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जरा घुलके… जरा मिलके वाला रूहआफजा गर्मी के मौसम में बाजार से गायब, प्रयागराज में ब्लैक मार्केटिंग

जरा घुलके… जरा मिलके वाला रूहआफजा गर्मी के मौसम में बाजार से गायब, प्रयागराज में ब्लैक मार्केटिंग
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

प्रशांत श्रीवास्तव

लखनऊः जरा घुलके… जरा मिलके…, ये है इंडिया मेरी जान, जिंदगी का टेस्ट बदलता है, जब इंडिया घुलता-मिलता है…रूह अफजा घुलके जियो… लेकिन इस बार गर्मी में न ही घर-घर की पसंद रूह अफजा उपलब्ध है और न ही लोगों की रूह को ठंडक पहुंचाने का दावा करने वाला यह विज्ञापन।
गर्मी चरम पर पहुंच चुकी है। पारा 44 से 46 डिग्री के आसपास घूम रहा है लेकिन बाजार में गर्मी में शीतलता प्रदान करने वाला पेय रूह आफजा बमुश्किल मिल रहा है। रिटेलर्स का दावा है कि पिछले करीब एक महीने से रूह आफजा बाजार से नदारद है। रिटेलर्स इसके बारे में ज्यादा तो नहीं जानते लेकिन उनका दावा है कि थोक विक्रेता 146 रुपये अधिकतम खुदरा बिक्री वाली बोतल के लिए 140 रुपये वसूल रहे हैं। थोक विक्रेताओं ने रिटेलर्स को जानकारी दी है कि अलीगढ़ बेस कंपनी में इस गर्मी में उत्पादन ही नहीं हुआ है। स्टोर में रखे माल की आपूर्ति बाजार में हो रही है।
पाक-ए-रमजान का पवित्र महीना बस अब कुछ दिन ही रह गये हैं। उसके साथ गर्मी भी अपने चरम पर है। रमजान में रोजे के दौरान एक चीज इफ्तार में होना करीब-करीब जरूरी सा हो गया है वो है रूहआफजा, जो बाजार से गायब है। गर्मियों में हर घर हर परिवार की पसंद रूह अफजा इस बार बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा है। वर्षों से गर्मी की शुरुआत होते ही टेलीविजन से लेकर तमाम माध्यमों से रूह अफजा का विज्ञापन दिखने लगता था, लेकिन इस बार गर्मी दस्तक दे चुकी है और रूह अफजा की कहीं कोई खबर नहीं है। हालांकि, बाजार में रूह आफजा जैसे अन्य कंपनियों के उत्पाद तो उपलब्ध हैं लेकिन लोगों की जुबान पर चढ़ चुके इस उत्पाद की तलाश कुछ ज्यादा ही है।
सूत्रों के अनुसार तरह-तरह की खबरें आ रही हैं कि खबर है कि रूह अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के मालिकों के बीच आपसी विवाद की वजह से प्रोडक्शन पर असर पड़ा है। हालांकि कंपनी इस तरह की चर्चाओं को खारिज कर रही है, लेकिन कंपनी कुछ कहे फिलहाल बाजार से रूह अफजा गायब है।
दुकानदारों का कहना है कि ऑर्डर के बावजूद कंपनी सप्लाई नहीं कर रही है। ऐसे में असली वजह क्या है ये साफ नहीं हो पाया है। इस मसले को लेकर जब हमने हमदर्द कंपनी से बात की तो कंपनी का कहना है कि प्लांट में टेक्निकल खराबी की वजह से रूहआफजा का प्रोडक्शन रोक दिया गया था। कंपनी का कहना है कि अगले हफ्ते से बाजार में रूह आफजा फिर ग्राहकों को आसानी से मिलने लगेगा, क्योंकि प्लांट में तेजी से प्रोडक्शन चल रहा है और अगले हफ्ते तक बाजार में उपलब्ध करा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी रूहआफजा की काफी मांग है। अब जब कंपनी एक हफ्ते में रूह अफजा आसानी से मिलने की बात कह रही है तो ग्राहकों में एक उम्मीद जगी है। रूहआफजा का उत्पादन 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल माजिद ने शुरू किया था, अब अब्दुल माजिद की तीसरी पीढ़ी यानी उनके पोते कंपनी को संभाल रहे हैं।

क्या है रूहआफजा

रूहअफजा एक गैर-अल्कोहल केंद्रित स्क्वैश है। यह 1906 में ब्रिटिश भारत के गाजियाबाद में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद द्वारा तैयार किया गया था। उनके द्वारा और उनके बेटों, हमदर्द (वक्फ) प्रयोगशालाओं, पाकिस्तान और हमदर्द (वक्फ) प्रयोगशालाओं, भारत द्वारा स्थापित कंपनियों द्वारा निर्मित किया गया था। 1948 से कंपनी भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रोडक्ट का उत्पादन कर रही है।
अन्य कंपनियां इन देशों में भी एक समान पेटेंटयुक्त नुस्खा तैयार करती हैं। रूहआफजा की विशिष्ट यूनानी नुस्खा कई तरह के तत्वों को जोड़ती है। जैसेकि गुलाब, जो लू (उत्तरी भारत और पाकिस्तान और बांग्लादेश की गर्मी की हवा) के लिए एक उपाय के रूप में उपयोग किया जाता है। आमतौर पर रमजान के महीने से यह पेय जुड़ा होता है, जिसमें आमतौर पर इफ्तार के दौरान खपत होती है। इसे शर्बत का स्वाद बढ़ाने के लिए शीतलपेय के रूप में पिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के दुकानदार बोले-डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम
उत्तर प्रदेश के दुकानदारों का कहना है कि सप्लाई बंद होने की वजह से रूह-अफजा नहीं मिल रहा है। डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम है। दुकानदारों का कहना है कि आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि सप्लाई के मुताबिक रूह-अफजा की सप्लाई न हुई हो। ऐसे में लगता है कि कुछ गड़बड़ है। रूहअफजा ब्रांड 100 साल से ज्यादा पुराना है। हमदर्द आयुर्वेद की दुनिया में बहुत बड़ा ब्रांड है, लेकिन, रूहअफजा हर घर की पसंद है। ऐसे में उम्मीद है कि रूहअफजा बहुत जल्द वापस आ सकता है।
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