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#CAA को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कहा- धार्मिक भेदभाव करता है ये कानून

#CAA को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कहा- धार्मिक भेदभाव करता है ये कानून

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अब तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ही सड़कों पर दिख रही थी लेकिन केरल सरकार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अब तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ही सड़कों पर दिख रही थी लेकिन केरल सरकार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि यह कानून धार्मिक आधार पर भेदभाव करता है. इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए. साथ ही केरल ऐसा पहला राज्य भी बन गया है जिसने नागरिकता संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में सड़कों पर हुई हिंसा के बाद देश की संसद से स्वीकृत कानून का गैर भाजपाई राज्य सरकारों ने नए सिरे से लड़ाई छेड़ी है. सीएए को लेकर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं लेकिन यह पहला मौका है जबकि किसी राज्य की सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. केरल सरकार ने अनुच्छेद 131 में यह मूलवाद दाखिल किया है. केरल सरकार ने आरोप लगाया है कि नागरिकता संशोधन कानून धार्मिक आधार पर भेदभाव करता है.
बता दें कि संसद से पारित कानून के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के शिकार हुए अल्पसंख्कों हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता पोर्ट पर हुए समारोह में कहा कि यदि भारत यह कानून लागू नहीं करता तो इसका विरोध नहीं होता. विरोध नहीं होता तो दुनिया यह भी नहीं जान पाती कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का किस हद तक उत्पीड़न हो रहा है. इस कानून के जरिए पाकिस्तान की करतूतों को उजागर किया गया है.
फिलहाल, केरल समेत, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे गैर भाजपा शासित राज्यों ने यह ऐलान कर रखा है कि सीएए कानून को उनके राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा. यह भी बता दें कि सीएए कानून को लेकर पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं. इसे लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है. विपक्षी दल इस कानून के तहत तीनों देशों से आए मुसलमानों को भी नागरिकता देने की मांग उठा रहे हैं. 10 जनवरी 2020 से सीएए लागू किया जा चुका है.

 


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