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई हैं. साथ ही घर से आने और स्नान कर लौटने के लिए अलग-अलग स्थानों से बसें और ट्रेनें रवाना की जा रही हैं. रेलवे स्टेशनों पर भी व्यापक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं. मेला क्षेत्र में भी उत्तर मध्य रेलवे ने टिकट काउंटर खोले हैं.
पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही माघ मेला की शुरुआत हो चुकी है. पहले नहावन से लेकर अब पूरे एक महीने तक संगम क्षेत्र पर आस्था और धर्म का संगम रहेगा. जगह-जगह साधु-सन्यासियों के पांडाल भी लगाए गए हैं. साथ ही माहभर मेला क्षेत्र में रहकर कल्पवास करने वालों के लिए यात्री सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं. हालांकि, मेला शुरू होने के ठीक पहले हुई बारिश से स्थितियां थोड़ी खराब हुईं लेकिन प्रशासन ने चौकसी रखते हुए अव्यवस्थाओं को नियंत्रित भी कर लिया.
संगम क्षेत्र में खूब भीड़ लगेगी. अगला स्नान खिड़ी का पड़ेगा. इस बार माघ मेला में 5 किलोमीटर लंबा होगा स्नान घाट के इतजाम किए गए हैं,. 2560 बीघे में मेला बसाया गया है. श्रदधालुओं को चिकित्सा सुविधाओं के लिए 20-20 बेड छोटे अस्पतालों के साथ 2 बड़े अस्पताल भी बनाए गए हैं.
हिंदू धर्म के मान्यता के अनुसार पौष पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास होता है. इस दिन संगम में नहाने से, दान देने से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसीलिए मोक्ष प्राप्त करने के लिए पौष पूर्णिमा के स्नान को बहुत शुभ माना गया है. आज की स्थिति को सूर्य और चंद्रमा का संगम भी कहा जाता है. क्योंकि पौष का महीना सूर्य का महीना होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की रात होती है. पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है.

 


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