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#Kumbh2019 संगम तक पहुंचने के रास्ते में अटकाए गए रोड़े से श्रद्धालुओं की भीड़ उम्मीद से कम

#Kumbh2019 संगम तक पहुंचने के रास्ते में अटकाए गए रोड़े से श्रद्धालुओं की भीड़ उम्मीद से कम
उठा सवाल- ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों द्वारा टोकाटाकी, ज्यादा बैरिकेटिंग और 10 से 20 किलोमीटर पैदल चलने की वजह से तो स्नानार्थियों की संख्या कम नहीं हो रही है? संगम क्षेत्र में पुण्य स्नान करने आए भक्तों का अनुभव तो यही बता रहा है
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       

 लालचंद्र शुक्ल

प्रयागराज । कुंभ शुरू हो चुका है। पहला स्नान 15 जनवरी को मकरसंक्रांति पर सम्पन्न भी हो चुका है। प्रशासन का दावा रहा कि 14 और 15 जनवरी को दो करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम, गंगा और यमुना में स्नान किया है। 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा स्नान एक करोड़ सात लाख लोगों ने डुबकी लगाई, जबकि प्रयागराज शहर की सड़कें और कुंभ क्षेत्र की सुनसान चकर्ड प्लेट ( लोहे की सड़कें) दावे को नकारने के लिए काफी हैं। मेला प्रशासन के दावे के मुताबिक तो हर सड़क, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों के साथ मेला क्षेत्र में भीड़ होनी चाहिए लेकिन है नहीं। अब सवाल यह उठने लगा है कि ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों द्वारा टोकाटाकी, ज्यादा बैरिकेटिंग और कुंभ शटल बसों की भरमार के बाद भी 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलने की वजह से तो स्नानार्थियों की संख्या कम नहीं हो रही है?
मध्य प्रदेश के रीवा से आए शैलेन्द्र पांडेय का कहना है कि इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने के बाद संगम आने के लिए पौष पूर्णिमा के दिन कोई साधन नहीं मिला। किसी तरह धीरे-धीरे पैदल चलकर मेला पहुंचा। कहा कि मेरी उम्र 60 साल की है। ऐसे में इतनी लंबी दूरी पैदल चलना संभव नहीं था लेकिन राम नाम जपते यहां पहुंच गया। प्रयागराज की सड़कें काफी चौड़ी हैं। फोर लेन की सड़कें हैं। एक लेन पैदल वालों के लिए और दूसरी लेन पर परेड के पार्किंग तक गाड़ियां चलाई जा सकती थी परन्तु मेला के दिन ऐसा न कर प्रशासन ने सिर्फ स्नानार्थियों के लिए दिक्कत ही पैदा की है।
इलाहाबाद के ही राजेन्द्र शुक्ला का कहना है कि मेरे पास चार पहिया वाहन है। शहर की सड़कों पर भीड़ ज्यादा नहीं थी। आसानी से परेड के पार्किंग तक जाया जा सकता था लेकिन जगह-जगह पुलिस वालों ने बैरिकेटिंग कर रास्ता रोक रखा था। लिहाजा स्नान करने गया ही नहीं। कौन पुलिस वालों से तू-तू , मैं-मैं करे और मुसीबत मोल ले। किसी अन्य दिन स्नान कर लेंगे।
कानपुर से आए कृष्ण मोहन सक्सेना का कहना था कि बस को नेहरू पार्क में ही रोक दिया गया। वहां से शटल बस मिली, उसने सिविल लाइंस बस अड्डा छोड़ दिया। वहां से पैदल ही संगम तक आया। हमारे साथ कई लोग और आने वाले थे , लेकिन वे नहीं आए। उनका कहना था कि जो खबरें आ रहीं हैं उसके मुताबिक सुविधा का प्रचार-प्रसार तो बहुत किया गया है लेकिन हकीकत में सुरक्षा के नाम पर बहुत ही पाबंदी है। इससे बेहतर है मुख्य स्नान के बाद किसी अन्य दिन नहा लेंगे। धार्मिक काम तो कभी भी किया जा सकता है।
गोरखपुर से आए गोविंद राम त्रिपाठी का कहना है कि उन्हें अंदावा ( झूंसी ) में ही रोक दिया गया। उनके साथ कई और लोग भी थे। इतनी दूरी पैदल चलना बुढौती में संभव नहीं था। सो, त्रिवेणीपुरम में अपने एक परिचित के यहां रुक गए। जबकि रास्ता खाली था, बड़ी गाड़ी न सही ई-रिक्शा को मेला क्षेत्र तक आने का परमिशन दिया जा सकता था? शासन ने बुजुर्गों की सुविधा के लिए ई-रिक्शा चलाने की घोषणा भी की लेकिन वह दिखे नहीं। पौष पूर्णिमा के दूसरे दिन आराम से आकर संगम में डुबकी लगाई। उनका कहना था कि अब जब भी आना होगा मुख्य स्नान के दूसरे – तीसरे दिन ही आएंगे। मुख स्नान पर आवश्यक से अधिक सुरक्षा सेहत पर भारी पड़ रही है।
लखनऊ के गोविंद गुप्ता का अनुभव बहुत ही खराब रहा। उनका कहना है कि फाफामऊ में ही बस को रोक दिया गया। शटल बसों पर किराया वसूला जा रहा था, जबकि शासन ने मुफ्त बस यात्रा की बात कही है। शटल बस वाले सड़कों कहीं भी उतार दे रहे थे। फाफामऊ से ही किसी तरह ई-रिक्शा से बंधवा तक पहुंचा और पैदल ही वहां से संगम। इस बीच पुलिस वालों ने इतना घुमाया कि थक कर पस्त हो गया। जबकि इलाहाबाद में पर्याप्त जगह है। आसानी से संगम के नजदीकी पार्किंग स्थल तक तो गाड़ी आ ही सकती है लेकिन पुलिसवालों ने एक न सुनी। पुलिस वालों को क्या दोष दिया जाए, जैसा मेला प्रशासन कह रहा होगा पुलिसकर्मी वैसा ही कर रहे होंगे।
पौष पूर्णिमा के दूसरे दिन सबकुछ सामान्य था। आराम से मेला घूमा और स्नान भी किया। गोविंद का निष्कर्ष था कि सुरक्षा के नाम पर पब्लिक को परेशान किया जा रहा है, जबकि इलाहाबाद में खुली जगह पर्याप्त है। सरकार मुख्य नहान के दिन जो सुविधा देने का दावा कर रही है वो फेल हो जा रहा है। जबकि दूसरे दिन लोग आसानी से संगम पहुंच जा रहे हैं। इन असुविधाओं को लोग अब जान गए हैं इसलिए मुख्य स्नान से इतर अन्य दिन संगम में डुबकी लगाना उनके लिए आरामदायक है। कुंभ तो 4 मार्च तक है, इस तारीख के बीच कभी भी स्नान किया जा सकता है।

 

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