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#Kashmir में जरूरी दवाओं की कमी का दावा, प्रशासन ने आरोप नकारे

#Kashmir में जरूरी दवाओं की कमी का दावा, प्रशासन ने आरोप नकारे
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
धारा-370 और 35ए की समाप्ति के ऐतिहासिक फैसले के बाद कश्मीर घाटी में फैले आतंकियों औेर उनके समर्थकों के हौसले भले ही चकनाचूर हो गए हों लेकिन कश्मीर को लेकर राजनीति करने वाले इसे एक अंतिम मौके के रूप में भुनाने के भरसक प्रयास में जरूर जुटे हैं. ऐसे लोग कश्मीरियों में यह बात फैलाने की कोशिशों में जुटे हैं कि केंद्र सरकार का यह ऐतिहासिक फैसला उनकी आजादी और जीवन के लिए मुश्किलें लेकर आएगा. हिरासत से बाहर सड़कों पर घूम रहे कश्मीर के कुछ नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि घाटी में जरूरी दवाओं की बेहद किल्लत है. दावा किया गया है कि घाटी में प्रशासन की सख्ती के कारण बड़ी संख्या में दवा की दुकानें नहीं खुल पा रही हैं. दवाओं की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. कश्मीर प्रशासन ने इन दावों को यह कहते हुएखारिज किया है कि 376 पंजीकृत जरूरी दवाएं सभी सरकारी और निजी दुकानों पर उपलब्ध है.
कश्मीर प्रशासन ने कहा है कि नोटिफाइड जरूरी दवाओं की उपलब्धताके साथ 62 अनिवार्य जीवन रक्षक दवाएं भी दुकानों पर उपलब्ध हैं. इसके साथ ही जम्मू और चंडीगढ़ में तीन व्यक्तियों की ड्यूटी लगाई गई है कि दवाओं और बेबी फूड को मांग के अनुसार तेजी के साथ डिस्पैच कर घाटी में भेजें.

कश्मीर प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि श्रीनगर में 1666 केमिस्ट दुकानें पंजीकृत हैं. इनमें से 1165 दुकानें खुली हुई हैं. कश्मीर घाटी में 7630 दवा की दुकानें और 4331 थोक विक्रेताओं की दुकानें भी खुली हैं. 65 फीसदी दुकानें खुली हैं. ऐसे में यह दवाओं की किल्लत होने का आरोप गलत है.
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के 70 साल पुराने कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अस्थाई कानून को मोदी सरकार ने 5 अगस्त को खत्म कर दिया. साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में घोषित कर दिया. घाटी में आतंक समर्थक आम लोगों को भड़काकर अव्यवस्था न फैलाएं, इसके लिए सरकार ने सुरक्षा के भी तगड़े बंदोबस्त किए हैं. बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण आतंकियों के हौसले पस्त हैं. पुरानी व्यवस्था पोषक तमाम नेता विभिन्न जेलों में हिरासत में रखे गए हैं. मीडिया के एक हिस्से में यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद कश्मीर घाटी की स्थिति भयावह होने वाली है. प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण घाटी में तमाम किस्म की दिक्कतें भी बताई जा रही हैं. हालांकि, राज्यपाल प्रशासन इन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है.

दूसरी तरफ घाटी में प्रशासन की तरफ से लगाई गईं तमाम पाबंदियां भी धीरे-धीरे हट रही हैं. बाजार बिना किसी प्रतिरोध के खुल रहे हैं. दुकानें भी खुल रही हैं. लालचौक के बाजार पहले की तरह सजने लगे हैं. पेट्रोल और राशन की किल्लत की कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है.

 

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