कर्नाटकः #शरिया कानून की आड़ में 13 हजार लोगों से ठगा 1500 करोड़ रुपये

मुस्लिमों में प्रचलित शारिया कानून का हवाला देकर कर्नाटक में हजारों लोगों के ठगे जाने का खुलासा हुआ है. अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक करीब 13 हजार से ज्यादा लोगों को ठगा जा चुका है. इन लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. ठगी जा चुकी रकम 1500 करोड़ तक पहुंच गई है. अभी इसमें और बढ़ोत्तरी हो सकती है.  इस कंपनी का आफिस बंद हो जाने की खबर मिलने के बाद इसमें निवेश करने वाले अब्दुल पासा नामक एक निवेशक की मौत भी हो चुकी है.
बताते हैं कि जैसे-जैसे लोगों को आई मॉनेटरी एडवायजरी (आइएमए) का आफिस बंद हो जाने के बारे में पता चल रहा है वो पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. शुक्रवार तक कर्नाटक पुलिस ने इस कंपनी के 7 निदेशकों को हिरासत में ले लिया था, इनसे पूछताछ जारी है. उनसे हुई पूछताछ के आधार पर अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है.
कर्नाटक सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसकी जांच के लिए 10 सदस्यी स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम का गठन किया है. पुलिस इस कंपनी से जुड़े हर निदेशक की तलाश कर रही है. साथ ही ये पता लगाया जा रहा है कि निवेशकों ने कंपनी में जो पैसे और सोने-चांदी जमा किए, इन लोगों ने उसका कहां निवेश किया है?

क्या दिया प्रलोभन?

वर्ष 2006 में कर्नाटक में आई मॉनेटरी एडवायजरी (आइएमए) नाम से एक इस्लामिक बैंक और हलाल निवेशक कंपनी का आफिस खोला गया. शरिया का हवाला देते हुए आईएमए ने निवेशकों को 14 से 18 फीसदी प्रति माह लाभ देने का प्रलोभन दिया. धीरे-धीरे लोग जुड़ने शुरू हुए. कंपनी में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ने लगी. जैसे-जैसे समय बीतता गया लोगों को निवेश पर लाभ मिलने लगा. खबरों के मुताबिक है कि बैंक के ज्यादातर निवेशक मुस्लिम समुदाय के लोग हैं. वजह, बैंक के एजेंट धार्मिकता की आड़ में लोगों का धन निवेश करा रहे थे.
लोग खुद ही एक दूसरे से चर्चा करके उन्हें इससे जोड़ते रहे. इससे बैंक का खजाना भी बढ़ता रहा. 13 साल के बाद बीते कुछ दिनों से इसके दरवाजे बंद हो गए हैं. पुलिस के पास अब तक 13000 शिकायतें आ चुकी है. इनमें से किसी ने 20 लाख निवेश किए जाने के सबूत दिए हैं तो किसी ने 2 से 3 करोड़ रुपये के सुबूत दिए. कुछ लोगों ने बैंक में गाढ़ी कमाई से खरीदा गया सोना भी गिरवी रखा था.

शरिया कानून का हवाला देकर बढ़ाया निवेश

आईएमए ने उन्हें ‘हलाल’ निवेश विकल्प की पेशकश की. शरिया कानून के अनुसार इस्लाम में किसी भी जमा पर ब्याज का पैसा नहीं इस्तेमाल किया जाता. उसे गरीबों में दान कर दिया जाता है. आईएमए के मंसूर खान ने इसका फायदा उठाया, उसने समाज के लोगों से कहा कि वो शरिया कानून के तहत उनकी कंपनी में निवेश कर सकते हैं. जो निवेश करेगा उसको ब्याज के बजाय कंपनी को होने वाले लाभ में एक निश्चित प्रतिशत उन्हें मिलेगा.
धर्म की ओट मिलने से निवेशकों की संख्या में इजाफा होना शुरू हुआ तो बैंक में ताला लटकने तक यह संख्या बढ़ती रही. जो लोग शरिया कानून का पालन करते हैं और मानते हैं कि वे बैंकों में पैसा जमा नहीं करते हैं. ‘हलाल’ विकल्प को उस राशि के रूप में माना जाता है जिसे इस्लामिक कानून के तहत स्वीकार की गई वस्तुओं के व्यापार में निवेश किया जा सकता है और निवेशकों के साथ लाभ साझा किया जाता है. एक तरह से शिकायतकर्ता निवेशक निजी कंपनी के शेयरधारक बन गए. कुछ निवेशक ऐसे भी सामने आए हैं जिन्होंने ‘मौलवियों’ के कहने पर यहां निवेश किया था. ऐसा भी खुलासा हो रहा है कि बैंक ने निवेशकों को लुभाने के लिए कुछ मौलवियों को भी कमीशन एजेंट के तौर पर लगाया था.

ऐसे हुआ खुलासा

जानकारी के अनुसार कंपनी के कार्यालय के बाहर 5 जून से 9 जून तक रमजान के कारण अवकाश का नोटिस लगा था, लेकिन 10 जून को भी कार्यालय नहीं खुला. इसी दौरान निवेशकों के पास कंपनी के संस्थापक मोहम्मद मंसूर खान का एक संदेश मिला, जिसके बाद निवेशक परेशन हो गए. ये संदेश काफी तेजी से निवेशकों के बीच पहुंचने लगा, जिसके बाद लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हुई. शिकायतकर्ता निवेशकों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. ऐसे में आशंका है कि निवेशकों की संख्या 20 हजार तक पहुंच सकती है. साथ ही ठगी की रकम भी 2500 करोड़ तक पहुंच सकती है.

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