Nationalwheels

आतंक पर चौतरफा प्रहार, संपत्ति जब्ती और जुर्माने के साथ जेकेएलएफ भी प्रतिबंधित

आतंक पर चौतरफा प्रहार, संपत्ति जब्ती और जुर्माने के साथ जेकेएलएफ भी प्रतिबंधित
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पाकिस्तान और म्यांमार में सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के साथ ही केंद्र सरकार ने देश के अंदर भी आतंक पर चौतरफा धावा बोल दिया है. पिछले 24 घंटे के अंदर कश्मीर घाटी में सात आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ठिकाने लगाया तो गुरुग्राम में आतंकी सरगनाओं के पैसे से खरीदे गए फ्लैट को जब्त कर लिया गया. शुक्रवार को ही सात करोड़ रुपये की तीन संपत्तियों पर जब्ती की कार्रवाई की गई है. यही नहीं, हुर्रियत नेताओं सैयद अली शाह गिलानी पर विदेशी मुद्रा मामले में 14.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. जुर्माने की कार्रवाई जेकेएलएफ के यासीन मलिक पर भी की गई. हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान राष्ट्रीय दिवस में शामिल होने की इजाजत भी नहीं दी गई. जमाते इस्लामी के बाद देर शाम होते-होते गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ को भी प्रतिबंधित कर दिया. सरकार अलगाववादी नेताओं को मिल रही सरकारी सुरक्षा पहले ही वापस ले चुकी है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा से संबंधित मंत्रिमंडलीय समिति ने जेकेएलएफ को प्रतिबंधित सूची में डालने का फैसला किया. जेकेएलएफ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के विभिन्न धाराओं के तहत प्रतिबंधित किया गया है. इसके नेता यासिन मलिक पहले से हिरासत में है और जम्मू की जेल में बंद है. जेकेएलएफ अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस का हिस्सा है. 1988 से ही घाटी में हिंसक वारदातों में शामिल रहा है. गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 1989 में घाटी में कश्मीरी पंडितों की हत्या और उन्हें पलायन के लिए मजबूर करने में यासिन मलिक की अहम भूमिका थी और वह कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का जिम्मेदार था.
जेकेएलएफ के खिलाफ आतंकी हमले, हत्या और हिंसा के जम्मू-कश्मीर पुलिस में कुल 37 एफआइआर दर्ज हैं. वायु सेना के जवानों की हत्या के दो मामलों की जांच सीबीआइ कर रही है. यही नहीं, एनआइए ने भी हाल ही में एक केस दर्ज किया है. वीपी सिंह की सरकार में गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण और इसके बदले में आतंकियों को छुड़ाने में भी यासिन मलिक की अहम भूमिका थी. चौंकाने वाली बात यह है कि इन घटनाओं में उसके शामिल होने की पुख्ता जानकारियों के बाद भी यासिन मलिक और जेकेएलएफ के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. यह तब है जबकि यासिन मलिक खुलेआम वायुसेना के चार जवानों की हत्या की बात कबूल कर चुका है.
आतंकी तंत्र पर चौतरफा हमला
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जेकेएलएफ के खिलाफ कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. इस अभियान के तहत दो रणनीति पर अमल किया जा रहा है. पहला, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों को पूरी तरह से छूट दे दी गई है. दूसरा, आतंकियों को संरक्षण देने और फलने-फूलने में मदद करने वाले वित्तीय तंत्र को ध्वस्त किया जा रहा है. अलगाववादी नेताओं को मिल रही सरकारी सुरक्षा को वापस लेना और लश्करे तैयबा और आइएसआइ की ओर से मिलने वाले फंडिंग को भी रोका जा रहा है.
गौरतलब है कि आतंकी और अलगाववादी नेताओं तक पाकिस्तान से मिलने वाले फंड को पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले जहूर वटाली तिहाड़ जेल में बंद है. ईडी ने उसकी संपत्तियों को भी जब्त कर लिया है. ईडी का दावा है कि जहूर बटाली आयात-निर्यात की आड़ में न सिर्फ दुबई में आइएसआइ और लश्करे तैयबा से करोड़ों रुपये लेता था. बल्कि दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग से भी नकद पैसे लेता रहा है. दिल्ली में बैठने वाला वटाली ही यह रकम अलगाववादियों, पत्थरबाजों, आतंकियों और उन मदरसों व मस्जिदों तक पहुंचाता था, जो स्थानीय युवाओं को आतंकी बनने के लिए प्रेरित करते थे. आतंकी फंडिंग को लेकर एनआइए भी अलगाववादी नेताओं की रीढ़ तोड़ने में जुटा है.

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *